जीडीपी की नई सीरीज पर सवाल उठे
जीडीपी की नई सीरीज पर सवाल उठेफोटो:iStock
  • 1. नई रिपोर्ट में क्या-क्या है
  • 2. लेकिन एक सरकारी रिपोर्ट ने तो अलग ही बात कही थी
  • 3. क्या-क्या बदला है
  • 4. रिविजन के पीछे तर्क
  • 5. नए आंकड़ों से फिर भी कई जवाब नहीं मिलते
मोदी सरकार की GDP ज्यादा या मनमोहन की, छिड़ गई है जोरदार बहस

बुधवार को नई रिपोर्ट आई जिसके हिसाब से मोदी सरकार के कार्यकाल में विकास दर यूपीए के समय से ज्यादा रही. इससे पहले एक और रिपोर्ट आई थी, वो भी सरकारी, जिसके हिसाब से यूपीए के समय में विकास दर जितनी बताई गई थी उससे कहीं ज्यादा रही.

  • 1. नई रिपोर्ट में क्या-क्या है

    नीति आयोग की तरफ से जारी ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि 2005-06 से 2013-14 के बीच औसत विकास दर 6.7 परसेंट रही. इसकी तुलना में 2014 के बाद से औसत विकास दर 7.3 रही है. और ऐसा नोटबंदी के बाद आई सुस्ती के बावजूद हुआ है. इस रिपोर्ट के हिसाब से यूपीए के समय में उतनी तेजी से ग्रोथ नहीं हुआ था जितना अब तक माना जाता रहा है. दलील यह दी गई है कि रिविजन की जरूरत नए आंकड़ों के आने की वजह से हुआ है. सबसे ज्यादा रिविजन सर्विस सेक्टर के विकास दर में किया गया हैय चूंकि सर्विस सेक्टर का जीडीपी में योगदान काफी ज्यादा है, इसीलिए विकास दर के आंकड़े भी कम हो गए हैं.

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