केंद्र सरकार ने सोमवार को सार्वजनिक तौर पर माना है कि कोरोना वायरस का प्रसार हवा के जरिए भी हो रहा है. नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) वीके पॉल ने कोरोना वायरस संक्रमण को लेकर कहा, ''हवा के जरिए होने वाला ट्रांसमिशन सतही ट्रांसमिशन के मुकाबले ज्यादा प्रबल है.''
बता दें कि लांसेट पत्रिका की एक हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि इस बात को साबित करने के मजबूत सबूत हैं कि COVID-19 महामारी के लिए जिम्मेदार सार्स-कोव-2 वायरस मुख्यत: हवा के जरिए फैलता है.
ब्रिटेन, अमेरिका और कनाडा से संबंध रखने वाले 6 विशेषज्ञों के इस आकलन में कहा गया है कि बीमारी के इलाज संबंधी कदम इसलिए नाकाम हो रहे हैं क्योंकि वायरस मुख्यत: हवा से फैल रहा है.
दूसरी लहर में ऑक्सीजन की मांग ज्यादा
पॉल ने सोमवार को कहा कि भारत में कोरोना की पहली लहर में 31 फीसदी संक्रमितों की उम्र 30 साल से कम थी, इस बार यह संख्या 32 फीसदी तक है.
इसके अलावा भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के महानिदेशक बलराम भार्गव ने कहा कि अस्पताल में भर्ती मरीजों में मौत के मामलों में पहली और दूसरी लहर में कोई फर्क नहीं है, हालांकि दूसरी लहर में ऑक्सीजन की मांग ज्यादा है जबकि वेंटिलेटर की मांग ज्यादा नहीं है.
उन्होंने कहा कि COVID-19 की मौजूदा दूसरी लहर में सांस लेने में परेशानी की समस्या थोड़ी ज्यादा सामने आ रही है लेकिन गले में खराश और सूखी खांसी और अन्य ऐसे लक्षण पहली लहर में ज्यादा सामने आ रहे थे.
भार्गव ने कहा, ‘‘दूसरी लहर में करीब 54.5 फीसदी मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत हुई, जबकि पहली लहर में यह जरूरत 41.5 फीसदी थी.’’ उन्होंने कहा, ‘‘दूसरी लहर में बिना लक्षण वाले रोगियों की संख्या भी अपेक्षाकृत ज्यादा है.’’
भार्गव ने पहली लहर के 7600 और दूसरी लहर में संक्रमित हुए 1885 COVID-19 मरीजों पर की गई स्टडी के आधार पर यह बात कही.
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