टाटा, बिड़ला, बजाज...RBI की सिफारिशों के बाद कौन खोलेगा बैंक?

NBFC भी बन सकते हैं बैंक

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बिजनेस
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NBFC भी बन सकते हैं बैंक
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RBI ने 20 सितंबर को प्राइवेट बैंकों के लिए इंटरनल वर्किंग ग्रुप (IWG) की सिफारिशों को जारी किया. RBI ने IWG का गठन प्राइवेट बैंकों के मालाकिना हक और कॉरपोरेट स्ट्रक्चर पर नियमों को रिव्यू करने के लिए किया था. इन सिफारिशों में निजी बैंकों की लाइसेंसिंग पॉलिसी में सुधार की बात की गई और कहा गया कि बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट में बदलाव के बाद बड़े कॉर्पोरेट और इंडस्ट्रियल हाउस अपना बैंक बना सकते हैं. RBI की सिफारिशों के बाद देश के दो बड़े कॉर्पोरेट घराने बैंक बनाने पर विचार कर रहे हैं.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर RBI गाइडलाइन अनुकूल रहीं तो टाटा और आदित्य बिड़ला समूह बैंकिंग लाइसेंस के लिए अप्लाई कर सकते हैं.

इसके अलावा रिलायंस और बजाज जैसे समूह के लिए भी बैंक खोलने का रास्ता साफ हो गया है. लेकिन इस सब के लिए पहले बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट में बदलाव किए जाएंगे.

RBI कमेटी ने प्रमोटर होल्डिंग को लेकर भी नए नियम जारी किए हैं. अब 15 साल बाद प्रमोटर 26 फीसदी की हिस्सेदारी रख सकते हैं. अभी ये सीमा 15 फीसदी है.  

कौन कर सकता है लाइसेंस के लिए अप्लाई?

टाटा और आदित्य बिड़ला समूह के बैंकिंग लाइसेंस लेने की ज्यादा उम्मीदें हैं क्योंकि ये दोनों ही पहले भी इसके लिए अप्लाई कर चुके हैं. 2013 में जब RBI ने निजी सेक्टर में मौकों का ऐलान किया था, तब दोनों ही कंपनियों ने बैंक लाइसेंस के लिए आवेदन किया था.

हालांकि, टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस ने अपना आवेदन वापस ले लिया था क्योंकि समूह को लगा था कि RBI की शर्तें काफी प्रतिबंध लगाती हैं और इन्हें मानने से उसके दूसरे बिजनेस पर प्रभाव पड़ सकता है.  

वहीं, आदित्य बिड़ला समूह को लाइसेंस नहीं मिला था क्योंकि RBI ने इंडस्ट्रियल हाउस को लाइसेंस देने से इनकार कर दिया था.

आदित्य बिड़ला समूह के प्रवक्ता ने RBI के ऐलान पर कहा, "हम IWG की रिपोर्ट का स्वागत करते हैं. ट्रैक रिकॉर्ड वाले NBFC और उनके साथ प्रतिष्ठित कॉर्पोरेट की ब्रांड वैल्यू बैंकिंग और इकनॉमी के फायदे नए वर्ग तक पहुंचा सकते हैं."

NBFC भी बन सकते हैं बैंक

RBI पैनल ने कहा है कि बड़ी नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियां (NBFCs) जिनके पास 50,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का एसेट साइज है, अगर उनको कामकाज करते हुए 10 साल या ज्यादा हो गए हैं तो वो कुछ बदलावों के साथ बैंक में तब्दील हो सकते हैं.

इस सिफारिश का फायदा भी टाटा और आदित्य बिड़ला ग्रुप को मिल सकता है. टाटा की NBFC टाटा कैपिटल का एसेट साइज 74,500 करोड़ से ज्यादा का है. जबकि आदित्य बिड़ला की NBFC आदित्य बिड़ला कैपिटल का एसेट साइज 59,000 करोड़ से अधिक है.  

इसका फायदा बजाज फाइनेंस लिमिटेड, L&T फाइनेंस होल्डिंग्स लिमिटेड, श्रीराम ट्रांसपोर्ट फाइनेंस लिमिटेड और महिंद्रा एंड महिंद्रा फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड को भी मिल सकता है.

RBI पैनल की बाकी सिफारिशें

  • जिन पेमेंट बैंकों को 3 साल का अनुभव है, वो कुछ बदलावों के साथ स्मॉल फाइनेंस बैंक में तब्दील हो सकते हैं. इससे पेटीएम, जियो और एयरटेल पेमेंट्स बैंकों को फायदा मिल सकता है.
  • स्मॉल पेमेंट बैंक और स्मॉल फाइनेंस बैंक 6 साल के बाद खुद को लिस्ट करा सकते हैं. बशर्ते अगर वो बैंक होने के लिए जरूरी कैपिटल को पूरा करते हैं. या फिर 10 साल से ज्यादा अनुभव वाले भी स्मॉल पेमेंट बैंक और स्मॉल फाइनेंस बैंक भी खुद को बैंक में बदल सकते हैं.
  • नए बैंकों के लाइसेंसिंग के लिए इनीशियल कैपिटल की सीमा को 500 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1000 करोड़ रुपये कर दिया है.
  • स्मॉल फाइनेंस बैंक के लिए इनीशियल कैपिटल की सीमा को 200 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 500 करोड़ रुपये कर दिया है.
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