‘हेलिकॉप्टर ईला’ मेलोड्रामा से लबरेज, लेकिन नहीं भर पाई उड़ान
‘हेलिकॉप्टर ईला’ मेलोड्रामा से लबरेज, लेकिन नहीं भर पाई उड़ान
फोटो:फिल्म पोस्टर 

Review: ‘हेलिकॉप्टर ईला’ मेलोड्रामा से लबरेज, लेकिन नहीं भर पाई उड़ान

'हेलिकॉप्टर ईला' फिल्म है ऐसे पेरेंट्स की जिन्हें अपने बच्चों की जिंदगी में हर एक चीज पर कंट्रोल चाहिए. ऐसी ही कहानी है एक सिंगल मदर ईला रायतुरकर (काजोल) की. जिसे अपने बेटे विवान (ऋद्धि सेन) की जिंदगी की हर एक चीज में तांका झांकी करने की आदत है.

डायरेक्टर प्रदीप सरकार ने इसी सब्जेक्ट के साथ एक सिंगल मदर और बेटे के बीच की केमिस्ट्री पर्दे पर उतारने की कोशिश की है. जिसमें एक मां अपने बेटे के हर पल की खबर रखती है. यहां तक कि उसके कॉलेज जाने के बाद भी उसका पीछा नहीं छोड़ती.

फिल्म की कहानी का सब्जेक्ट इंटरेस्टिंग था, लेकिन पर्दे पर मां-बेटे के इस रिश्ते को उतारने में डायरेक्टर प्रदीप सरकार थोड़े कमजोर नजर आए.

फिल्म में आप फ्लेशबैक में चले जाते हैं, जहां 90 के दशक में एमबीशियस पार्ट टाइम मॉडल ईला एक कामयाब सिंगर बनना चाहती है.

ईला का बॉयफ्रेंड अरुण (तोता रॉय चौधरी) जिंगल लिखते हैं. ईला का शादी करके घर बसाने का आइडिया जैसे ही उड़ान भरता है, वैसे ही कहानी में ट्विस्ट आ जाता है. और ईला के करियर को इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ती है. 

ईला अरुण, महेश भट्ट का यंगर वर्जन अनु मलिक, और बाबा सहगल ने फिल्म में कैमियो किया है. सच पूछो तो बस इस बात का इंतजार था कि फिल्म कब शुरू होगी.

फिल्म में फाइनली ये दिखाया गया कि ईला और अरुण की शादी हो जाती है और विवान का जन्म होता है. यहीं से कहानी में ट्विस्ट शुरू होता है और ईला अकेले विवान की परवरिश की पूरी जिम्मेदारी लेती है.

मितेश शाह और आनंद गांधी के फेमस गुजराती नाटक पर आधारित इस कहानी में एक ही बात को बार-बार दोहराया गया है कि मां और बेटा एक दूसरे से झगड़ा करते रहते हैं और एक दूसरे की जिंदगी में दखलंदाजी करते हैं.

फिल्म एक ही जगह पर बार-बार घूम फिर कर आ जाती है, जिससे दर्शकों को देखकर फ्रस्टेशन जरूर होगी.  
काजोल ने फिल्म में शुरू से आखिर तक अपने किरदार में जान फूंकने की कोशिश की है. कहीं-कहीं तो वो k3G की जया बच्चन की तरह भी नजर आतीं हैं, जहां उन्हें पहले से पता चल जाता है कि उनका बेटा गेट पर आने वाला है. 

ऋद्धि सेन जो कि नेशनल ऑवार्ड विनर हैं. फिल्म में ईला के बेटे का किरदार बखूबी निभाया है. जिसे पाता है कि उसकी मां उसकी जासूसी करती कर रही है, लेकिन वो परेशान होने के अलावा और कुछ नहीं कर सकता.

फिल्म में नेहा धूपिया जाकिर हुसैन और और तोता रॉय चौधरी का किरदार काफी छोटा था. अगर फिल्म में कोई अच्छी बात की जा सकती है तो वो है ईला की पंजाबी सास का किरदार जो कि किम्मी खन्ना ने निभाया है. फिल्म की बात करें को ये पूरी मेलोड्रामा फिल्म है. लेकिन इसे अच्छा बनाया जा सकता था.

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