पिछले साल से 53 फीसदी घटा चीनी का उत्पादन
पिछले साल से 53 फीसदी घटा चीनी का उत्पादन
पिछले साल से 53 फीसदी घटा चीनी का उत्पादन

पिछले साल से 53 फीसदी घटा चीनी का उत्पादन

(ये खबर सिंडिकेट फीड से ऑटो-पब्लिश की गई है.)

 नई दिल्ली, 3 दिसम्बर (आईएएनएस)| महाराष्ट्र में गóो की पेराई देर से शुरू होने के कारण इस सीजन में 30 नवंबर तक चीनी का उत्पादन अब तक पिछले साल के मुकाबले 53 फीसदी कम हुआ है।

  निजी चीनी मिलों का संगठन इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, चालू गन्ना पेराई सत्र 2019-20 (अक्टूबर-सितंबर) के शुरुआती दो महीने के दौरान देशभर में चीनी का उत्पादन 18.85 लाख टन हुआ है, जबकि पिछले साल इसी अवधि के दौरान चीनी का उत्पादन 40.69 लाख टन हुआ था। इस प्रकार चालू सीजन में चीनी का उत्पादन पिछले साल के मुकाबले 53.46 फीसदी कम हुआ है।

इस्मा द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, पिछले साल 30 नवंबर 2018 को देशभर में 418 चीनी मिलें चालू थीं जबकि इस साल 30 नवंबर तक महज 279 चीनी मिलों में चीनी का उत्पादन हो रहा था।

देश के सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में 30 नवंबर तक 105 चीनी मिलों में 9.14 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ जबकि पिछले साल इसी अवधि में प्रदेश की 111 चीनी मिलों में 10.81 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था।

महाराष्ट्र में इस साल 22 नवंबर को गóो की पेराई शुरू हुई और 30 नवंबर तक 43 चीनी मिलों में 67,000 टन चीनी का उत्पादन हुआ जबकि पिछले साल 30 नवंबर को प्रदेश में 175 चीनी मिलें चालू थीं और उत्पादन 18.89 लाख टन हो चुका था।

कर्नाटक में 61 चीनी मिलों में इस साल नवंबर तक 5.21 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ जबकि पिछले साल 63 चीनी मिलों ने इसी अवधि के दौरान 8.40 लाख टन चीनी का उत्पादन किया था।

इस्मा ने बताया कि चालू सीजन में अब तक 15 लाख टन चीनी निर्यात के सौदे हो चुके हैं। भारत ईरान, श्रीलंका, अफगानिस्तान और अफ्रीकी देशों को चीनी निर्यात कर रहा है।

उद्योग संगठन ने बताया कि उत्तर भारत के राज्यों में चीनी का एक्स-मिल रेट पिछले कुछ महीनों से 3,250-3,300 रुपये प्रति क्विं टल और पश्चिमी राज्यों में 3,100-3,250 रुपये प्रतिक्विंटल है।

इस्मा ने कहा कि राज्य सरकारों से मिली जानकारी के अनुसार, चीनी मिलों पर पिछले सीजन का बकाया 30 नवंबर 2019 तक 5,000 करोड़ रुपये था जबकि पिछले साल 30 नवंबर तक 2017-18 का बकाया 8,000 करोड़ रुपये था।

(ये खबर सिंडिकेट फीड से ऑटो-पब्लिश की गई है. हेडलाइन को छोड़कर क्विंट हिंदी ने इस खबर में कोई बदलाव नहीं किया है.)


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