कर्नाटक के राजनीतिक दलों ने हिंदी दिवस को भाषा को ‘थोपना’ बताया
कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी
कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामीफोटो: फेसबुक

कर्नाटक के राजनीतिक दलों ने हिंदी दिवस को भाषा को ‘थोपना’ बताया

कर्नाटक में ‘हिंदी दिवस’ को राजनीतिक दलों ने अलग ही रंग दे दिया तथा कांग्रेस एवं जद (एस) ने इसे भाषा को ‘थोपना’ करार दिया।

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हालांकि सत्तारूढ़ भाजपा ने इस भाषा को कन्नड की तरह ही सीखने की वकालत की और राज्य के लोगों से अपील की कि इसे भाषा को थोपने की तरह न देखें।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा देश के लिये साझी भाषा की वकालत किये जाने के मद्देनजर राजनीतिक दलों की तरफ से यह प्रतिक्रिया आई। शाह ने कहा था कि हिंदी सबसे ज्यादा बोली जाती है और पूरे देश को एकजुट कर सकती है।

कन्नड में ट्वीट करते हुए राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने ट्वीट किया, “हिंदी के राष्ट्रभाषा होने का झूठ बंद किया जाना चाहिए। यह सभी को जानना होगा कि यह कन्नड के जैसी ही है। भारत की 22 आधिकारिक भाषाओं में से एक।”

उन्होंने लिखा, “आप झूठ और गलत जानकारी फैलाकर एक भाषा का प्रचार नहीं कर सकते। भाषाएं एक दूसरे के प्रति स्नेह और सम्मान से समृद्ध होती हैं।”

कांग्रेस नेता ने हालांकि यह याद दिलाया कि वह हिंदी के खिलाफ नहीं हैं लेकिन भाषा को थोपे जाने के प्रयास के खिलाफ हैं।

उन्होंने ट्वीट किया, “भाषाएं ज्ञान के दरवाजे खोलती हैं। उन्हें प्यार से समृद्ध करना चाहिए न कि बलपूर्वक। मैं भी हिंदी दिवस के आयोजन के खिलाफ हूं।”

जद(एस) नेता एच डी कुमारस्वामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जानना चाहा कि देश भर में ‘कन्नड दिवस’ कब मनाया जाएगा।

कुमारस्वामी ने ट्वीट किया, “केंद्र सरकार ‘हिंदी दिवस’ मना रही है। आप कन्नड दिवस कब मनाएंगे श्रीमान नरेंद्र मोदी जो कि हिंदी की तरह ही एक आधिकारिक भाषा है? याद रखिये कि कर्नाटक के लोग संघीय प्रणाली का हिस्सा हैं।”

उन्होंने ‘हिंदी थोपना बंद करो’ का हैशटैग भी चलाया।

दूसरी तरफ प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा मंत्री एस सुरेश कुमार ने हिंदी सीखने पर जोर दिया।

चामराजनगर में जिला प्रशासन द्वारा आयोजित हिंदी दिवस कार्यक्रम के मौके पर मंत्री ने कहा,“हमनें पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के शुद्ध हिंदी में भाषणों को देखकर हिंदी सीखी। वह भारत के पहले नेता थे जो अपने भाषण हिंदी में देते थे।”

मंत्री ने कहा कि कन्नड की तरह ही हिंदी को भी समान स्थान दिया जाना चाहिए।

उन्होंने हिंदी शिक्षकों को उनकी शिकायतें दूर करने का भी आश्वासन दिया।

भाषा

(ये खबर सिंडिकेट फीड से ऑटो-पब्लिश की गई है. हेडलाइन को छोड़कर क्विंट हिंदी ने इस खबर में कोई बदलाव नहीं किया है.)


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