क्या आप जानते हैं कि जिस चिकन को आप खाते हैं, उसमें क्या है?


क्या आपने कभी इस बारे में सोचना बंद किया कि चिकन में प्रोटीन और स्वाद के अलावा और क्या-क्या होता है?
क्या आपने कभी इस बारे में सोचना बंद किया कि चिकन में प्रोटीन और स्वाद के अलावा और क्या-क्या होता है?(फोटो:iStock)

क्या आप जानते हैं कि जिस चिकन को आप खाते हैं, उसमें क्या है?

नॉन वेजिटेरियन लोगों के लिए चिकन के बिना जिंदगी कैसी होगी ये सोच भी नहीं सकते? स्वादिष्ट कबाब, बिरयानी या बार्बेक्यू नहीं होंगे? ओहो! लेकिन क्या आपने कभी इस बारे में सोचा कि चिकन में प्रोटीन और स्वाद के अलावा और क्या-क्या होता है?

अगली बार जब आप बटर चिकन खाएं तो याद रखें आप साथ में ये चीजें भी खा रहे हैः

1) एंटीबायोटिक अवशिष्ट

फार्म पशुओं के विकास को बढ़ाने के लिए पिछले कुछ सालों से एंटिबायोटिक का इस्तेमाल किया जा रहा है. यह माना जाता है कि ये एंटिबायोटिक इन पशुओं में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं.

कृषि में अधिक मात्रा में एंटिबायोटिक के उपयोग के कारण प्रत्यक्ष या परोक्ष तौर पर एंटीमाइक्रोबियल-रेसिस्टेंट बैक्टीरिया इंसान के संपर्क में आता है.

जुलाई 2017 में सेंटर फॉर डिजीज डायनामिक्स, इकोनोमिक्स एंड पॉलिसी (सीजीजीईपी) ने पंजाब के 6 जिलों में 18 पॉल्ट्री फार्म में किए गए एक स्टडी के अनुसार इनमें से दो तिहाई फार्म में एंटीबायोटिक रेसिस्टेंट बैक्टीरिया के अत्यधिक फैलाव का पता चला है.

द क्विंट से बात करते हुए सीडीडीईपी के निदेशक, स्टडी के लेखक रमानन लक्ष्मीनारायण कहते हैः

सर्वे किए गए 67 प्रतिशत से अधिक फार्म मुर्गों को विकसित करने के लिए एंटीबायोटिक का इस्तेमाल कर रहे थे. पॉल्ट्री में भारी मात्रा में एंटिबायोटिक का इस्तेमाल स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है. यह पर्यावरण में दवा के प्रतिरोध को बढ़ाएगा.
रामानन लक्ष्मी नारायण, सीडीडीईपी निदेशक


सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरंमेंट (सीएसई) के हालिया सर्वे के अनुसार पॉल्ट्री के अवशेषों  को असुरक्षित तरीके से खेतों में फेंके जाने के कारण पर्यावरण में मल्टी-ड्रग रेसिस्टेंट बैक्टीरिया फैल रहा है.
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरंमेंट (सीएसई) के हालिया सर्वे के अनुसार पॉल्ट्री के अवशेषों को असुरक्षित तरीके से खेतों में फेंके जाने के कारण पर्यावरण में मल्टी-ड्रग रेसिस्टेंट बैक्टीरिया फैल रहा है.
( फोटो:giphy.com )

सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरंमेंट (सीएसई) के हालिया सर्वे के अनुसार पॉल्ट्री के अवशेषों को असुरक्षित तरीके से खेतों में फेंके जाने के कारण पर्यावरण में मल्टी-ड्रग रेसिस्टेंट (बहु दवा प्रतिरोध) बैक्टीरिया फैल रहा है, जिसमें इंसान को संक्रमित करने की क्षमता है.

तीन तरह के बैक्टीरिया ई. कोली, लिबसिला न्यूमोनिया और स्टेफीलोकोकस लेनटस के 217 आइसोलेट्स को 16 एंटीबायोटिक के खिलाफ प्रतिरोधक के लिए खोजा और जांचा गया. स्टडी के अनुसार, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसमें से दस एंटिबायोटिक को मानव शरीर के लिए गंभीर रूप से महत्वपूर्ण बताया है.

हैरान? लेकिन, रुकिए सिर्फ इतना नहीं है!

2) सलमोनेला बैक्ट्रिया

कई स्टडी में पाया गया है कि रेडी टू कुक चिकन, जिसे आप खाते हैं को सलमोनेला बैक्टीरिया के साथ पैक किया जाता है, जो फूड प्वाइजनिंग का कारण बनता है.

यूएस डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर (यूडीएसए) के एक हालिया अध्ययन के अनुसार भारत में प्रोसेस्ड चिकन मीट की खपत प्रति वर्ष 20 प्रतिशत बढ़ रही है

इसका मतलब है कि हमारे चिकन तक प्रदूषण की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं

हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट में भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर के फूड टेक्नोलॉजी विभाग का सलमोनेला इन इंडियन रेडी-टू-कुक चिकन शीर्षक से किये गये स्टडी के हवाले से कहा गया है कि 48 सैंपल में से पचास प्रतिशत प्रोसेस्ड चिकन, जो 8-10 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान पर पकाया जाता है, दूषित पाया गया.

स्थिति और खराब तब मानी गई, जब पाया गया कि पांच सलमोनेला बैक्टीरिया स्ट्रेन में से चार एंटीबायोटिक-रेसिस्टेंट पाये गये. इस सैंपल में बोलनेस चिकन, ड्रमस्टीक, साउसेजेज, कटलेट्स, नगेट्स, सलामी स्लाइसेस सीक कबाब आदि को भी शामिल किया गया था.



 48 सैंपल में से पचास प्रतिशत प्रोसेस्ड चिकन, जो 8-10 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान पर पकाया  गया है, दूषित पाया गया.
48 सैंपल में से पचास प्रतिशत प्रोसेस्ड चिकन, जो 8-10 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान पर पकाया गया है, दूषित पाया गया.
(फोटो:giphy.com)

हां, आप लोगों ने इसके बारे में जरूर सुना होगा!

3) ई. कोली ट्रेसेस

हालांकि, सभी प्रकार के ई. कोली बैक्टीरिया हानिकारक नहीं होते हैं, लेकिन इसमें से कुछ हैं, जिनके कारण डायरिया, एनिमिया या किडनी फेल होने की समस्या उत्पन्न हो सकती है.

CDDEP स्टडी ने पॉल्ट्री फार्म से ई.कोली के सैंपल लिए. इसका परिणाम यह दिखाता है कि इस बैक्टीरिया के 60 प्रतिशत में रेसिस्टेंट फानफेरिंग जीन होता है
CDDEP स्टडी ने पॉल्ट्री फार्म से ई.कोली के सैंपल लिए. इसका परिणाम यह दिखाता है कि इस बैक्टीरिया के 60 प्रतिशत में रेसिस्टेंट फानफेरिंग जीन होता है
(फोटो:CDDEP)

सीडीडीईपी स्टडी ने पॉल्ट्री फार्म से इसेरिचिया कोली (ई.कोली) के सैंपल लिए. इसका परिणाम यह दिखाता है कि इस बैक्टीरिया के 60 प्रतिशत में रेसिस्टेंट फानफेरिंग जीन होता है, जो कई एंटिबायोटिक को प्रभावहीन बना देता है. यह प्रोटेक्टिव जीन दूसरे तरह के बैक्ट्रिया से आसानी से पास कर सकता है.