advertisement
एक वीडियो फेसबुक और वॉट्सऐप पर काफी शेयर किया जा रहा है, जिसमें दावा किया गया है कि असम में नागरिकता कानून और एनआरसी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों को पुलिस बेरहमी से मार रही है.
इस वीडियो के साथ दावा किया गया है, 'असम में NRC लागू, लोगों को घरों से उठाना शुरू हो चुका है. मीडिया वाले आपको ये नहीं दिखाएंगे, क्योंकि वो बिक चुकी है, अब आपकी और हमारी जिम्मेदारी है कि इस वीडियो को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें.'
फेसबुक पर कई यूजर्स ने वीडियो को इसी दावे के साथ शेयर किया.
द क्विंट को भी इस वीडियो को लेकर उसके हेल्पलाइन नंबर पर कई सवाल आए.
इस दावे में कोई सच्चाई नहीं है.
शेयर किया जा रहा ये वीडियो 2013 का है, और ये असम नहीं, बल्कि बांग्लादेश की राजधानी ढाका से है. ये हिफाजत-ए-इस्लाम नाम के एक ग्रुप के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को दर्शाता है, जिसने राजधानी में कड़ी इस्लामी नीतियों को लाने के लिए एक विरोध प्रदर्शन आयोजित किया था.
2013 की न्यूज रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिसबल और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई इस हिंसा में 28 लोगों की मौत हो गई थी. दुकानों में आग लगा दी गई थी, पेड़ों को तोड़ा गया था और पूरा शहर एक युद्ध के मैदान में तब्दील हो गया था.
वीडियो में से एक फ्रेम के साथ रिवर्स सर्च करने पर हमें एक वीडियो मिला, जिसे 2013 में 'Kaagoj' नाम के यूजर ने डेलीमोशन पर अपलोड किया था. वीडियो के डिस्क्रिप्शन में लिखा है- संयुक्त बलों ने 3,000 से अधिक निर्दोष हिफजत एक्टिविस्ट को मार डाला, जब वो 6 मई को सुबह 2:30 बजे से 4:00 बजे के बीच सो रहे थे.
हमने इसके बाद यूट्यूब पर 'हिफाजत एक्टिविस्ट ढाका मौत नींद' शब्दों को सर्च किया, जिसके बाद एक वीडियो सामने आया जो अल जजीरा ने 14 मई, 2013 को अपलोड किया था. इस वीडियो में वही विज्युअल तो नहीं हैं, लेकिन इसमें से एक फ्रेम, वायरल वीडियो के फ्रेम से मिलता है.
वहीं, वायरल वीडियो में पुलिस की शील्ड पर 'RAB' लिखा है, और अल जजीरा के वीडियो में भी ये लिखा दिखा.
RAB- रैपिड एक्शन बटालियन, बांग्लादेश की एंटी-क्राइम और एंटी-टेररिज्म यूनिट है.
(क्विंट हिन्दी, हर मुद्दे पर बनता आपकी आवाज, करता है सवाल. आज ही मेंबर बनें और हमारी पत्रकारिता को आकार देने में सक्रिय भूमिका निभाएं.)