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भारत में कोरोना वैक्सीन की ऊंची कीमतों को लेकर विवाद हो गया है. इस बीच भारत सरकार के पूर्व आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम ने वैक्सीन कीमतों को उलझन और इनके राजनीतिकरण से बचाने के लिए 3 सुझाव दिए हैं.
इन तीन सुझावों में निजी निर्माता की अनिश्चित्ता की स्थिति का समाधान, वैक्सीन की एक कीमत और केंद्र सरकार द्वारा आर्थिक भार उठाने जैसी चीजें शामिल हैं.
पहले सुझाव में मशहूर अर्थशास्त्री ने कहा कि सरकार को निर्माताओं को सही कीमत अदा करना चाहिए. यह सौदेबाजी कर निजी क्षेत्र, चाहे घरेलू या विदेशी हो, उसके लिए अनिश्चित्ता पैदा करने का वक्त नहीं है.
अरविंद सुब्रमण्यम का कहना है कि पूरे भारत में वैक्सीन मुफ्त में लगाई जाए. वैक्सीन की अलग-अलग कीमतें और जटिलताएं अनैतिक, गैरजरूरी हैं, इन्हें लागू करने में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. अगर सभी को मुफ्त में वैक्सीन दे दी जाएगी, तो इस मुद्दे के राजनीतिकरण से भी बचा जा सकेगा.
सुब्रमण्यम का तीसरा सुझाव कहता है कि राज्यों को नहीं, बल्कि केंद्र को वैक्सीन का पूरा भार उठाना चाहिए। इसके लिए कारण देते हुए सुब्रमण्यम कहते हैं 1) वायरस राज्यों की सीमा को नहीं मानता 2) केंद्र के पास राज्यों की तुलना में बेहतर संसाधन हैं. 3) जितनी जिंदगियां बचाई जाएंगी और जितनी आर्थिक गतिविधियों को सुरक्षित किया जाएगा, उनकी तुलना में यह कीमत बहुत कम है.
इस बीच भारत बॉयोटेक ने कोवैक्सिन की कीमत की भी घोषणा कर दी है. यह वैक्सीन सरकार के लिए 600 रुपये और प्राइवेट में 1200 रुपये में उपलब्ध होगी.
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