बॉलीवुड भी कर चुका है आरुषि मर्डर मिस्‍ट्री को ‘सुलझाने’ की कोशिश
आरुषि-हेमराज मर्डर केस पर बन चुकी हैं दो फिल्में
आरुषि-हेमराज मर्डर केस पर बन चुकी हैं दो फिल्में(फोटोः Twitter)

बॉलीवुड भी कर चुका है आरुषि मर्डर मिस्‍ट्री को ‘सुलझाने’ की कोशिश

साल 2008 में हुए नोएडा आरुषि मर्डर केस एक बार फिर सुर्खियों में है. शुक्रवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस केस में जेल में बंद आरुषि के माता-पिता नूपुर तलवार और राजेश तलवार को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया. इसके साथ ही अब सबसे बड़ा सवाल ये बना हुआ है कि आखिर आरुषि-हेमराज की हत्या किसने की? 9 साल और तीन जांचों के बाद भी आखिर इस दोहरे हत्याकांड के दोषी सामने क्यों नहीं आ पाए?

दोनों ही सवालों को सुलझाने की कोशिश में पहले मीडिया ने इस घटना की परतों को खोलने की कोशिश की और बाद में बॉलीवुड ने. बॉलीवुड ने इस डबल मर्डर केस पर दो फिल्में बनाईं और इस केस की गुत्थियों को सुझलाने की कोशिश की.

आरुषि-हेमराज डबल मर्डर केस पर साल 2015 में बॉलीवुड में दो बड़ी फिल्में बनीं. इन फिल्मों के डायरेक्टर्स ने पहले इस घटना को बारीकी से समझा और फिर घटना के तथ्यों को अपनी-अपनी तरह से दिखाया.

केके मेनन ने की आरुषि हत्याकांड के ‘रहस्य’ को सुलझाने की कोशिश

नोएडा के सबसे चर्चित आरुषि-हेमराज डबल मर्डर केस पर सबसे पहले मनीष गुप्ता के निर्देशन में 'रहस्य' फिल्म बनी. इस फिल्‍म में आयशा महाजन नाम के किरदार की कहानी दिखाई गई. फिल्म में दिखाया गया कि आयशा एक दिन अपने बेडरूम में मृत हालत में मिलती है. इस मर्डर केस की जांच पहले स्थानीय पुलिस करती है और फिर सीबीआई.

सीबीआई अफसर की भूमिका में केके मेनन इस मर्डर केस की तहकीकात करते हैं और एक के बाद एक कई रहस्यों से पर्दा उठाते जाते हैं. इस फिल्म में आयशा (आरुषि) की भूमिका में साक्षी सेम थीं और उनके माता-पिता के किरदार में टिस्का चोपड़ा और आशीष विद्यार्थी नजर आए थे.

‘तलवार’ में इरफान ने दिखाई थी जांच की खामियां

आरुषि-हेमराज मर्डर केस पर दूसरी फिल्‍म मशहूर लेखक गुलजार की बेटी और फिल्म डायरेक्टर मेघना गुलजार ने 'तलवार' बनाई. इस फिल्म की स्क्रिप्ट विशाल भारद्वाज ने लिखी थी. फिल्‍म में सीबीआई अफसर इरफान खान केस की गुत्थियां सुलझाते नजर आए. फिल्‍म में पुलिस की जांच में लापरवाहियों को खुलकर दिखाया गया.

इस फिल्‍म में श्रुति टंडन (आरुषि) नाम की एक 14 साल की लड़की का मर्डर हो जाता है. उसके पिता की भूमिका में नीरज कबी और मां की भूमिका में कोंकणा सेन शर्मा आरोपी ठहराए जाते हैं. जबकि सीबीआई अफसर इरफान अपनी जांच में उन्हें निर्दोष पाते हैं. फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे सीबीआई की पहली टीम की जांच को बीच में ही रोककर, केस की जांच दूसरी टीम को सौंप दी जाती है और कैसे आपसी खुन्नस में जांच की दिशा को मोड़ा जाता है.