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अगर आपका फोन नजरों से दूर हो जाए, तो आप परेशान हो जाते हैं. अगर फोन किसी दिन घर में ही छूट जाए, तो आप पागल हो जाते हैं. आप हमेशा फोन पर व्यस्त रहने को यह कहकर सही ठहराते हैं कि कहीं कोई जरूरी ई-मेल छूट न जाए.
रोज फोन इस्तेमाल करने से आपकी अंगुलियों को इसकी आदत भी हो गई है. लेकिन स्मार्टफोन एडिक्शन क्लब के आदरणीय सदस्यों, कृपया अपने फोन को नीचे रख दें, नहीं तो आपका चेहरा मुरझा जाएगा.
टेक नेक (गर्दन पर पड़ने वाली झुर्रियां), धुंधला दिखना, सेल्फी के कारण मौत, कार्पल टनल सिंड्रॉम यानी अंगुलियों व हाथों में दर्द के बाद अब बारी है स्मार्टफोन से चेहरे पर पड़ने वाले प्रभाव की!
जैसे धूम्रपान करने वालों के होंठो की ऊपरी त्वचा सिकुड़ जाती है, वैसे ही स्मार्टफोन इस्तेमाल करते हुए गर्दन और चेहरे की मांसपेशियों में अत्यधिक झुकाव से 18 से 39 साल के लोग गाल में सिलवटे पड़ने और गर्दन पर झुर्रियों से ग्रस्त हो जाते हैं.
ध्यान रहे, अगर आपने जल्दी ही अपने स्मार्टफोन से दूरी नहीं बनाई, तो झुर्रियां छुपाने के लिए स्कार्फ और बंद गले के कपड़े इकट्ठे करने पड़ सकते हैं.
जब आप बाहर धूप में फोन में लिखे हुए छोटे-छोटे अक्षर पढ़ते हैं, तो इससे आंखों के आसपास की त्वचा पर अत्यधिक दबाव बनता है.
त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार, आजकल उनके पास कम उम्र की ऐसी कई लड़कियां आती हैं, जिन्हें आंखों के पास झुर्रियों और त्वचा सिकुड़ने की शिकायत है, जबकि ऐसी परेशानियां 30 से 40 साल की उम्र में नजर आती हैं.
आंखों पर तनाव कम करने के लिए आसपास की जगह के अनुसार स्क्रीन की ब्राइटनेस एडजस्ट कर लें. फोन का टेक्स्ट साइज जितना हो सके, बड़ा कर लें, भले ही आपको अपनी आखें दादी की तरह महसूस हों. साथ ही अपनी त्वचा को पूरे दिन हाइड्रेट और नमीयुक्त बनाए रखें.
बिस्तर पर जाने से पहले ई-मेल पढ़ना आपके शरीर की मेलाटॉनिन उत्पादित करने की क्षमता को बुरी तरह प्रभावित करता है.
मेलाटॉनिन एक ऐसा केमिकल है, जो आपकी नींद में सहायक होता है. फोन से निकलने वाली नीली रोशनी गहरी नींद भंग कर देती है. इससे आप नशा-सा महसूस करते हैं, आंखें फूल जाती हैं और त्वचा मुरझा जाती है.
आपकी त्वचा को तरोताजा रखने के लिए आठ घंटे की नींद आवश्यक है. लेकिन आपके लिए रात में फोन इस्तेमाल करना भी जरूरी है, तो स्क्रीन की ब्राइटनेस बहुत कम रखें और नीली रोशनी अवरुद्ध करने वाला कवर (ऑनलाइन उपलब्ध है) खरीद लें. ये रोशनी की तीव्रता को कम कर देता है.
अत्यधिक इस्तेमाल के बाद फोन बहुत गर्म हो जाते हैं और संवेदनशील त्वचा इससे बहुत प्रभावित होती है. यह मुंहासे पैदा कर सकता है, मेलाटॉनिन के उत्पादन में गड़बड़ी कर सकता है और काले धब्बे भी बन सकते हैं, जिन्हें हटाना बेहद मुश्किल है.
जितना हो सके, ईयरफोन का इस्तेमाल करें और अपने फोन को दिन में कम से कम एक बार एंटीबैक्टीरियल वाइप से साफ करें. मुंहासे तनाव से और बिगड़ हो जाते हैं, इसलिए गहरी सांस लें और रोज कम से कम दस मिनट के लिए ध्यान लगाएं.
गर्दन की त्वचा आपके चेहरे की त्वचा से ज्यादा संवेदनशील होती है. कोलोजन फाइबर केवल सीमित संख्या में ही टूट सकते हैं और लगातार गर्दन का उठना और झुकना छोटे कोलोजन फाइबर्स को त्वचा के अंदर तोड़ देता है और फिर इससे झुर्रियां बनने लगती हैं.
फोन को अपनी आंखों के स्तर तक उठाकर रखें, ताकि आपकी त्वचा बहुत ज्यादा झुके नहीं. चेहरे की जॉ लाइन और गर्दन के पास की त्वचा पर हमेशा त्वचा को मजबूती देने वाली क्रीम लगाएं.
टेक नेक सुनने में मूखर्तापूर्ण जरूरी लगता है, लेकिन त्वचा विशेषज्ञों का कहना है कि इस समस्या के बढ़ने के पुख्ता प्रमाण मौजूद हैं.
इसलिए ऊपर देखते हुए ज्यादा समय बिताएं. अब कृपया मुझे अनुमति दें, अब मैं ताजा हवा के लिए बाहर जा रही हूं. आप भी ऐसा कीजिए, इसके लिए आपकी गर्दन बाद में मेरा आभार व्यक्त करेगी.
(क्विंट हिन्दी, हर मुद्दे पर बनता आपकी आवाज, करता है सवाल. आज ही मेंबर बनें और हमारी पत्रकारिता को आकार देने में सक्रिय भूमिका निभाएं.)
Published: 19 Jan 2016,11:47 AM IST