कभी ये भी दिन थे.....
कभी ये भी दिन थे.....(फोटो: रॉयटर्स)
  • 1. दोनों भाइयों की कारोबारी कहानी
  • 2. अभी किस मामले में सुनवाई चल रही है?
  • 3. दायची के फोर्टिस हेल्थकेयर और दोनों भाइयों पर क्या आरोप है?
  • 4. IHH हेल्थकेयर को क्या दिक्कत है?
  • 5. दोनों भाइयों में लड़ाई की क्या वजह है?
फोर्टिस केस: कारोबार भी चौपट हुआ और भाई,भाई भी न रहा

भारतीय हेल्थकेयर इंडस्ट्री की नामी गिरामी कंपनी फोर्टिस हेल्थकेयर का केस सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है. जापानी कंपनी ने दायची ने फोर्टिस हेल्थकेयर के पूर्व प्रमोटर मिलविंदर-शिविंदर सिंह पर केस करके रेनबैक्सी डील में गड़बड़ी का आरोप लगाया था. दायची का कहना है कि दोनों भाइयों ने अपनी हिस्सेदारी बिना कोर्ट की मंजूरी के बेच दी.

इसी मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हिस्सेदारी बढ़ाने-घटाने पर रोक लगा दी. लेकिन अब फोर्टिस कंपनी और इसमें हिस्सा खरीदने वाली IHH हेल्थकेयर मुश्किल में फंसते नजर आ रही हैं.  हिस्सेदारी खरीदने-बेचने पर सुप्रीम कोर्ट के स्टे से फोर्टिस के शेयर गिर रहे हैं. आइए समझते हैं इस पूरे मामले को.

  • 1. दोनों भाइयों की कारोबारी कहानी

    देश की फार्मा और हेल्थकेयर इंडस्ट्री का जाना पहचाना चेहरा रहे दो भाई शिविंदर और मलविंदर. पहले रेनबैक्सी और बाद में फोर्टिस, रेलिगेयर जैसी कंपनियों के मालिक रहे इन दोनों का झगड़ा अब मारपीट की हद तक जा पहुंचा है. ये कॉरपोरेट जगत के फैमिली वॉर की कहानी है. 2008 में शिविंदर-मलविंदर ने अपने पिता की बनाई कंपनी रैनबैक्सी को बेच दिया. रैनबैक्सी बेचकर जो मोटा पैसा मिला उससे इन भाइयों ने मिलकर फोर्टिस हेल्थकेयर कंपनी खड़ी की. फोर्टिस को खड़ा करने के लिए कर्ज लेकर जबरदस्त पैसा झोंका. कारोबार में नुकसान की वजह से बहुत घाटा हुआ. इसका कर्ज चुकाने के लिए इन्होंने फोर्टिस हेल्थकेयर में अपनी हिस्सेदारी मलेशियन कंपनी IHH हेल्थकेयर को बेची. अब शिविंदर-मलविंदर का दोनों कंपनी में कोई पद नहीं है.

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