बोडो समझौते के दौरान अलग-अलग गुट के प्रतिनिधियों के साथ गृह मंत्री अमित शाह 
बोडो समझौते के दौरान अलग-अलग गुट के प्रतिनिधियों के साथ गृह मंत्री अमित शाह (फाइल फोटो : PTI)
  • 1. क्या है बोडो मुद्दा ?
  • 2. बोडो समझौता क्या है?
  • 3. समझौते में BTAD के लिए क्या प्रावधान हैं?
  • 4. क्या अलग बोडो राज्य की मांग अब खत्म हो गई है?
  • 5. अब ABSU का क्या रोल होगा?
  • 6. उग्रवादियों का क्या होगा?
  • 7.
बोडो समझौते का जश्न मनाने PM पहुंचे असम, जानिए कितना अहम ये फैसला?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार ( 7 फरवरी, 2020) को असम में कोकराझार के दौरे पर हैं. यहां वह बोडो समझौते पर हस्ताक्षर होने का जश्न मनाने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल हो रहे हैं. 27 जनवरी, 2020 को भारत सरकार, असम सरकार और प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन- नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड यानी NDFB के बीच एक शांति समझौता हुआ. इससे असम और पूर्वोत्तर में बोडो उग्रवाद की समस्या के खत्म होने की उम्मीद बंध गई है.

इसे नरेंद्र मोदी सरकार की एक बड़ी सफलता माना जा रहा है. आइए जानते हैं कि क्या है बोडो समझौता. क्या इससे असम के बोडो बहुल इलाके में स्थायी शांति कायम हो पाएगी? और क्या इससे बोडो लोगों के अलग राज्य की मांग खत्म हो गई है?

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