‘रसोड़े में कौन था’ किसने पता लगाया? ये ट्रेंड अब किधर जा रहा है

हर चीज के पीछे एक कहानी होती है. रसोड़े के पीछे भी एक कहानी है.

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खुल्लम खुल्ला
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‘रसोड़े में कौन था’ किसने पता लगाया? ये ट्रेंड अब किधर जा रहा है

सोशल मीडिया कुछ दिनों से ढूंढ रहा है कि आखिर 'रसोड़े में कौन था?'. कोकिला मोदी कह रही हैं रसोड़े में राशि बेन थीं. लेकिन इससे क्या फर्क पड़ता है मीम इंडस्ट्री को. ट्विटर फेसबुक पर 'रसोड़े में कौन था?' ट्रेंड कर रहा है. अब समझते हैं इस रसोड़े का 'उद्भव' कहां से हुआ, संबित पात्रा की एंट्री कैसे हुई और कैसे रसोड़ा देश के लिए प्रासंगिक हो गया.

हर चीज के पीछे एक कहानी होती है. रसोड़े के पीछे भी एक कहानी है. किसी भी कहानी के पात्र उस कहानी के कर्ता धर्ता होते हैं. और अगर कहानी में टेलीविजन , सोशल मीडिया और हमारे आपके प्यारे नेता जी हों तो कहानी का सुपरहिट होना तो तय है.

खैर, लगभग एक दशक पहले एक सीरियल शुरू हुआ था, “साथ निभाना साथिया”. वही सास बहू के रोज के ड्रामों से लैस ये सीरियल पिछले 3,4 दिनों से फिर से वाहवाही लूट रहा है. कारण हैं इंस्टाग्राम के एक म्यूजिक कंपोजर यशराज मुखते. उन्होंने एक रैंडम ऐपिसोड के अति रैंडम डायलॉग को उठा के रैप बना दिया है.

दरअसल, ध्यान से समझने पर आप पाएंगे कि कोकिला मोदी के किरदार ने पता लगा लिया कि आखिर कुकर में से चने निकाल कर खाली कुकर गैस पर किसने चढ़ाया था. खाली कुकर चढ़ाने से कुकर फट सकता है. जिससे भारी नुकसान होता है. लेकिन कोकिला मोदी ने इस साजिश के पीछे जो गुनहगार था उसका पता लगा लिया.

खैर भारत में क्रिकेट और बॉलीवुड के अलावा अब तीसरी चीज भी सामने आ गयी है जो कभी फीकी नहीं पड़ेगी. वो है मीम इंडस्ट्री. चाहे वो BINOD हो या “रसोड़े में कौन था” हो. पूरे देश की रचनात्मकता सोशल मीडिया पर ही दिखायी देने लगी है.

एक वीडियो आने की देरी थी और भारत पूछने लगा कि आखिर रसोड़े में कौन था. सोशल मीडिया की असल ताकत मीम्स से ही पता चलती है. लोगों के बीच एक होड़ शुरू हो गई कि कौन पहले रसोड़े पर कोई लतीफा लेकर आएगा.

अब आते हैं अपने नेता जी. लेकिन उन्हें प्रचारक होने के नाते जनता की नब्ज भी तो पकड़नी थी. इसलिए मौका पाते ही उन्होंने टीवी एंकर के सामने अपनी भी मीम विद्वता झाड़नी शुरू कर दी. उनको तो कोकिला मोदी का पूरा डायलॉग लफ्ज-ब-लफ्ज याद था.

कहानी में आगे क्या हुआ क्या पता. कहानी होती कहां है आजकल. एनकाउंटर हो या फिल्में कहानी कहीं नहीं बची है. हां, आपके पास स्टार प्रचारक जैसे नाम हों तो एक तय ऑडियंस जरूर कहानी में रुचि ले लेती है.

देखा जाए तो बात कुछ है नहीं. हर आने जाने वाले मीम की तरह ही ये भी एक मीम था. लेकिन धीरे-धीरे मीम कैसे सोशल मीडिया से स्कूल, कॉलेजों, चाय के नुक्कड़ों से होते हुए न्यूजरूम तक पहुंच गया है, इस बात पर ध्यान देना जरूरी है. BINOD के आने पर Paytm जैसी बड़ी कंपनी ने ट्विटर पर अपना नाम BINOD रख लिया था. कारण बस एक है, प्रासंगिक बने रहना.

लोगों के बीच बने रहने के लिए जरूरी है कि आप प्रासंगिक बने रहें. और सोशल मीडिया पर मीम से अंजान रहे तो दिक्कत आना तय है. बस यही मंत्र समझ गए हैं डॉ. संबित पात्रा. और फिर डॉ.पात्रा ने बहुत बारीकी से कांग्रेस की अध्यक्षता की कलह पर चुटकी ले ली. क्या इसका मतलब ये है कि आने वाले समय में प्रासंगिकता के लिए मीम्स से अपडेट रहना जरूरी होता जा रहा है?

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