अरबपति बनिया कैसे बन गए डिजिटल दिशा प्रवर्तक
अरबपति बनिया कैसे बन गए डिजिटल दिशा प्रवर्तक
अरबपति बनिया कैसे बन गए डिजिटल दिशा प्रवर्तक

अरबपति बनिया कैसे बन गए डिजिटल दिशा प्रवर्तक

(ये खबर सिंडिकेट फीड से ऑटो-पब्लिश की गई है.)

 नई दिल्ली, 28 जनवरी (आईएएनएस)| सिर्फ व्यापार और लाभ पर ध्यान केंद्रित रखने वाले भारतीय बनिया समुदाय ने अपने ग्राहकों को बेहतर समझने और अपनी प्रगति को तेजी देने के लिए डिजिटल यात्रा शुरू कर दी है।

 कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), मशीन लर्निग (एमएल) और डेटा एनलिटिक्स जैसी आधुनिक प्रौद्योगिकियों का अपने व्यापारों में उपयोग कर रहा यह समुदाय जानता है कि युवा खरीदार किसे तरजीह देते हैं।

जब कीमतों की तुलना करने की बात आती है तो आज का युवा ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों को अपनाता है और ऑफलाइन खरीदारी करने के बावजूद वे उत्पाद की समीक्षा करने के लिए ऑनलाइन का ही सहारा लेते हैं।

पारंपरिक कुशलता मिश्रित आधुनिक प्रौद्योगिकियों ने बनियों की नई नस्ल तैयार की है, जिन्होंने पुरानी बुद्धिमत्ता को नकारते हुए नए तरीके अपनाए हैं।

देश के प्रमुख सोशल मीडिया विशेषज्ञ अनूप मिश्रा कहते हैं, "कोई भी व्यक्ति छोटी या बड़ी परियोजना या निवेश से नया व्यवसाय स्थापित कर सकता है, लेकिन व्यापार और बाजार के ट्रेंड की जानकारी के बिना वे सफल नहीं हो सकते। बनिया इन मामले में आगे हैं, जिन्हें पारिवारिक हुनर और समुदाय का अतिरिक्त सहयोग मिलता है।"

वैश्विक सर्विसिस फर्म डेलॉइट का कहना है कि देश में 18-35 वर्ष आयुवर्ग की आबादी 34 फीसदी है। इस आयु वर्ग के लोग इंटरनेट का अधिक उपयोग कर रहे हैं, और इसके कारण ई-कॉमर्स खुदरा व्यापार भी बढ़ रहा है।

रपट के अनुसार, खरीदारी के लिए युवाओं के बढ़ते इंटरनेट उपयोग से ऑनलाइन रिटेल व्यापार बढ़ता है। भारतीय रिटेल बाजार में ई-रिटेल की हिस्सेदारी 2017 के तीन फीसदी बढ़कर 2021 में सात फीसदी होने का अनुमान है।

कहीं भी और कभी भी खरीदारी, छूट जैसे कुछ प्रमुख कारक ऑफलाइन पर उपलब्ध नहीं हैं, जिनके कारण भारतीय युवा अब ऑफलाइन खरीदारी का रुख कर रहे हैं और बनिया इससे अच्छी तरह परिचित हैं।

सत्विको फूड्स के सह-संस्थापक और निदेशक प्रसून गुप्ता कहते हैं कि उनका विचार नाश्ता पेश करने का था, जो युवा ग्राहकों के लिए पारंपरिक भारतीय व्यंजनों से उत्पन्न लेकिन आधुनिकता की झलक के साथ हो।

गुप्ता ने आईएएनएस से कहा, "अन्य लोगों और उनकी सेवाओं से खुद को अलग करने के लिए एक नए विचार के साथ आई सात्विको ने कई परेशानियों से पार पाया है और अपने सफर में कायम रहकर आज यहां पहुंच गया है।"

उन्होंने वितरण माध्यमों को बढ़ाने और मापने के लिए एआई आधारित प्रौद्योगिकी प्लेटफॉर्म 'जिगसॉ' विकसित किया है।

बनिया लोग अपने लेन-देन का बहीखाता हमेशा अप-टू-डेट रखने के मामले में सख्त होते हैं।

(ये खबर सिंडिकेट फीड से ऑटो-पब्लिश की गई है. हेडलाइन को छोड़कर क्विंट हिंदी ने इस खबर में कोई बदलाव नहीं किया है.)

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