सचिन वझे:नदी से मिला नंबर प्लेट,सरकारी कर्मचारी की लापता गाड़ी का

वझे पर आरोप है कि उन्होंने मुकेश अंबानी के आवास के बाहर विस्फोटक से भरी एसयूवी लगाने की साजिश रची थी.
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सचिन वझे | (फोटो: Altered by Quint Hindi)
सचिन वझे

मुकेश अंबानी के घर के बाहर विस्फोटक मिलने और मनसुख हिरेन की मौत के मामले में जांच कर रही एनआईए को मीठी नदी से जो दो नंबर प्लेट मिले थे उसकी डीटेल पता चल गई है. ये नंबर प्लेट औरंगाबाद के एक सरकारी कर्मचारी के नाम पर रजिस्टर है.

द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक विजय मधुकर नाडे ने नवंबर 2020 में गाड़ी के लापता होने की रिपोर्ट दी थी और उसी के संबंध में एक प्राथमिकी दर्ज कराई थी.

NDTV के मुताबिक, नाडे ने बताया कि उनकी कार 16 नवंबर को औरंगाबाद के उद्धवराव पाटिल चौक से चुराई गई थी.

दरअसल, एंटीलिया केस में जांच के तहत रविवार को एनआईए सचिन वझे को लेकर मीठी नदी गई थी. एजेंसी को पता लगा था कि वझे ने नदी में कुछ चीजें फेंक दी थीं. जिसके बाद नदी में गोताखोरों की मदद से तलाशी अभियान चलाया गया. इस तलाशी अभियान में कई अहम सबूत हाथ लगे हैं. नदी में तलाशी के दौरान एनआईए को कंप्यूटर के दो सीपीयू, एक कार की नंबर प्लेट, दो डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर (डीवीआर), और एक लैपटॉप मिला था. जिसे एजेंसी ने अपने कब्जे में ले लिया है. अब इन सबूतों के आधार पर मनसुख हिरेन की मौत और एंटीलिया के बाहर विस्फोटक भरी गाड़ी रखने का राज खुल सकता है.

विजय मधुकर नाडे बताते हैं,

“मेरी कार - MH-20-FP-1539- 16 नवंबर 2020 को चोरी हो गई थी, जिसके बाद एक एफआईआर दर्ज की गई थी. मेरे पास उसकी एक कॉपी है. तीन महीने तक, कोई जानकारी नहीं थी लेकिन कल, मुझे इसके बारे में बताया किया गया था.”

दो नंबर प्लेट जो मिले हैं दोनों के रेजिस्ट्रेशन नंबर एक ही हैं. एनआईए अब जांच कर रही है कि आरोपी ने उस खास रेजिस्ट्रेशन नंबर का इस्तेमाल क्यों किया.

इससे पहले एनआईए को जांच में पता चला था कि सचिन वझे ने इस मामले के बाद अपनी हाउसिंग सोसाइटी का सीसीटीवी डीवीआर कब्जे में ले लिया था. इसके बारे में किसी भी दूसरे जांच अधिकारी को जानकारी नहीं थी.

सचिन वझे ने एक लेटर लिखकर डीवीआर हासिल की थी. जिसके बाद से ही एनआईए इस डीवीआर की तलाश कर रही थी. अब इन सबूतों की बरामदगी को एनआईए की एक बड़ी कामयाबी माना जा रहा है. फॉरेंसिक से इन हार्ड ड्राइव और डीवीआर का डेटा रिकवर करवाने के बाद मामले में बड़ा खुलासा हो सकता है.

वझे पर क्या है आरोप?

वझे पर आरोप है कि उन्होंने मुकेश अंबानी के आवास के बाहर विस्फोटक से भरी एसयूवी लगाने की साजिश रची थी, साथ ही महाराष्ट्र एटीएस द्वारा की जा रही एक समानांतर जांच में, वझे पर मनसुख हिरेन की हत्या में महत्वपूर्ण साजिशकर्ता होने का आरोप लगाया गया है.

एटीएस ने मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है - विनायक शिंदे नाम का एक सिपाही और नरेश धारे नाम का एक बुकी. धारे के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने शिंदे के लिए एक सिम कार्ड खरीदा था, जिससे मनसुख हिरेन को कॉल करके बुलाया गया था, फिर मनसुख की मौत हो गई थी.

एटीएस ने आरोप लगाया है कि शिंदे वझे का सहयोगी था और उसने वझे इशारे पर हीरेन को फोन किया था. हालांकि, वझे का मकसद अभी भी स्पष्ट नहीं है. दोनों मामले की जांच अब एनआईए कर रही है.

मनसुख हिरेन की पत्नी कमला द्वारा दर्ज की गई एक एफआईआर में, उसने परिवार के साथ वझे की कथित जुड़ाव का विस्तार किया और दावा किया कि कार 5 फरवरी तक वझे के कब्जे में थी.

राजनीतिक दबाव के बीच महाराष्ट्र सरकार ने वझे को अपराध जांच इकाई से ट्रांस्फर कर दिया था, लेकिन बाद में 13 मार्च को गिरफ्तारी के साथ ही वझे को पद से निलंबित भी कर दिया गया.

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