बजट से इन्फ्लेशन पर नहीं पड़ेगा कोई असरः पूर्व RBI गवर्नर

दास ने कहा, “ बजट का मु्द्रास्फीति पर असर उसके राजकोषीय घाटे के आंकड़े से जुड़ा होता है

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बजट से इन्फ्लेशन पर नहीं पड़ेगा कोई असरः पूर्व RBI गवर्नर
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नयी दिल्ली, 15 फरवरी (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने शनिवार को कहा कि बजट प्रस्तावों का महंगाई पर बहुत अधिक असर नहीं होगा क्योंकि सरकार राजकोषीय घाटे को सीमित करने की एफआरबीएम कानून में तय राह पर कमोबेश बनी हुई है।

इस महीने की शुरुआत में पेश आम बजट में राजस्व संग्रह में कमी के चलते 2019-20 में राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को बढ़ाकर जीडीपी का 3.8 प्रतिशत कर दिया गया था, जो इससे पहले 3.3 प्रतिशत था।

दास ने कहा, “किसी भी बजट का मु्द्रास्फीति पर सीधा असर उसके राजकोषीय घाटे के आंकड़े से जुड़ा होता है, जब उधार में बढ़ोतरी होती है, लेकिन सरकार ने राजकोषीय अनुशासन के सिद्धान्त का पालन किया है।”

उन्होंने कहा, “एफआरबीएम कानून के ‘राहत उपनियम’ के तहत चालू वर्ष के साथ ही अगले वर्ष में भी घाटे की आंकड़े एफआरबीएम समिति की सिफारिशों के अनुसार निर्धारित मापदंडों के अनुरूप हैं।”

राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (एफआरबीएम) कानून के ‘राहत उपनियम’ के तहत सरकार आर्थिक दबाव के समय राजकोषीय घाटे के लक्ष्यों को 0.5 प्रतिशत तक बढ़ा सकती है। ऐसा अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक बदलावों के समय भी किया जा सकता है, जब विकास तेजी से कम होता है।

परंपरा के अनुसार बजट के बाद वित्त मंत्री ने शुक्रवार को आरबीआई के निदेशक मंडल को संबोधित किया।

इस संबोधन के बाद दास ने पत्रकारों से कहा, “सरकार के उधारी में अच्छी बात है कि ये छोटी बचत से आ रही है। इसलिए मुझे नहीं लगता है कि इसका मुद्रास्फीति पर बहुत अधिक असर होगा। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का निश्चित रूप से मु्दास्फीति पर सकारात्मक असर होगा।”

उन्होंने कहा, “मुद्रास्फीति में बढ़ोतरी की मुख्य वजह खाद वस्तुओं की महंगाई है, खासतौर से दूध, मछली और प्रोटीन से संबंधित विभिन्न उत्पाद।”

खुदरा कीमतों पर आधारित मुद्रास्फीति की दर जनवरी में 7.59 प्रतिशत थी, जो करीब छह साल में सबसे अधिक है। इस दौरान सब्जियों और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी का रुख देखने को मिला।

सरकार को अंतरिम लाभांश देने के बारे में सवाल पूछने पर दास ने कहा कि इस बारे में सरकार ने कुछ नहीं कहा है और यदि कोई फैसला लिया गया, तो उसे सभी को बताया जाएगा।

उन्होंने कहा, “व्यापक पारदर्शिता के लिए हम आरबीआई के केंद्रीय बोर्ड की बैठक का ब्यौरा (वेबसाइट) पर अपलोड कर रहे हैं। अगर कोई भी फैसला किया जाएगा, तो वह वेबसाइट पर अपलोड होगा।”

कर्ज वृद्धि में नरमी के बारे में उन्होंने कहा कि अब इसमें तेजी के संकेत मिल रहे हैं।

(ये खबर सिंडिकेट फीड से ऑटो-पब्लिश की गई है. हेडलाइन को छोड़कर क्विंट हिंदी ने इस खबर में कोई बदलाव नहीं किया है.)


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