कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी. (फोटो: Twitter/INC)
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राहुल की ताजपोशी की तरफ एक और कदम कांग्रेस

राजनीति में बहुत सी बातें औपचारिक ऐलान के बजाए इशारों में होती हैं और इस वक्त कांग्रेस पार्टी के इशारे साफ बयां कर रहे हैं कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की पोजिशन भले ही नंबर 2 की हो लेकिन पार्टी उन्हें सर्वेसर्वा मान चुकी है.

इस तस्वीर पर नजर डालिये. बाईं तरफ पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, दाईं तरफ राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलामनबी आजाद और इर्दगिर्द बैठे कांग्रेस पार्टी के तमाम दिग्गज.

जनवेदना सम्मेलन. (फोटो: Ians)
जनवेदना सम्मेलन. (फोटो: Ians)

ये तस्वीर दिल्ली में हुए कांग्रेस पार्टी के जनवेदना सम्मेलन की है. अगर पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने इस सम्मेलन में शिरकत की होती तो जाहिर तौर पर राहुल गांधी की जगह वो होतीं. खैर.. सोनिया नहीं थीं और सम्मेलन की अध्यक्षता राहुल ने की.

पार्टी सूत्रों के मुताबिक गला खराब होने की वजह से सोनिया गांधी सम्मेलन में नहीं आईं. लेकिन अहम मौकों पर सोनिया की तबियत खराब होने का ये इत्तेफाक हाल के दिनों में कई बार हुआ और हर बार बागडोर राहुल गांधी को संभालनी पड़ी.

जरा गौर फरमाईये-

  • पिछले महीने कांग्रेस संसदीय दल की बैठक राहुल गांधी की अध्यक्षता में हुई.
  • पिछले साल नवंबर में हुई कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक की अध्यक्षता राहुल ने की. बैठक में सोनिया मौजूद नहीं थीं.
  • उसी बैठक में सोनिया के कार्यकाल को एक साल का विस्तार दिया गया लेकिन कार्यसमिति के तमाम सदस्यों ने एकमत से राहुल को कमान सौंपने की गुजारिश की.
  • 28 दिसंबर को कांग्रेस स्थापना दिवस पर पार्टी में पहली बार राहुल गांधी ने नेताओं और कार्यकर्ताओं को संबोधित किया.
  • पिछले संसद सत्र में सिर्फ एक मौके को छोड़कर विपक्ष की तमाम बैठकों की अगुवाई सोनिया गांधी ने नहीं राहुल ने की.
  • किसानों के मुद्दे पर कांग्रेस पार्टी का प्रतिनिधि मंडल राहुल की ही अगुवाई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिला.

जाहिर है कि पार्टी और खुद सोनिया चाहती हैं कि अहम मौकों पर जिम्मेदारी राहुल के हाथों में दिखे. जनवेदना सम्मेलन में राहुल ने बेहद आक्रामक दो भाषण दिये. राहुल का अंदाज दिखा रहा था कि उनमें पार्टी की कमान संभालने का आत्मविश्वास आ चुका है.

सितंबर 2016 में उत्तर प्रदेश में महीने भर की किसान यात्रा से राहुल गांधी ने फ्रंट फुट पर खेलना शुरु किया था. इसके बाद लगातार वो केंद्र सरकार और पीएम नरेंद्र मोदी से सींग लड़ाते नजर आए. संसद सत्र के दौरान अपने भाषणों से उन्होंने कई बार सरकार को बैकफुट पर डाला.

हालांकि संसद सत्र के दौरान नोटबंदी के खिलाफ जंग छेड़ने का ऐलान करने के बाद राहुल नए साल की छुट्टियां मनाने देश के बाहर चले गए. इससे उनकी गंभीरता को लेकर काफी सवाल भी उठे. लेकिन वापिस आने के साथ ही विरोध की मशाल फिर से उठा कर राहुल ने इसकी भरपाई करने की कोशिश की है.

हो सकता है कि उत्तर प्रदेश चुनावों के मुश्किल इम्तिहान से ठीक पहले पार्टी उन्हें अध्यक्ष पद की बड़ी जिम्मेदारी से आजाद रखे. लेकिन कांग्रेस सूत्र इस बात को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हैं कि राहुल की ताजपोशी अब सिर्फ एक औपचारिकता है जो किसी भी दिन मुमकिन है.