कांग्रेस ने सरकार के राहत पैकेज का स्वागत किया, लेकिन नाकाफी बताया
कांग्रेस ने सरकार के राहत पैकेज का स्वागत किया, लेकिन नाकाफी बताया
(फोटो: ट्विटर)

कांग्रेस ने सरकार के राहत पैकेज का स्वागत किया, लेकिन नाकाफी बताया

कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को कोरोना संकट से प्रभावित गरीबों के लिए घोषित 1.7 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज का स्वागत करने के साथ ही इसे नाकाफी करार दिया और कहा कि सरकार को किसानों, दिहाड़ी मजदूरों और वेतनभोगी वर्ग को ज्यादा राहत देना चाहिए। पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने आर्थिक पैकेज की घोषणा की तारीफ करते हुए कहा कि यह सही दिशा में उठाया गया पहला कदम है। गांधी ने ट्वीट कर कहा, ‘‘सरकार की ओर से वित्तीय पैकेज की घोषणा सही दिशा में पहला कदम है। भारत पर उसके किसानों, दिहाड़ी मजदूरों, श्रमिकों, महिलाओं और बुजुर्गों का कर्ज है जिन्हें मौजूदा लॉकडाउन में सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।’’ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने भी सरकार की ओर से घोषित आर्थिक पैकेज का स्वागत किया, हालांकि इसे नाकाफी करार दिया। उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘‘मुझे खुशी हुई कि सरकार ने एक वित्तीय कार्य योजना की घोषणा की जिसमें कुछ हद तक मेरी ओर से सुझाई गई 10 सूत्री योजना की झलक मिलती है। मैं इसका सावधानी के साथ स्वागत करता हूं।’’ चिदंबरम ने दावा किया, ‘‘यह हल्की योजना है । आने वाले दिनों में सरकार को इसका अहसास होगा कि अभी बहुत कुछ करना होगा।’’ पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने सरकार से यह आग्रह किया कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे चिकित्साकर्मियों का वेतन दोगुना किया जाए तथा कर्ज पर जाने वाली ईएमआई को कुछ महीनों के लिए टाला जाए। उन्होंने एक बयान में कहा, ‘‘समाजशास्त्रियों, अर्थशास्त्रियों और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी जी ने मांग की थी कि दिहाड़ी मजदूरों, वेतनभोगी लोगों, गरीबों और किसानों को मदद की दी जाए। आज सरकार ने एक पैकेज की घोषणा की, जिसका हम स्वागत करते हैं। कोरोना से लड़ाई लड़ने और लोगों की मदद के लिए यह कम है।’’ कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘सरकार ने प्रधानमंत्री किसान योजना का दो हजार रुपये देने का निर्णय लिया, लेकिन यह राशि तो छह हजार रुपये वार्षिक है। चार हजार रुपये काट क्यों लिया गया? पूरे छह हजार इस संकट की घड़ी में किसान को क्यों नहीं दिए जा रहे? सोनिया जी ने 7500 रुपये अतिरिक्त देने की मांग की थी। यह राशि दी जानी चाहिए। बंटाई पर खेती करने वालों और खेतों में मजदूरी करने वालों का क्या मिला?’’ उन्होंने कहा, ‘‘फसल की कटाई होने वाली है। ऐसे में सरकार बताए कि कटाई के लिए क्या इंतजाम है? अगर किसान खड़ी फसल की कटाई 20-25 दिन टाल देगा तो उसे बहुत नुकसान होगा। इस नुकसान की भरपाई कौन करेगा? सरकार से आग्रह है कि फसल कटाई और न्यूनतम समर्थन मूल्य के तहत उचित राशि का इंतजाम करे।’’ सुरजेवाला ने कहा, ‘‘जनधन खाते में 500 रुपये डालने से क्या होगा? हमारी मांग है कि 7500 रुपये की राशि डाली जाए।’’ उन्होंने कहा कि प्रति व्यक्ति अनाज देने का जो निर्णय लिया गया है, वह पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘हमारी मांग है कि हर व्यक्ति को अगले 21 दिनों के लिए 10 किलोग्राम अनाज मुफ्त दिया जाए और तीन किलो दाल दी जाए।’’ कांग्रेस नेता ने कहा कि चिकित्साकर्मियों के लिए 50 लाख रुपये की बीमा राशि स्वागत की बात है, लेकिन इनका वेतन दोगुना किया जाए। उन्होंने मांग की कि ईएमआई को तीन महीने के लिए टाला जाए। उन्होंने यह मांग भी कि जरूरी वस्तुओं की कालाबजारी पर अंकुश लगाया जाए। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने कोरोना वायरस के संक्रमण तथा इसकी रोकथाम के लिये लगाये गये लॉकडाउन से अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे असर को कम करने के लिये बृहस्पतिवार को आर्थिक राहत पैकेज की घोषणा की। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश पैकेज के तहत कोरोना वायरस के संक्रमण में लोगों के इलाज में लगे डॉक्टरों, पैरामेडिकल कर्मियों, चिकित्सा सेवा कर्मियों को 50 लाख रुपये प्रति परिवार का बीमा कवर दिया जायेगा। साथ ही उन्होंने कहा कि राशन की दुकानों से 80 करोड़ परिवारों को अतिरिक्त 5 किलो गेहूं या चावल के साथ एक किलो दाल तीन महीने तक मुफ्त उपलब्ध कराई जायेगी तथा महिलाओं, विधवाओं और बुजुर्गों को वित्तीय सहायता दी जायेगी। इसके अलावा कुछ अन्य घोषणाएं भी की गई हैं।

(ये खबर सिंडिकेट फीड से ऑटो-पब्लिश की गई है. हेडलाइन को छोड़कर क्विंट हिंदी ने इस खबर में कोई बदलाव नहीं किया है.)


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