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केजरीवाल हमें 'गोली' दे रहे हैं- दिल्ली के गेस्ट शिक्षक

Kejriwal ने वादा किया था कि सत्ता में आने पर सभी अतिथि शिक्षकों को नियमित कर दिया जाएगा

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देश का भविष्य कहे जाने वाले बच्चों को शिक्षा का पाठ पढ़ाने वाले शिक्षक आज अपने हक के लिए स्कूलों से निकल सड़क पर आ गए हैं ताकि उनका भविष्य सुरक्षित बन सके. दरअसल सात साल पहले जब केजरीवाल सरकार ने अपना पहला चुनाव लड़ा था तब उसने सरकारी स्कूल के उन शिक्षकों से वादा किया था कि सत्ता में उनकी सरकार आने पर सभी अतिथि शिक्षकों को नियमित कर दिया जाएगा लेकिन केजरीवाल के वादे चुनावी साबित हुए.

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शिक्षकों ने अपने हक के लिए पहले भी आवाज उठाई थी और इसी आवाज को दोबारा से बुलंद करने के लिए एक बार फिर सात साल पहले किए वादे को याद दिलाने के लिए उन्होंने फिर आवाज उठाई.

"बुधवार, 16 फरवरी 2022 को हमने एक बार फिर से दिल्ली की मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से उनके आवास पर मिलने की कोशिश की ताकि हम उन्हें उनके सात साल पहले किए वादे को याद दिल सके जो वो भूल गए हैं, लेकिन हमें उनसे यह कहकर नहीं मिलने दिया गया कि वो अभी चुनावी प्रचार में व्यस्त हैं."
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आज जिन राज्यों में चुनाव हो रहे हैं वहां केजरीवाल फिर अपने उन झूठे वादों को दोहरा रहे हैं जो उन्होंने सात साल पहले वहां किए थे, जहां कि सत्ता में वो कर्ता-धर्ता हैं. दिल्ली में आज उनके अपने ही राज्य में शिक्षक अपने हक के लिए सड़कों पर आ गए हैं.
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शिक्षकों ने 16 फरवरी बुधवार को दोपहर 12 बजे से शाम 6 बजे तक उनके आवास पर धरना दिया. उन्होंने बताया कि हम जिन मुद्दों पर आवाज उठा रहे हैं उन मुद्दों पर बात करने हमसे कोई भी सरकारी अधिकारी नहीं आया. यह दिल्ली सरकार की अपने कर्मचारियों के प्रति गंभीरता को दर्शाता है की वो कर्मचारियों को लेकर कितने सजग हैं.

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शिक्षकों ने कहा कि हममें से अधिकतर शिक्षक ऐसे हैं जो लगभग एक दशक तक सेवा देने के बाद अधिक उम्र होने के कारण कहीं और जॉब के लिए आवेदन नहीं कर सकते. इसलिए अब हमारे पास कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है. इसलिए सरकार से हम हमारा हक देने के लिए हमें पक्का करने के लिए अनुरोध करते हैं.

उन्होंने बताया कि

सरकार उनके साथ दिहाड़ी मजदूरों जैसा व्यवहार करती है, सरकार न तो हमें यात्रा भत्ते, महंगाई भत्ते और मकान किराया भत्ता देती है. हमें दिहाड़ी मजदूर की तरह इन सब सुविधाओं के बिना काम करना पड़ता है.

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