फडणवीस का इस्तीफा, सिर्फ 3 दिन में सत्ता के शिखर से सरेंडर तक

फडणवीस का इस्तीफा, सिर्फ 3 दिन में सत्ता के शिखर से सरेंडर तक

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महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने फ्लोर टेस्ट से पहले ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने आज अहम फैसला सुनाते हुए फडणवीस को 27 नवंबर की शाम 5 बजे से पहले फ्लोर टेस्ट का आदेश दिया था, लेकिन उन्होंने 24 घंटे पहले ही साफ कर दिया कि उनकी पार्टी के पास बहुमत नहीं है और वो इस्तीफा देने जा रहे हैं.

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फडणवीस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई और अपने इस्तीफे का ऐलान कर दिया. फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र की जनता ने हमें बहुमत दिया था लेकिन शिवसेना ने चुनाव नतीजों के बाद से ही तोलमोल शुरू कर दिया. फडणवीस ने एक बार फिर कहा कि पार्टी ने कभी भी मुख्यमंत्री पद के लिए 50-50 फॉर्मूले की बात नहीं की और शिवसेना का काफी इंतजार किया लेकिन शिवसेना ने खुद ही अपना मजाक बना लिया.

23 नवंबर की सुबह देश भर के लोग हैरान रह गए जब देवेंद्र फडणवीस ने दोबारा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, उनके साथ ही अजित पवार ने डिप्टी सीएम पद का शपथ लिया था. रातों रात हुए उलटफेर के बाद फडणवीस ने दावा किया था कि उनके पास बहुमत है.

बीजेपी को मिली हैं 105 सीटें

महाराष्ट्र में बीजेपी को 105, शिवसेना को 56, एनसीपी को 54 और कांग्रेस को 44 सीट मिली थीं. सरकार बनाने का जादुई आंकड़ा 145. लेकिन बीजेपी की साथी शिवसेना ने चुनाव के बाद साथ छोड़ दिया. शिवसेना ने साफ कह दिया 50:50 मैच होगा, नहीं तो अब बस! मतलब ढाई साल बीजेपी का सीएम और ढाई साल शिवसेना का, लेकिन जब बीजेपी तैयार नहीं हई तो शिवसेना ने 30 साल पुरानी दोस्ती एक झटके में तोड़ दी.

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शिवसेना ने बीजेपी का साथ छोड़ तो बीजेपी ने एनसीपी में हीं सेंध लगा दी. और एनसीपी चीफ शरद पवार के भतीजे अजित पवार को ही अपने पाले में ले आई. अजित पवार को डिप्टी सीएम पद का शपथ भी दिला दिया, लेकिन अजित पवार वापस अपने चाचा के खेमे में चले गए और बीजेपी के हाथ खाली रह गए.

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