प्राकृतिक आपदाओं से बचाव का जरिया हैं वेटलैंड्स

हमें अपनी आर्द्रभूमियों को बचाना होगा, क्योंकि ये जैव-विविधता बनाए रखने में बहुत मददगार होती हैं

Published02 Feb 2019, 03:45 PM IST
My रिपोर्ट
3 min read

आज दुनिया में जिस तेजी से विकास हो रहा है, उसी तेजी से पर्यावरण का भी हनन हो रहा है. हम विकास की अंधी दौड़ में इस कदर दौड़े जा रहे हैं कि अपने हित-अनहित को भी नहीं समझ पाते. विकास ने हमें सुविधाएं तो प्रदान की हैं, लेकिन उनका नुकसान भी समाज और प्रकृति में देखने को मिल रहा है. आधुनिक विकास ने सबसे ज्यादा नुकसान हमारे वातावरण और आर्द्रभूमियों को पहुंचाया है.

कारखानों से निकलने वाले गंदे अवशिष्ट, खनन और भूमिगत जल के अत्यधिक दोहन कुछ ऐसे मानवीय कारण हैं, जिन्होंने आर्द्रभूमियों को अत्यधिक नुकसान पहुंचा है. इसके साथ-साथ ही समुद्र के जल स्तर में वृद्धि, जलवायु परिवर्तन, तूफान आदि प्रकृतिक कारणों के कारण भी आर्द्रभूमियां अपना वास्तविक रुप खोती जा रही हैं.

हमें अपनी आर्द्रभूमियों को बचाना होगा, क्योंकि ये जैव-विविधता बनाए रखने में बहुत मददगार होती हैं और कई प्रकार की प्राकृतिक आपदाओं से बचाती हैं. आर्द्रभूमि के महत्व के प्रति लोगों को जागरुक करने और उनके संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए प्रति वर्ष 2 फरवरी को पूरी दुनिया में विश्व आर्द्रभूमि (वेटलैंड्स) दिवस मनाया जाता है.

वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर पर भी विभिन्न कानूनों और नीतियों के माध्यम से आर्द्रभूमि के संरक्षण के लिए कदम उठाए जाते हैं, लेकिन सरकार कितनी भी कोशिश कर ले जन-जागरूकता के बिना ये संभव नहीं है.

क्या है आर्द्रभूमि ?

आर्द्रभूमि उस जमीन को कहते हैं, जो दलदली हो या वनस्पति पदार्थों से ढकी हुई हो और जिसमें स्थिर या बहता हुआ पानी रहता हो. उस पानी की गहराई छह मीटर से ज्यादा नहीं होती. आर्द्रभूमि कहलाती है.

आर्द्रभूमि की विशेषताएं

  • आर्द्रभूमि में उच्च जैव विविधता पाई जाती है तथा इसमें पारिस्थिति की उत्पादकता भी अधिक होती है.
  • इस तरह की भूमि तटीय चक्रवात, सुनामी, बाढ़ और सूखे को कम करती हैं.
  • इससे भूमिगत जल के स्तर को बनाए रखने में मदद मिलती है और ये प्रवासी पक्षियों के आकर्षण का स्थान भी होती हैं
प्राकृतिक आपदाओं से बचाव का जरिया हैं वेटलैंड्स
(फोटो: ट्विटर)

1971 में पहली बार ईरान के शहर रामसर में आर्द्रभूमि के संरक्षण के लिए एक वैश्विक सम्मेलन का आयोजन किया गया था. जिसमें दुनिया भर के कई क्षेत्रों का चयन किया गया और ये समझौता 1975 से लागू हुआ. भारत में ग्यारह लाख बारह हजार एक सौ इक्तीस (11,12,131) हेक्टेयर क्षेत्र ऐसा है, जिसे अंतर्राष्ट्रीय महत्व के वेटलैंट्स की रामसर सूची में शामिल किया गया है. इस क्षेत्र के अंतर्गत रुद्रसागर झील, चिल्का झील, दीपोर बील और भोपाल के भोज वेटलैंड्स सहित 27 स्थान शामिल हैं.

दुनिया में आर्द्रभूमियां

  • दुनिया में 1758 से ज्यादा अंतर्राष्ट्रीय महत्व के वेटलैंड्स स्थल हैं.
  • ऑस्ट्रेलिया का कोबॉर्ग प्रायद्वीप दुनिया का पहला नामित वेटलैंड्स है, जिसे 1974 में चुना गया था
  • कांगो का गिरी-तुंब-मेनडोंबे (Ngiri-Tumba-Maindombe) और कनाडा का क्वीन मौद ग्लफ (Queen Maud Gulf) दुनिया के सबसे बड़े वेटलैंड्स हैं, जो 60 हजार वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में फैले हैं.
  • दुनिया में सबसे ज्यादा 170 वेटलैंड्स यूनाइटेड किंगडम में और इसके बाद 142 मैक्सिको में हैं.
  • बोलीविया में एक लाख 48 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र वेटलैंड्स है, जो दुनिया में सबसे ज्यादा है.

(सभी माई रिपोर्ट सिटिजन जर्नलिस्टों द्वारा भेजी गई रिपोर्ट है. द क्विंट प्रकाशन से पहले सभी पक्षों के दावों / आरोपों की जांच करता है, लेकिन रिपोर्ट और इस लेख में व्यक्त किए गए विचार संबंधित सिटिजन जर्नलिस्ट के हैं, क्विंट न तो इसका समर्थन करता है, न ही इसके लिए जिम्मेदार है.)

कोरोनावायरस से जारी जंग के बीच तमाम अपडेट्स और जानकारी के क्लिक कीजिए यहां

(हैलो दोस्तों! हमारे Telegram और WhatsApp चैनल से जुड़े रहिए यहां)

क्विंट हिंदी के साथ रहें अपडेट

सब्स्क्राइब कीजिए हमारा डेली न्यूजलेटर को और पाइए खबरें आपके इनबॉक्स में

120,000 से अधिक ग्राहक जुड़ें!