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पत्रकार दानिश सिद्दीकी का पार्थिव शरीर जामिया के कब्रिस्तान में दफनाया गया

Danish Siddiqui दानिश सिद्दीकी का पार्थिव शरीर रविवार देर शाम एयरपोर्ट से उनके घर पहुंच गया है

IANS
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नई दिल्ली, 18 जुलाई (आईएएनएस)। दिवंगत फोटो पत्रकार दानिश सिद्दीकी के पार्थिव शरीर को रविवार रात जामिया कब्रिस्तान में दफनाया गया। दानिश सिद्दीकी एक अंतर्राष्ट्रीय न्यूज एजेंसी में फोटो पत्रकार थे। अफगानिस्तान में सशस्त्र बलों और तालिबान के बीच संघर्ष को कवर करते हुए वह मारे गए। दानिश जामिया के पूर्व छात्र थे।

जामिया का कब्रिस्तान विशेष रूप से जामिया विश्वविद्यालय के कर्मचारियों, उनके जीवनसाथी और नाबालिग बच्चे के लिए है। दानिश के परिवार ने उन्हें यहां दफनाने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन से विशेष अनुरोध किया था।

रविवार देर शाम एयरपोर्ट से दानिश सिद्दीकी का पार्थिव शरीर उनके घर पहुंच गया है। यहां से बाद में पार्थिव शरीर को जामिया के कब्रिस्तान ले जाया गया। इस दौरान जामिया की कुलपति प्रोफेसर नजमा अख्तर ने भी दानिश सिद्दीकी को अपने एवं विश्वविद्यालय की ओर से श्रद्धांजलि दी।

दानिश सिद्दीकी को सुपुर्द-ए-खाक करने के दौरान उनके परिजनों के अलावा जामिया मिलिया इस्लामिया के कई प्रोफेसर, छात्र, पत्रकार एवं अन्य लोग उपस्थित रहे।

मंगलवार को जामिया अपने विश्वविद्यालय परिसर में एक शोकसभा आयोजित करेगा। साथ ही उसी समय विश्वविद्यालय परिसर में दानिश के अनुकरणीय कार्यों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी, ताकि छात्र इससे प्रेरणा ले सकें।

इससे पहले शनिवार को जामिया मिल्लिया इस्लामिया (जेएमआई) की कुलपति प्रोफेसर नजमा अख्तर जामिया के पूर्व छात्र एवं फोटो पत्रकार दानिश सिद्दीकी के घर गईं।

दिल्ली के जामिया नगर स्थित उनके आवास पर उन्होंने दानिश के पिता प्रोफेसर अख्तर सिद्दीकी और परिवार के अन्य सदस्यों से मुलाकात की। उनके साथ कुलसचिव और विश्वविद्यालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।

कुलपति ने प्रोफेसर सिद्दीकी को सांत्वना दी और दानिश के बारे में उनसे लगभग 40 मिनट तक कई बातें कीं। उन्होंने दानिश को अपने पिता की तरह एक सच्चा फाइटर करार दिया, जिसे वह काफी लंबे समय से जानती हैं।

प्रोफेसर अख्तर ने कहा कि दानिश ने सच्चाई को दुनिया के सामने लाने के लिए लगन से काम किया और हमेशा गलत के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने कहा, दानिश का निधन न केवल उनके परिवार और जामिया बिरादरी के लिए बल्कि पूरे देश के लिए एक अपूरणीय क्षति है।

--आईएएनएस

जीसीबी/एसजीके

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