पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम और मौजूदा वित्त मंत्री अरुण जेटली (फोटोः Altered by Quint)
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चिदंबरम Vs जेटली: नोटबैन पर पूर्व और मौजूदा FM आमने-सामने

देश के वित्तमंत्री अरुण जेटली का कहना है कि कागजी नोट लालच बढ़ाते हैं. वहीं पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम का कहना है कि अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में ज्यादातर लेन-देन कैश में ही होता है. ऐसे में मोदी सरकार डिजिटल ट्रांजेक्शन लाकर देश को पीछे धकेल देना चाहती है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर नोटबंदी को लेकर इन दोनों नेताओं के अनुमान में इतना अंतर क्यों है?

आइए जानते हैं कि बुधवार को बाइब्रेंट गुजरात समिट में अरुण जेटली ने नोटबंदी को लेकर क्या कहा.

वित्तमंत्री ने कहा, ‘कागजी नोटों के बहुत ज्यादा होने की अपनी बुराइयां हैं और यह अपने प्रति लोभ जगाता है.’

जेटली का दावा- नोटबंदी से अर्थव्यवस्था में हुआ सुधार

वित्तमंत्री जेटली ने बाइब्रेंट गुजरात समिट में नोटबंदी का गुणगान किया. उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए बड़े फैसलों की जरूरत है. उन्होंने यह भी कहा कि हर बड़े फैसले को लागू करने में कठिनाई आती है.

  • जेटली का दावा है कि नोटबंदी के बाद केंद्र सरकार को पहले से ज्यादा टैक्स मिला है.
  • जेटली के मुताबिक, बीते साल के मुकाबले इस बार अप्रत्यक्ष कर 25 फीसदी और उत्पाद कर 43 फीसदी ज्यादा वसूला गया है.
  • जेटली का दावा है कि नोटबंदी के ऐलान के बाद अर्थव्यवस्था में सुधार हुआ है.
  • वित्त मंत्री का कहना है कि नोटबंदी से कारोबार पर कोई खास असर नहीं पड़ा है.
  • जेटली का दावा- नोटबंदी के प्रारंभिक प्रभावों के बाद जीडीपी ज्यादा स्वच्छ और ज्यादा बड़ी होगी.

चिदंबरम ने नोटबंदी के फैसले को बताया देश के लिए आपदा

पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने नोटबंदी की कड़ी आलोचना की. उन्होंने कहा कि नोटबंदी देश के लिए आपदा के समान है. नोटबंदी के बाद बने हालातों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आने वाला वक्त और भी बुरा होगा.

चिदंबरम ने कहा- भारत के पड़ोसी बांग्लादेश और फिलीपींस जैसे छोटे देशों में भी इंटरनेट स्पीड भारत से बहुत बेहतर है, जबकि तस्वीर का दूसरा पहलू चिंताजनक है. भारत में स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वाली बड़ी आबादी अभी भी 2जी जैसी सस्ती सुविधा पर निर्भर है, ऐसे में अंदाजा लगाइए कि 2जी इस्तेमाल करने वाले मोबाइल उपभोक्ता के लिए डिजिटल ट्रांजेक्‍शन करना कितनी टेढ़ी खीर है.
  • नोटबंदी के फैसले से जीडीपी बुरी तरह से प्रभावित हुई है.
  • नोटबंदी के फैसले की वजह से करीब 45 करोड़ की रोजी-रोटी पर 70 दिनों तक असर पड़ा.
  • एनडीए सरकार के कुप्रबंधन, प्रशासनिक पंगुपन और भ्रष्टाचार का प्रतीक है नोटबंदी.
  • चिदंबरम ने कहा- झूठा है नोटबंदी से टेरर फंडिंग बंद होने का दावा.
  • चिदंबरम ने नोटबंदी को बताया साल का सबसे बड़ा घोटाला.