मप्र के चुनाव नतीजों में दिखेगी किसान और युवाओं की आवाज
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मप्र के चुनाव नतीजों में दिखेगी किसान और युवाओं की आवाज

मप्र के चुनाव नतीजों में दिखेगी किसान और युवाओं की आवाज

भोपाल, 6 दिसंबर (आईएएनएस)| मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजे 11 दिसंबर को आएंगे लेकिन उससे पहले एक बात तो साफ हो गई है कि इस बार के नतीजों में बड़ी भूमिका किसान और नौजवानों की रहने वाली है। राज्य में बढ़ा मतदान प्रतिशत इस ओर इशारा भी कर रहा है।

राज्य में हुए विधानसभा चुनाव में मतदान 75 प्रतिशत के पार पहुंच गया। पिछले चुनाव के मुकाबले इसबार महिलाओं ने मतदान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, यही कारण है कि पिछले चुनाव के मुकाबले महिलाओं के मत प्रतिशत में साढ़े तीन फीसदी का इजाफा हुआ है। मतदान में बढ़े प्रतिशत को प्रमुख राजनीतिक दल भाजपा और कांग्रेस अपने-अपने राजनीतिक चश्मे से देख रहे हैं। दोनों दलों की ओर से दावे किए जा रहे हैं कि, इस बार सरकार उनकी बनेगी।

मतदान के दौरान ईवीएम में गड़बड़ी और मतदान के बाद सामने आई कई खामियों ने सवाल उठाए है, जिसको लेकर कांग्रेस लगातार हमले कर रही है। विधानसभा नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने सरकारी मशीनरी की कार्यशैली और भाजपा के रवैये पर सवाल उठाए हैं, साथ ही कांग्रेस ने राज्य में सरकार बनाने का दावा किया है। वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस पर प्रशासन व चुनाव आयोग पर दबाव बनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि, भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनने वाली है।

इस बीच दो बातें सामने आ रही हैं, एक तो किसानों द्वारा चुनाव नतीजों का इंतजार और दूसरी ओर युवाओं का ज्यादा मुखरित होना। इससे साफ होता है कि, इन दो वर्गो के वोट चुनाव के फैसले में अहम भूमिका निभाने वाले है। इन दोनों वर्गो को लुभाने में भाजपा हो या कांग्रेस, सभी ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है।

राजनीतिक विश्लेषक रवींद्र व्यास का कहना है कि, राज्य में किसान, नौजवान और महिलाओं को मतदान प्रतिशत इस बात की गवाही दे रहा है, कि इन वगरें में जागृति आई है और वे अपने बारे में खुद फैसला करने में सक्षम है। लिहाजा यह वर्ग मतदान के लिए खुलकर निकला है। इन वगरें में सरकार के प्रति सहानुभूति है या नाराजगी, यही नतीजों से नजर आने वाली है।

व्यास कहते है कि, सत्ताधारी दल भाजपा और विपक्षी दल कांग्रेस मतदान प्रतिशत को लेकर अपनी-अपनी सुविधा के अनुसार विश्लेषण कर रहे हैं, लेकिन हकीकत क्या है, यह तो इन वर्गो के पेट में छिपा है। इन वगरें ने क्या किया है, यह तो 11 दिसंबर को मतगणना से ही पता चल सकेगा।

राज्य में भाजपा जहां लगातार चौथी बार जीत को लेकर अरमान संजोए हुए है तो वहीं कांग्रेस को अपने राजनीतिक वनवास के खत्म होने का इंतजार है, मतदाता तो यह तय कर चुका है कि, वह किसे अपना भाग्य विधाता बनाने जा रहा है लेकिन यह राज तो मतगणना में ही खुलेगा।

(ये खबर सिंडिकेट फीड से ऑटो-पब्लिश की गई है. हेडलाइन को छोड़कर क्विंट हिंदी ने इस खबर में कोई बदलाव नहीं किया है.)

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