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वीडियो एडिटर: अभिषेक शर्मा
बिहार-झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोकपर्व छठ का त्योहार अब देश के कई हिस्सों में मनाया जाने लगा है. देश की राजधानी में भी इस त्योहार की धूम रहती है. 3 नवंबर को इस त्योहार के आखिरी दिन क्विंट ने दिल्ली में यमुना नदी के घाटों पर छठ के त्योहार का जाएजा लिया. हमने ये जानने की कोशिश कि आखिर प्रकृति को पूजने के इस त्योहार में पर्यावरण और स्वच्छता को लेकर लोग कितने जागरुक हैं. साथ ही दिल्ली सरकार की तैयारियों के बारे में भी जाना.
ऐसे में जब दिल्ली में जहरीली हवा, गंदे पानी में श्रद्धालुओं ने सूर्य को अर्घ्य दिया गया. लोगों में छठी मैया को लेकर तो अपार श्रद्धा दिखी, इसके बाद यानी सुबह के अर्घ्य के बाद हमने घाट का निरीक्षण फिर से किया.
हम गलत थे, छठ पूजा का कार्यक्रम खत्म होने के ठीक बाद हमने देखा कि भारी संख्या में लोगों ने प्लास्टिक, अगरबत्ती के पैकेट, फूल-माला और दूसरी चीजें इधर उधर फेंक रखी थीं. आस्था में छठ मैया की तो पूजा की गई लेकिन यमुना मैया का ध्यान नहीं रखा गया. सफाई कर्मचारियों को काफी मशक्कत करनी पड़ रही.
सफाई कर्मचारियों का कहना है, पब्लिक ध्यान नहीं रखती पॉलीथिन, कट्टे, बोरी छोड़कर चले जाते हैं. हम निकालते हैं. सफाई करने वाले कुछ वॉलेंटियर हम ये कहते हैं कि जो कुछ भी लाते हो उसको डस्टबिन में डाला जाए लेकिन कुछ लोग सरकार की सुनते नहीं है. अपनी मर्जी से करते हैं, उन पर बैन लगे.
सफाई कर्मचारी बताते हैं कि व्यवस्था को लेकर और साफ-सफाई को लेकर हमें लोगों से बहस करनी पड़ती है, कभी-कभी विवाद ज्यादा भी हो जाता है.
तैयारियों को लेकर लोगों की मिलीजुली प्रतिक्रिया हमें मिली. कई श्रद्धालुओं तैयारियों से खुश नजर आए तो कुछ फटकारते भी दिखे.
छठ पूजा में आए श्रद्धालु विनोद पटेल का कहना है -
छठ पूजा समिति के विकास राय का कहना है कि “इस साल शौचालय की गाड़ियां नहीं आईं है. छठ पूजा के लिए आए लोगों के लिए खुले में शौच करना शर्म की बात होगी.’’
छठ पूजा स्थल पर घूमते हुए हमने पाया कि नदी का पानी बेहद प्रदूषित है इतना कि पानी में उंगली भी न डाली जाए. लेकिन फिर भी लोग आस्था और श्रद्धा के नाम पर डुबकी लगा रहे हैं
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