शाहीन बाग, दिल्ली ने बीजेपी को दिया 62 वोल्ट का ‘करंट’

दिल्ली चुनाव के नतीजों में AAP ने भारी बहुमत 60 से ज्यादा सीटें हासिल की हैं, वहीं बीजेपी को महज 8 सीटें मिल सकी हैं

Published
भारत
3 min read

वीडियो एडिटर: पुर्णेंदू प्रीतम

EVM का बटन इतने गुस्से में दबाना कि करंट शाहीन बाग को लगे.

करंट तो लगा है लेकिन डायरेक्शन चेंज है, इस बार 60 से ज्यादा वोल्ट का करंट बीजेपी को लगा है. दिल्ली चुनाव के नतीजों में आम आदमी पार्टी ने भारी बहुमत 60 से ज्यादा सीटें हासिल की हैं, वहीं बीजेपी को महज 8 सीटें मिल सकी हैं.

मनोज तिवारी का गजब का कॉन्फिडेंस

लेकिन भाई कॉन्फिडेंस बड़ी चीज है और जो कॉन्फिडेंस दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष मनोज तिवारी ने दिखाया है, उसका तो कोई जवाब ही नहीं है. नतीजों के दिन मनोज तिवारी एक-दो बार मीडिया के सामने आए,मानने को तैयार ही नहीं थे कि पार्टी हारने जा रही है. लेकिन इसे कॉन्फिडेंस नहीं, भोजपुरी में थेथरोलॉजी कहते हैं. दरअसल, मनोज तिवारी का अपना ही एक ट्वीट गले की हड्डी बन गया था. वो जो उन्होंने एग्जिट पोल वाले दिन किया था. न निगलते बन रहा था, न उगलते.

तिवारी ने उस दिन ट्वीट था कि ये सभी ‘एग्जिट फेल होंगे’ और बीजेपी 48 सीटों के साथ दिल्ली में सरकार बनाएगी. मनोज तिवारी ने बड़े ही कॉन्फिडेंस से ये भी कहा था कि उनका ट्वीट संभाल कर रख लिया जाए. सोशल मीडिया यूजर्स ने मनोज तिवारी को सीरियसली ले लिया और वाकई में वो ट्वीट संभालकर रख लिया. अब जब evm की मशीन से बीजेपी के लिए खौफनाक आंकड़े निकले तो सोशल मीडिया यूजर्स ने तिवारी का वही ट्वीट दनदनाना शुरू दिया.

हेट स्पीच देने वालाों को जनता ने सीखाया सबक

दिल्ली चुनाव को सीधे शाहीन बाग वाया पाकिस्तान से जोड़ने वाले बीजेपी उम्मीदवार कपिल मिश्रा, मॉडल टाउन सीट से करीब 11 हजार वोटों से हार गए हैं. अपनी रैलियों और सभाओं में भारत-पाकिस्तान टाइप बात करने वाले कपिल मिश्रा पर चुनाव आयोग ने एक्शन भी लिया, वो माने नहीं और अब जनता ने कपिल मिश्रा पर सख्त एक्शन लिया है. केजरीवाल के वार से लगता है कि कपिल मिश्रा और प्रवेश वर्मा भी सुधर गए हैं. कपिल मिश्रा ने अपनी ही पार्टी को खरी खोटी सुनाना शुरू कर दिया है. प्रकाश जावडेकर के बाद जो प्रवेश वर्मा केजरीवाल को आतंकवादी बता रहे थे और कह रहे थे कि - अब नहीं जागे तो शाहीन बाग वाले आकर बहू-बेटियों का रेप करेंगे वो अब कह रहे हैं कि दिल्ली का जनादेश सिर आंखों पर.

भारी-भरकम कैंपेन-रैलियां काम न आईं!

बीजेपी के गब्बर सिंह आज पूछ रहे होंगे -अरे ओ सांबा, इतने आदमी थे? फिर भी खाली हाथ आ गए? याद रखिएगा दिल्ली की शोले में बीजेपी ने सिर्फ दो आदमी नहीं भेजे थे, माने सिर्फ मोदी और शाह नहीं थे. मोदी जी ने 2 और अमित शाह ने 33 रैलियां और 8 रोड शो तो किए ही थे. कई केंद्रीय मंत्रियों की रैलियां हुईं, योगी जी की रैलियां हुईं. देश भर से बीजेपी के बड़े नेता दिल्ली में कैंप किए हुए थे. 250 सांसदों ने तो झुग्गियों में वक्त बिताया था. कांग्रेस की हालत लगता है कि उस क्रिकेट फैन की तरह हो गई है जो इंडिया के जीतने से ज्यादा पाकिस्तान के हारने पर पटाखे चलाता है. बहरहाल दिल्ली महिला कांग्रेस की अध्यक्ष शर्मिष्ठा मुखर्जी ने सीधे लीडरशिप पर सवाल खड़े किए हैं..कहा है - देर से फैसले लेने के कारण ये गत हुई है.

चुनावी चकल्लस अपनी जगह है, लेकिन बीजेपी को हार का इतना भी बुरा नहीं मानना चाहिए, क्योंकि ये केजरीवाल की नहीं, दिल्ली की जनता की जीत है. दिल्ली देश की राजधानी है, उसे लीड करने की आदत है. देश को दिशा देने की आदत है. न बिरयानी, न गाली, न गोली, दरअसल दिल्ली ने बोली है अपनी बोली...

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