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Devesh Chaturvedi: UPSC में लहराया परचम, जानिए- सफलता की कहानी

Devesh Chaturvedi पिछले साल भी UPSC की परीक्षा में सफल हुए थे. तब उन्हें इटावा में बतौर SDM पहली पोस्टिंग मिली थी.

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Devesh Chaturvedi: UPSC में लहराया परचम, जानिए- सफलता की कहानी
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वाराणसी (Varanasi) जिले के चोलापुर के तेवर गांव के देवेश चतुर्वेदी (Devesh Chaturvedi) ने यूपीएसी (UPSC) में 148वीं रैंक हासिल की है. देवेश ने धनबाद IIT से B.Tech किया है. वह पिछले साल भी यूपीएससी की परीक्षा में सफल हुए थे. तब उन्हें इटावा में बतौर एसडीएम पहली पोस्टिंग मिली थी. उनके पिता अनिल चतुर्वेदी भी एसडीएम हैं.

उनकी तैनाती आजमगढ़ में है. पिता की नौकरी की वजह से देवेश को बचपन में 11-12 स्कूल बदलने पड़े. इससे उनकी पढ़ाई पर काफी असर पड़ा. देवेश उस वक्त को अपना बड़ा स्ट्रगल मानते हैं.

क्विंट ने UPSC में सफलता को लेकर जो सवाल किए उनका देवेश ने बेबाकी से जवाब दिया है.

देवेश अपनी पारिवारिक पृष्ठभूमि के बारे में बताएं?

मैं वाराणसी में पैदा हुआ और वर्तमान में लखनऊ में रह रहा हूं. मेरे पिता अनिल चतुर्वेदी वर्तमान में आजमगढ़ में एसडीएम हैं. मेरी माता सीमा चतुर्वेदी होममेकर हैं. मेरी छोटी बहन अनन्या चतुर्वेदी ग्रेजुएशन फाइनल ईयर में है. मैं वर्तमान में डिप्टी कलेक्टर के पद पर तैनात हूं.

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स्कूली पढाई कहां और कैसे हुई?

मेरी पढाई में थोड़ी कठिनाइयां बचपन से रही हैं. पिताजी के ट्रांसफर के कारण मुझे लगभग 11-12 स्कूल बदलने पड़े. मैंने बारहवीं की शिक्षा दिल्ली पब्लिक स्कूल, लखनऊ से की है. उसके बाद मैंने B.Tech आईआईटी (आईएसएम) धनबाद से 2019 में मैकेनिकल इंजीनियरिंग से किया. मैं कॉलेज के प्लेसमेंट में नहीं बैठा और सिविल सर्विसेज की तैयारी शुरू कर दी.

जीवन के किस मोड़ पर लगा की आईएएस की ओर जाना है?

मेरी रुचि सिविल सर्विसेज के लिए बचपन से रही. दादाजी और पिताजी ने ऐसी परवरिश की और परिवार में ऐसा वातावरण रहा जिसके कारण वह रुचि बरकरार रही. लेकिन आईएएस के लिए दिमाग 2017 में बनाया और पढ़ाई 2018 से शुरू कर दी.

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ऐसा कोई वाकया हुआ हो जब लगा कि अब आईएएस ही बनना है?

ऐसा कोई वाकया तो ध्यान में नहीं है. लेकिन आईएएस आईपीएस का समाज में रिस्पेक्ट बहुत है और कार्यशैली भी बहुत डायनामिक है. मैंने अपने पिताजी को काम करते हुए बचपन से देखा है. कॉलेज में कुछ सीनियर्स के सलेक्शन के बाद लगा की इस एग्जाम को निकला जा सकता है.

घर में कौन-कौन हैं और इस मंजिल तक पहुंचने में सबसे अधिक सपोर्ट किसका रहा ?

अगर किसी एक इंसान को चुनना हो तो वो मेरी माताजी होंगी. मेरी माता जी ने बहुत कुछ त्याग किया ताकि मैं और मेरी बहन पढ़ सकें. पिताजी, बहन और मेरे दोस्तों ने बराबर मेरी मदद की, ताकि मुझे इमोशनल परेशानी न हो. मैंने लगभग अपनी पूरी पढ़ाई घर पर ही की है.

B.Tech करने के बाद आईएएस की तरफ रुझान कैसे?

कॉलेज में सारे करियर ऑप्शन सोचने के बाद मुझे समझ में आया कि मैं प्राइवेट सेक्टर में टिक नहीं पाऊंगा. फिर मैंने 2017 से परीक्षा के लिए थोड़ी रुचि दिखाई. सीनियर से बात करके एक साल में एग्जाम के बारे में समझा. 2018 से मैंने इस परीक्षा के अलावा कुछ और न करने का सोच लिया था.

यहां तक पहुंचने से पहले का कोई ऐसा स्ट्रगल जो आप साझा करना चाहते हों?

सर, मेरी ऐसी कुछ खास स्ट्रगल नहीं रही है. मैं खुशनसीब हूं कि अच्छे परिवार में जन्म लिया. फिर भी मैं कहना चाहूंगा कि इस परीक्षा साइकल ने मुझे काफी कुछ सिखाया है. इस परीक्षा के लिए काफी ज्यादा धैर्य चाहिए तभी आप इसमें सफल हो पाएंगे.

अब यहां रुकना है या और अटेम्प्ट लेंगे?

अभी मेरी रैंक पे मुझे आईपीएस मिलेगा. अभी कोशिश करेंगे आईएएस के लिए.

आईएएस को लेकर क्या सोचते हैं, तैयारी करने वालों के लिए कोई ठोस सलाह देनी हो तो वह क्या होगी?

मेरी यही सलाह रहेगी की जब भी तैयारी में आयें, हमेशा यह जरूर सोच लें कि आप क्यों आ रहें हैं. ये ‘क्यों’ आपको कठिन परिस्थितियों मे बहुत मदद करेगा. अपने मानसिक स्वास्थ्य का अवश्य ध्यान रखें, क्योंकि ये तैयारी एक लेवल के बाद मेंटल स्टेबिलिटी का खेल है. जो भी असफलता हो उसको खुली बाहों से स्वीकार करें और उसपे निरंतर कार्य करें. अगर आप एग्जाम में किसी कारण सफल नहीं हो पाते, तो दिल छोटा करने की जरूरत नहीं है, आप जीवन में अवश्य सफल होंगे. यह मेरा दावा है.

हर इंसान का पद पाने के बाद कुछ करने का सपना होता है, समाज के लिए आप क्या करना चाहेंगे?

मैं महिला सशक्तिकरण की तरफ काम करना चाहूंगा. महिलाओं का स्वास्थ्य, शिखा, सेफ्टी जैसे विषयों पर मेरी विशेष रुचि है.

इनपुट- चंदन पांडेय

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