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दिल्ली-मुंबई, दिल्ली-कोलकाता रूट के लिए रेलवे का बड़ा ‘संकल्प’

दिल्ली-मुंबई, दिल्ली-कोलकाता रेल मार्ग अगले पांच साल में वेटिंग लिस्ट टिकट मुक्त हो जाएंगे

Published
भारत
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दिल्ली-मुंबई, दिल्ली-कोलकाता रूट के लिए रेलवे का बड़ा ‘संकल्प’
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रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष विनोद कुमार यादव ने सोमवार, 30 दिसंबर को कहा कि, दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-कोलकाता रेलवे रूट पर चलने वाली ट्रेनों को वेटिंग लिस्ट टिकटों से मुक्त किया जाएगा. उन्होंने कहा ये अगले पांच सालों में किया जायेगा.

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रेलवे अगले 10 सालोंमें लगभग 2.6 लाख करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले तीन अतिरिक्त माल ढुलाई गलियारों पर काम कर रहा है जिससे रेलवे को पर्याप्त रेलगाड़ियां चलाने के लिए मौजूदा मार्गों को मुक्त करने में मदद मिलेगी और किसी भी यात्री को वेटिंग लिस्ट टिकट नहीं मिलेगी.
विनोद कुमार यादव, रेलवे बोर्ड अध्यक्ष

2021 तक डीएफसी पूरी होने की उम्मीद

विनोद कुमार यादव ने कहा, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) का काम चल रहा है और उम्मीद है कि ये 2021 तक पूरी हो जाएगी. ऐसे में हम उम्मीद कर सकते हैं दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा के दो व्यस्त मार्गों पर अगले पांच सालों के भीतर यात्री वेटिंग लिस्ट से मुक्त हो जाएंगे.

‘‘160 किमी प्रति घंटे के मार्ग पर (ट्रेन की गति) को अपग्रेड करने का काम पहले ही स्वीकृत हो चुका है और अगले चार वर्षों में इसे पूरा किया जाएगा’’
विनोद कुमार यादव, रेलवे बोर्ड अध्यक्ष
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रेलवे का ज्यादा जोर DFC पर होगा

रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष ने कहा, रेलवे का ज्यादा जोर डीएफसी के लिए होगा, पूर्वी डीएफसी का भादन-खुर्जा खंड (194 किमी) पूरा हो चुका है और अक्टूबर 2019 से कॉमर्सियल टेस्ट शुरू हो गया है. पश्चिमी डीएफसी का रेवाड़ी-मदार खंड (305 किमी) भी पूरा हो गया है और इसका कॉमर्सियल टेस्ट 27 दिसंबर 2019 से शुरू हो गया है.

यात्री ट्रेनों की औसत गति में 60 प्रतिशत की वृद्धि को मंजूरी दी गई है. 2019-20 में 194 रेलगाड़ियों को उत्कृष्ट स्टैंडर्ड में ‘अपग्रेड’ किया गया है, और अप्रैल-अक्टूबर 2019 के बीच 78 नई ट्रेन सेवाएं शुरू की गई हैं.

यादव ने बताया, इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) की 120 जोड़ी गाड़ियों को 156 LHB रेक के उपयोग से तेजी से और सुरक्षित लिंके हॉफमैन बस (LHB) में परिवर्तित किया गया है, और 104 यात्री गाड़ियों को मेनलाइन इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट (MEMU) में परिवर्तित किया गया है. अप्रैल-नवंबर 2019 से 11,703 कोचों में 38,331 बायो-टॉयलेट लगाए गए हैं, जिनमें 65,627 कोचों में 2,34,248 बायो टॉयलेट्स की कुल संख्या 2,34,248 है.

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