कांग्रेस ने नई वैक्सीन पॉलिसी में गिनाई 5 कमिया-’गरीबों को नुकसान’
पिछले 24 घंटों में 2.59 लाख COVID केस सामने आए हैं
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पी चिदंबरम | (फाइल फोटो: PTI)
देश में कोरोना केस बढ़ते जा रहे हैं. पिछले 24 घंटों में 2.59 लाख COVID केस सामने आए हैं और 1761 मौतें दर्ज हुई हैं. कई राज्यों से अभी भी ऑक्सीजन, दवाइयों और कोरोना वैक्सीन की कमी की खबरें आ रही हैं. ऐसे में कांग्रेस ने 20 अप्रैल को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र पर हमला बोला. पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि केंद्र सरकार ने आखिरकार मान लिया है कि देश में वैक्सीन की कमी है.
चिदंबरम ने कहा कि ये प्रेस कॉन्फ्रेंस पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के पीएम मोदी को लिखे खत और 19 अप्रैल को वैक्सिनेशन पॉलिसी में हुए बदलाव से संबंधित है.
पी चिदंबरम ने कहा कि वैक्सीनेशन पॉलिसी में बदलाव का स्वागत है, लेकिन इसमें कई कमी हैं. पूर्व केंद्रीय मंत्री ने पांच ‘कमियां’ गिनाईं:
नई पॉलिसी के हिसाब से राज्य ही 45 साल से कम उम्र के गरीब तबके को वैक्सीन देने की जिम्मेदारी और कीमत चुकाएंगे. ये वो लोग हैं जो हेल्थकेयर और फ्रंटलाइन वर्कर नहीं हैं. केंद्र सरकार ने गरीबों के प्रति अपनी जिम्मेदारी छोड़ दी है. इस निर्देश से प्रवासी मजदूर सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे.
प्राइसिंग में लिबरलाइजेशन करके और वैक्सीन डोज की कीमत तय न करके केंद्र सरकार प्राइस बिडिंग को बढ़ावा दे रही है. वैक्सीन जिस कीमत पर केंद्र को मिलती थी, उस पर राज्यों को नहीं मिलेगी. सीमित संसाधन वाले राज्यों को इससे नुकसान होगा. किसी को नहीं पता है कि पीएम केयर्स फंड के तहत जोड़े गए हजारों करोड़ कहां गए हैं.
नई पॉलिसी ये नहीं समझती है कि दिक्कत सिर्फ वैक्सीन प्रोडक्शन की नहीं, बल्कि फाइनेंसिंग, खरीदारी, डिस्ट्रीब्यूशन और राज्यों के साथ कोऑर्डिनेशन की भी है. मनमोहन सिंह के खत में दी गई सलाह को नजरंअदाज करते हुए ये पॉलिसी वैक्सीन मैन्युफेक्चरर्स को कैपिटल इंवेस्टमेंट नहीं देती है, जिससे वैक्सीन प्रोडक्शन बढ़ सके.
ये पॉलिसी अनिवार्य लाइसेंसिंग के प्रावधान को लागू नहीं करती है, जिससे कि बाकी घरेलू मैन्युफेक्चरर भी मंजूर की गई वैक्सीनों को बना कर सप्लाई बढ़ा सकें.
पॉलिसी में बाकी देशों में मंजूर की गईं विदेशी वैक्सीनों को इंपोर्ट करने की बात कहती है, लेकिन ये नहीं बताती कि क्या किसी विदेशी मैन्युफेक्चरर ने अपनी वैक्सीन को एक्सपोर्ट करने पर सहमति जताई है. अगर हां, तो क्या केंद्र सरकार इंपोर्ट करके इन वैक्सीनों को राज्यों को बांटेगी.