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बिहार के इस शहर में रेत बनी सेहत का ‘विलेन’

सोन नदी के किनारे से बालू ले जाने वाले गाड़ियों के कारण डालमियानगर के लोगों के लिए स्वास्थ्य संबंधी चिंता बढ़ी

बिहार के रोहतास जिले में सोन नदी के किनारे से बालू ले जाने वाले गाड़ियों की वजह से डालमियानगर के निवासियों के लिए सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी चिंता बढ़ गई है. एक शहर को दूसरे से जोड़ने वाला पुल, दोनों ओर रेत के जमाव से भरा होता है. इसके कारण, वायु प्रदूषण और ड्राइविंग करते समय समस्याएं बढ़ जाती हैं.

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अगर कोई डेहरी-ऑन-सोन के रेलवे ओवरब्रिज पर खड़ा है, तो वो आसानी से देख सकता है कि दोनों तरफ से रेत जमा हो गई है. यह ट्रैक्टरों या ट्रकों से रेत ले जाने के कारण होता है.

“कभी-कभी, ये (रेत) इतना गिर जाता है कि हम केवल हमारे चारों ओर धूल देखते हैं. मेरी सारी सब्जियां धूल की परतों से ढक जाती हैं. मुझे लगता है, हमें हर समय मास्क पहने रहना चाहिए. कई बार हाईवे जाम कर दिया जाता है. यहां भी, पुल के पास, रेत का एक बड़ा भंडार है. ”
बंटी कुमार, स्थानीय सब्ज़ी बिक्रेता

पुल दुर्घटना-संभावित क्षेत्र हो गया है क्योंकि इस सड़क से ओवरलोड ट्रक जाते हैं और बालू को अन्य स्थानों पर ले जाते हैं. धूल हमारे कपड़ों को भी ख़राब कर देती है. हवा में इतनी धूल है कि मुझे ड्राइव करने में बहुत डर लगता है.

डेहरी नगर पालिका के कार्यकारी अधिकारी सुशील कुमार ने क्विंट को बताया कि बालू का परिवहन और उससे जुड़ी चीजें खनन विभाग के अधिकार क्षेत्र में है. उन्होंने कहा, "हमने जिलाधिकारी के साथ इस मुद्दे को उठाया है. हम रेत के परिवहन के बारे में सरकार को लिखते रहते हैं, कि इसे नगरपालिका क्षेत्र में अनुमति नहीं दी जानी चाहिए,"

(सभी 'माई रिपोर्ट' ब्रांडेड स्टोरिज सिटिजन रिपोर्टर द्वारा की जाती है जिसे क्विंट प्रस्तुत करता है. हालांकि, क्विंट प्रकाशन से पहले सभी पक्षों के दावों / आरोपों की जांच करता है. रिपोर्ट और ऊपर व्यक्त विचार सिटिजन रिपोर्टर के निजी विचार हैं. इसमें क्‍व‍िंट की सहमति होना जरूरी नहीं है.)

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