अयोध्या मामला पहली बार साल 1885 में कोर्ट पहुंचा
अयोध्या मामला पहली बार साल 1885 में कोर्ट पहुंचा(फोटो: Shruti Mathur/The Quint)
  • 1. अयोध्या भूमि विवाद क्या था?
  • 2. पहली बार कोर्ट में कब पहुंचा अयोध्या मामला?
  • 3. सुन्नी वक्फ बोर्ड और राम लला विराजमान कब कोर्ट पहुंचे?
  • 4. 2010 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने क्या फैसला किया?
  • 5. सुप्रीम कोर्ट में हिंदू पक्ष और मुस्लिम पक्ष ने क्या...
अयोध्या केस पर SC का फैसला- हिंदुओं को मिले विवादित भूमि

सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या के रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद पर फैसला सुना दिया है. इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि विवादित जमीन हिंदुओं को दी जाए, केंद्र 3 महीने के अंदर योजना बनाए और मंदिर निर्माण के लिए एक ट्रस्ट का गठन करे. इसके साथ ही कोर्ट ने कहा है कि मुस्लिम पक्ष (सुन्नी वक्फ बोर्ड) को मस्जिद के लिए दूसरी जगह 5 एकड़ जमीन दी जाए.

सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में केशवानंद भारती केस (68 दिन की सुनवाई) के बाद अयोध्या मामले पर सुनवाई सबसे लंबी सुनवाई थी. 

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  • 1. अयोध्या भूमि विवाद क्या था?

    अयोध्या मामला पहली बार साल 1885 में कोर्ट पहुंचा
    (सांकेतिक फोटो: रिधम सेठ/द क्विंट)

    सुप्रीम कोर्ट ने 1994 के इस्माइल फारुखी केस में अयोध्या विवाद को इन शब्दों में बयां किया था-

    ‘’अयोध्या भारत के उत्तरी हिस्से में स्थित उत्तर प्रदेश के फैजाबाद जिले का एक टाउनशिप है. यह लंबे समय से एक पवित्र तीर्थस्थल रहा है क्योंकि रामायण में इस स्थान को श्री राम का जन्म स्थान बताया गया है. रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद के तौर पर जाना जाने वाला ढांचा साल 1528 में मीर बाकी ने एक मस्जिद के तौर पर बनवाया था. कुछ धड़े दावा करते हैं कि यह (ढांचा) श्री राम की जन्मभूमि मानी जाने वाली जमीन पर बनाया गया था, जहां पहले एक मंदिर था. ’’

    यहां जिस मीर बाकी का जिक्र किया गया, उसे बाबर के कमांडर के तौर पर जाना जाता है.

    हालांकि यह मजह हिंदू पक्ष और मुस्लिम पक्ष के बीच विवाद का मामला नहीं था. दरअसल इस मामले के 3 मुख्य याचिकाकर्ताओं में से दो- निर्मोही अखाड़ा और रामलला विराजमान हिंदू पक्ष से रहे. इन दोनों ने ही विवादित जमीन पर अपना-अपना हक जताया. जहां निर्मोही अखाड़ा की दलील थी कि लंबे समय से भगवान राम की सेवा करने की वजह से उसे जमीन मिलनी चाहिए, वहीं रामलला विराजमान ने कहा था कि इस जमीन पर मालिकी सिर्फ देवता की ही हो सकती है.

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