मोदी के अधीन देश में लोकतंत्र को खतरा : चंद्रबाबू नायडू
मोदी के अधीन देश में लोकतंत्र को खतरा : चंद्रबाबू नायडू
मोदी के अधीन देश में लोकतंत्र को खतरा : चंद्रबाबू नायडू

मोदी के अधीन देश में लोकतंत्र को खतरा : चंद्रबाबू नायडू

नई दिल्ली, 11 फरवरी (आईएएनएस)| आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने सोमवार को दावा किया कि नरेंद्र मोदी नीत भाजपा सरकार के अधीन लोकतंत्र व देश को खतरा है। इसके साथ ही उन्होंने केंद्र पर आंध्रप्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा नहीं देकर धोखा देने का आरोप लगाया। राज्य को विशेष दर्जा (एससीएस) दिलाने और आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के अंतर्गत केंद्र द्वारा किए गए अन्य वादों को पूरा करने की मांग के साथ राष्ट्रीय राजधानी में अनशन शुरू करते हुए मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने सोमवार को यहां 12 घंटे का उपवास रखा, जिसका कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने समर्थन किया।

आंध्रप्रदेश में एक दिन पहले ही मोदी ने रैली की थी, जिसमें उन्होंने नायडू पर जोरदार हमला बोला था।

उन्होंने कहा कि तेदेपा ने संसद में बार-बार यह मुद्दा उठाया।

नायडू ने कहा कि उनका अनशन 'आंध्रप्रदेश के साथ मोदी सरकार द्वारा दिए गए धोखे' के संबंध में देश के साथ संचार है।

उन्होंने कहा, "मोदी सभी को धमका रहे हैं, विपक्षी, नौकरशाह, कॉरपोरेट और यहां तक की मीडिया को भी। वह विपक्षियों और विरोधियों के खिलाफ सीबीआई, ईडी और आयकर विभाग का प्रयोग कर रहे हैं।"

उन्होंने कहा, "हम लोकतंत्र बचाना चाहते हैं। आज देश को बचाने के लिए सभी पार्टियों का एकसाथ आना लोकतांत्रिक मजबूरी है।"

विपक्षी पार्टियों से संगठित रहने का आह्वान करते हुए नायडू ने कहा, "हमें यह दिमाग में रखना होगा। मोदी को पूर्ण बहुमत दिया गया था। उन्होंने क्या किया? कुछ नहीं। भाजपा और मोदी यह पूछ कर कि आपका नेता कौन है, विपक्ष को बांटने का खेल खेल रहे हैं।"

नायडू ने कहा कि उनका यह विरोध प्रदर्शन राज्य के साथ किए गए अन्याय के खिलाफ, केंद्र को अपने वादों की याद दिलाने और आंध्र प्रदेश की ताकत का अहसास कराने के लिए है।

चंद्रबाबू ने प्रधानमंत्री को चेताया कि वह हमले बंद करें और वादों को पूरा करने के लिए तत्परता से काम करें, क्योंकि संसद सत्र में सिर्फ दो दिन ही बचे हैं। जो लोकसभा चुनाव से पूर्व अंतिम सत्र हो सकता है।

उन्होंने कहा, "अगर आप अपने किए वादों को पूरा नहीं करते हैं तो हम जानते हैं कि इसे कैसे पूरा करना है।"

(ये खबर सिंडिकेट फीड से ऑटो-पब्लिश की गई है. हेडलाइन को छोड़कर क्विंट हिंदी ने इस खबर में कोई बदलाव नहीं किया है.)

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