एक परिवार की कोरोना से जंग और नेक पड़ोसी की कहानी

परिवार के 6 सदस्यों में 4 COVID-19 से संक्रमित, जानिए कैसे जीती कोरोना से जंग | Quint Hindi

Published17 Apr 2020, 05:21 PM IST
My रिपोर्ट
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वीडियो एडिटर: राहुल सांपुई

वीडियो प्रोड्यूसर: आस्था गुलाटी

इलस्ट्रेशन: अर्निका काला

मार्च में जब सभी न्यूज चैनल दुनियाभर में बढ़ रहे कोरोना वायरस के केस बढ़ने की बात कर रहे थे, हमने नहीं सोचा था कि हमारा परिवार इससे किसी तरह संक्रमित हो सकता है. फिर हमने महाराष्ट्र की खबर देखr जिसमे संक्रमित लोग बढ़ते ही जा रहे थे, हम बिलकुल [र गए क्योंकि हम मुंबई में ही रहते हैं.

फिर एक दिन मेरे ससुर जो एक डायबिटिक हैं, उनमे कोरोना वायरस के लक्षण दिखना शुरू हुए. मेरा बेटा अभी सिर्फ 6 महीने का ही है उसे बुखार आने लगा. हम घबरा गए कि कहीं हमारे परिवार में भी तो संक्रमण का खतरा नहीं है... क्योंकि जब से लॉकडाउन शुरू हुआ है, हममें से कोई बहार नहीं गया है और न ही हमारे परिवार में किसी कि ट्रैवल हिस्ट्री रही है. जब हमने मेरे ससुर का टेस्ट कराया था तब केस इतने ज्यादा नहीं थे, कल्याण में तो नहीं थे

हम सभी घबरा गए जब मेरे ससुर कोरोना वायरस टेस्ट में पॉजिटिव पाए गए. मैंने तब ध्यान दिया कि मेरा बेटा बीमार है और परिवार भी काफी मुश्किलों का सामना कर रहा है. उसी शाम हम सभी ने कस्तूरबा हॉस्पिटल में टेस्ट कराया

मेरे पति भी टेस्ट में पॉजिटिव आए और मेरी सास भी, मेरा बेटा भी मेरा बड़ा बेटा 6 साल का है सभी टेस्ट में पॉजिटिव पाए गए.

मुझे बहुत डर लगने लगा मुझे नहीं पता कि मेरा छोटा बेटा इस संक्रमण से बच पाएगा या नहीं. मैं बहुत रोई लेकिन मुझे पता था कि मुझे हिम्मत रखनी होगी. मेरे बेटे का ट्रीटमेंट शुरू हुआ और 1-2 दिन में ही वो रिकवर होने लगा, मेरी सास में मामूली लक्षण थे उन्हें सिर्फ 2-3 दिन ही बुखार रहा, मेरा बेटा और मेरे पति जल्द ही ठीक हो गए लेकिन एहतियात के तौर पर उन्हें 14 दिन तक सेल्फ-क्वॉरंटीन रहने कि सलाह दी गई.

मेंने अपने बड़े बेटे की बहुत अच्छे से देखभाल की थी, लेकिन फिर भी मैं बहुत चिंता में थी कि उसे इतने दिनों तक हमसे अलग रहना है. मैंने अपने पड़ोसी को बुलाया. उन्होंने मेरे बड़े बेटे का अच्छे से खयाल रखा और मेरे पति के दोस्त ने उसे कल्याण तक हमारे घर पर छोड़ दिया.

मेरी दोस्त कोरोना वायरस के बारे में अच्छी जानकारी रखती है लेकिन उसे सोसाइटी वाले परेशान करने लगे, उन्होंने उसे कहा कि वो मेरे बेटे का खयाल न रखे उन्हें लगा कि वो भी कोरोना पोजिटिव है, उसने किसी तरह कि अफवाह पर ध्यान नहीं दिया और उसका टेस्ट नेगेटिव आया है तो डरने की कोई बात नहीं थी, लेकिन नगर पालिका ने पूरी सोसाइटी को सील कर दिया था.

मेरे हिसाब से इसमें डरने की कोई बात नहीं है, बस सरकार जो कह रही है उनके नियमों का पालन करते जाइए, अगर सरकार कह रही है कि सभी को घर पर ही रहना चाहिए तो उनकी बात मानिए. घर में रहिये सुरक्षित रखिये और अपनों का खयाल रखिए और डरने की बिलकुल भी जरूरत नहीं है.

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