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मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) अपने जियो प्लेटफॉर्म को विदेशी शेयर बाजार में लिस्ट कराने पर काम कर रही है. हालांकि, अभी तक ये तय नहीं है कि जियो प्लेटफॉर्म को कहां और कितने परसेंट हिस्सेदारी के साथ कराया जाएगा.
रिलायंस इंडस्ट्री के चेयरमैन मुकेश अंबानी के कारोबारी स्किल को आप सिर्फ इस बात से जान सकते हैं कि जब पूरी दुनिया कोरोना महामारी से परेशान है, कारोबार में घाटा हो रहा है वहीं दूसरी तरफ अंबानी निवेश लाने में जुटे हैं.
अप्रैल के महीने में ही जियो प्लेटफॉर्म में फेसबुक ने 43,574 करोड़ का निवेश किया था. इसके बाद मई में रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अमेरिकी कंपनी केकेआर को 11,367 करोड़ रुपये में जियो प्लेटफॉर्म्स की 2.32 फीसदी हिस्सेदारी बेचने का ऐलान किया है. बीते एक महीने में मुकेश अंबानी की कंपनी का यह पांचवा बड़ा सौदा है. केकेआर ने इस डील में रिलायंस ग्रुप की डिजिटल कारोबार इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स को शेयर के हिसाब से कुल 4.91 लाख करोड़ रुपये मूल्य का आंका. करीब एक महीने पहले फेसबुक के निवेश के साथ, जियो प्लेटफॉर्म्स में निवेश का सिलसिला शुरू हुआ था.
सवाल उठता है कि लेकिन रिलायंस जियो इस निवेश के पैसे का करेगा क्या? फेसबुक और सिल्वर लेक जैसी कंपनियां जियो में निवेश के लिए उत्सुक क्यों हैं? वैसे जियो के एक बयान में कहा गया था कि निवेशक कंपनी की ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी, स्मार्ट डिवाइस, बिग डेटा एनालिटिक्स, अर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग, मिक्स्ड रियलिटी और ब्लॉकचेन पर पकड़ से प्रभावित हैं. लेकिन कुछ और भी है. भारत में 5G लागू होने की पहल को लेकर रिलायंस जियो बड़ा गेम खेल रहा है. कंपनी बिना किसी थर्ड पार्टी प्लेयर के 5G लागू करने की योजना बना रही है. कंपनी खुद की टेक्नोलॉजी डेवलप करेगी.
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