भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद की नई ब्रांडिंग
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद की नई ब्रांडिंग
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद की नई ब्रांडिंग

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद की नई ब्रांडिंग

(ये खबर सिंडिकेट फीड से ऑटो-पब्लिश की गई है.)

 नई दिल्ली, 15 नवंबर (आईएएनएस)| देश की चिकित्सा अनुसंधान की शीर्ष संस्था भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद ने ब्राडिंग की नई पहचान जारी की है।

  इसमें मौजूदा लोगो (प्रतीक चिन्ह) के साथ बाहर की लिखावट भी शामिल है। लोगो में बिंदु व देवनागरी लिपि परिषद की भारतीय जड़ों से जुड़ाव को दिखता है। इसकी गोल आकृति व लिखावट देखभाल व विज्ञान के साथ एकजुटता दिखाती है, जबकि सीधी रेखाएं मजबूती, पेशेवर अंदाज व कार्यक्षमता को प्रदर्शित करती हैं।

107 साल पुरानी परिषद दुनिया के सबसे पुराने चिकित्सा शोध संस्थानों में से एक है।

आईसीएमआर ने अपने सौ साल में इसने अपने लोगो में बहुत से बदलाव किए हैं। हाल की पहचान परिषद के मुख्य लोगो को पूरा करेगी, जो 'परीक्षा करिणो ही कुशला भवन्ति' के साथ ज्ञान के प्रकाश को प्रदर्शित करता है। इस संस्कृत के श्लोक का अर्थ है कि जांच के बाद इलाज शुरू करने वाला सफल होता है।

नई पहचान का अनावरण करते हुए आईसीएमआर, स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव व महानिदेशक प्रोफेसर डॉ बलराम भार्गव ने कहा, "नई पहचान का एक प्रतीक चिन्ह में बदलाव से बहुत ज्यादा महत्व है। आईसीएमआर ब्रांड देश में हमेशा स्वास्थ्य अनुसंधान में अग्रणी रहा है और इसने देश के कल्याण में अपने अनुसंधान व समाधान से काफी योगदान दिया है। आईसीएमआर की नई पहचान स्वास्थ की उभरती चुनौतियों को लेकर प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।"

(ये खबर सिंडिकेट फीड से ऑटो-पब्लिश की गई है. हेडलाइन को छोड़कर क्विंट हिंदी ने इस खबर में कोई बदलाव नहीं किया है.)

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