6 दिसंबरः ऐसा क्या हुआ कि राम मंदिर पर ढीले पड़ गए VHP-RSS के तेवर
अयोध्या में तैनात सुरक्षाबल
अयोध्या में तैनात सुरक्षाबल(फोटोः PTI)

6 दिसंबरः ऐसा क्या हुआ कि राम मंदिर पर ढीले पड़ गए VHP-RSS के तेवर

आखिरकार 6 दिसंबर का दिन अयोध्या के साथ-साथ पूरे देश में शांति के साथ गुजर गया. दरअसल, नवंबर महीने के अंत में अयोध्या में हुई वीएचपी की धर्मसभा, आरएसएस प्रमुख के बयान से राम मंदिर निर्माण के मुद्दे को गरमाने की कोशिशों के बाद ऐसी आशंका जताई जा रही थी कि हिंदूवादी संगठन विवादित ढांचा विध्वंस की 26वीं बरसी का इस्‍तेमाल अपने आंदोलन के लिए कर सकते हैं. लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ.

विश्व हिंदू परिषद ने इस साल 'विवादित ढांचा' विध्वंस की बरसी पर अयोध्या में कोई बड़ा कार्यक्रम नहीं किया. अयोध्या में 'शक्ति प्रदर्शन' की जगह सिर्फ 'सांकेतिक कारसेवा' का आयोजन किया गया. तो क्या अब ये माना जाए कि राम मंदिर मुद्दे पर वीएचपी और बजरंग दल के साथ-साथ संघ के तेवर अब ढीले पड़ चुके हैं?

क्या फेल हो गई मुद्दा गरमाने की कोशिश?

अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से ठीक पहले राम मंदिर मुद्दे को गरमाने की कोशिश की गई. बीजेपी के सहयोगी संगठन आरएसएस ने सबसे पहले इस मुद्दे को तूल दिया. संघ प्रमुख मोहन भागवत ने विजयदशमी से पहले अपने संबोधन में एक बार फिर राम मंदिर बनाने का आह्वान किया.

भागवत ने कहा कि मंदिर पर चल रही राजनीति को खत्म कर इसे तुरंत बनाना चाहिए. उन्‍होंने कहा:

‘भगवान राम किसी एक संप्रदाय के नहीं हैं. वह भारत के प्रतीक हैं. सरकार चाहे किसी भी तरह करे, कानून लाए, अध्यादेश लाए. राम जन्मभूमि पर जल्द से जल्द राम मंदिर बनना चाहिए.’

इसके बाद 25 नवंबर को बीजेपी के एक और सहयोगी संगठन विश्व हिंदू परिषद ने अयोध्या में धर्म सभा बुलाई. इस बार भी इस मुद्दे को गरमाने की पुरजोर कोशिश की गई. 'अभी नहीं तो कभी नहीं' वाले अंदाज में आयोजन को प्रचारित किया गया. दावा किया गया कि ये आंदोलन 1992 के आंदोलन से भी बड़ा होगा.

लेकिन आयोजन के बाद:

धर्म सभा में शिरकत करने वाले साधु-संतों और धर्माचार्यों ने कहा कि उन्होंने यहां की मिट्टी पर संकल्प लिया है कि वह राम मंदिर निर्माण के संदेश को पूरे देश में फैलाएंगे. हालांकि धर्म सभा में कोई प्रस्ताव पारित नहीं हुआ.

विश्व हिंदू परिषद शुरुआत में कोशिश कर रही थी कि अयोध्या में भीड़ जुटाकर सरकार पर दबाव बनाए, लेकिन असफल आयोजन ने उसके इस विचार पर विराम लगा दिया है.

हालांकि VHP नेताओं का कहना है कि वह सरकार पर अध्यादेश लाने का दवाब इसलिए नहीं बना रहे हैं, क्योंकि राम मंदिर जन्मभूमि का मामला पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है. ऐसे में अगर सरकार अध्यादेश ले भी आई, तो भी ये मामला फिर से कोर्ट में फंस सकता है.

VHP-RSS के तेवर ढीले पढ़ने की वजह

विश्व हिंदू परिषद की ओर से 25 नवंबर को अयोध्या में धर्म संसद बुलाई गई. इसमें संघ, शिवसेना और बजरंग दल भी शामिल हुए. इस धर्म सभा के दिन ही संघ ने अपने प्रभाव वाले जिलों में राम मंदिर निर्माण के लिए सभाएं करने का फैसला किया. लेकिन इन सभाओं में लोगों ने दिलचस्पी नहीं दिखाई.

दिल्ली में 9 दिसंबर को अपने शक्ति प्रदर्शन की तैयारियों में जुटे विश्व हिंदू परिषद ने बीते दो दिसंबर को राजधानी में एक रोड शो किया. VHP को उम्मीद थी कि इस रोड शो में बड़ी संख्या में लोग जुटेंगे. लेकिन VHP की उम्मीद भी टूट गई.

अब विश्व हिंदू परिषद ने दिल्ली के रामलीला मैदान में 9 दिसंबर को एक और धर्मसभा बुलाई है. इस धर्मसभा में भी राम मंदिर निर्माण के मुद्दे को गरमाने की कोशिश की जाएगी.अब सवाल ये है कि क्या VHP की ये धर्म संसद कामयाब होगी या फिर पिछले आयोजनों की तरह यहां भी उसे मायूसी ही हाथ लगेगी.

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