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अरब सागर और लक्षद्वीप पर बना कम दबाव का क्षेत्र चक्रवाती तूफान में और तेजी ला सकता है और यह अगले सप्ताह महाराष्ट्र और गुजरात के तटीय राज्यों तक पहुंच सकता है. भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने रविवार को यह जानकारी दी.
कम दबाव का क्षेत्र और तनाव आईएमडी के आठ-श्रेणी के पैमाने पर वे पहले दो स्तर हैं, जिनका उपयोग चक्रवातों को उनकी तीव्रता के आधार पर वर्गीकृत करने के लिए किया जाता है.मौसम ब्यूरो ने कहा कि समुद्र की स्थिति बहुत खराब होगी और मछुआरों को 4 जून तक समुद्र में न उतरने की सलाह है.
आईएमडी ने कहा कि अरब सागर पर एक कम दबाव के क्षेत्र के प्रभाव के कारण केरल में मानसून की शुरुआत के लिए 1 जून से स्थितियां अनुकूल हो जाएंगी.
केरल में मानसून की आगमन की तारीख हर साल 1 जून और महाराष्ट्र में 10 जून के आसपास की होती है. पूवार्नुमान लगाने वाली एक निजी एजेंसी ने शनिवार को दावा किया था कि मानसून पहले ही केरल से टकरा चुका है, लेकिन पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय द्वारा जोर देकर फिर से अपने दावे को दोहराया गया.
मंत्रालय के सचिव ने कहा, "सोशल मीडिया में केरल पर मानसून की शुरुआत के बारे में खबर सही नहीं है. मॉनसून केरल में नहीं आया है. स्टीफन हॉकिंग ने कहा है कि ज्ञान का सबसे बड़ा दुश्मन अज्ञानता नहीं है, बल्कि ज्ञान होने का भ्रम है."
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