पुलिस Vs वकील का ‘युद्ध’- जिसकी लाठी, उसकी भैंस?

पुलिस Vs वकील का ‘युद्ध’- जिसकी लाठी, उसकी भैंस?

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वीडियो एडिटर: संदीप सुमन

जरा सोचिए पुलिस हेडक्वार्टर की सुरक्षा में CRPF को लगाने की मांग हो रही है.पुलिस वाले FIR दर्ज नहीं करा पा रहे हैं. पुलिस वाले अपने ही महकमे से गुहार लगा रहे हैं कि हमें सुरक्षा की गारंटी दीजिए.और ये सब चंबल की घाटी में किसी दुर्दांत डकैत के डर से नहीं हो रहा है, किसी दूरदराज इलाके में नहीं हो रहा. दिल्ली में हो रहा है.

तो आम आदमी का दिमाग चकरा रहा है कि आखिर ये हो क्या रहा है? वो सोच रहा है कि अगर हमारी सेवा में सदैव तत्पर रहने का दावा करने वाली पुलिस सुरक्षित नहीं है तो आम जन की सुरक्षा की क्या गारंटी है? ऐसे में ये जानने की कोशिश करते हैं कि दिल्ली में ये अनार्की, ये अफरातफरी क्यों है?

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ये अफरातफरी क्यों है?

पुलिस के बाद आज वकीलों ने प्रदर्शन किया. कुछ देर के लिए साकेत और रोहिणी कोर्ट में काम बंद कर दिया.
पुलिस के बाद आज वकीलों ने प्रदर्शन किया. कुछ देर के लिए साकेत और रोहिणी कोर्ट में काम बंद कर दिया.
(फोटो: PTI)

इस पर कोई टीका टिप्पणी करने से पहले आपको बता दूं कि पुलिस बनाम वकील के मामले में आज क्या-क्या हुआ. पुलिस के बाद आज वकीलों ने प्रदर्शन किया. कुछ देर के लिए साकेत और रोहिणी कोर्ट में काम बंद कर दिया.

पुलिस वालों ने वकीलों के खिलाफ FIR की मांग करते हुए जो कोर्ट में याचिका डाली थी, उसमें उनकी नहीं सुनी गई. यानी वकीलों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होगी.

लेकिन यहां तक नौबत कैसे पहुंची?

लेकिन यहां तक नौबत कैसे पहुंची?
लेकिन यहां तक नौबत कैसे पहुंची?
(फोटो: PTI)

2 नवंबर को तीस हजारी कोर्ट परिसर में एक पुलिसवाले और वकील के बीच बहस हुई. आरोप है कि एक पुलिसवाले ने वकील की पिटाई की. फिर क्या था- युद्ध छिड़ गया. साकेत कोर्ट में 4 नवंबर को वकीलों ने पुलिसकर्मियों को पीटा. इसी के खिलाफ 5 नवंबर को पुलिसकर्मियों ने पुलिस हेडक्वार्टर पर प्रदर्शन किया.

ये गंभीर बात क्यों है?

कुल मिलाकर ये पहले से ही फेल होते सिस्टम के लिए रेड अलर्ट है. आम आदमी, वकीलों और पुलिस से आम तौर पर नाराज दिखता
कुल मिलाकर ये पहले से ही फेल होते सिस्टम के लिए रेड अलर्ट है. आम आदमी, वकीलों और पुलिस से आम तौर पर नाराज दिखता
(फोटो: पीटीआई)

अब समझने की कोशिश करते हैं कि ये बेहद गंभीर बात क्यों हैं? पहली बात - पुलिस और वकील दोनों वो हैं जिनके कंधों पर ये जिम्मेदारी है कि कानून का राज रहे. अब अगर यही दोनों आपस में भिड़ जाएं तो ये जिम्मेदारी कौन निभाएगा.

दूसरी बात- मॉब लिंचिंग की खबरें अक्सर सुर्खियां बनती हैं. मानसिकता क्या है इसके पीछे? कोर्ट कचहरी जाने की जरूरत नहीं..सड़क पर ही फैसला कर दो, तो सवाल ये है जब इस मानसिकता पर लगाम लगाने के लिए जिम्मेदार लोग यानी वकील और पुलिस ही सड़क पर फैसला करने लगें तो इससे क्या मैसेज जाएगा? आम आदमी सिस्टम से ऐसे ही परेशान रहता है. वो ये सब देखेगा तो रहा-सहा भरोसा भी खत्म हो जाएगा.

कुल मिलाकर ये पहले से ही फेल होते सिस्टम के लिए रेड अलर्ट है...आम आदमी, वकीलों और पुलिस से आम तौर पर नाराज दिखता है...अब पुलिस वाले भी नाराज हैं..और वकील भी भड़के हुए हैं.... इन सबके गुस्सा का कोई न कोई इलाज जरूरी है.

ये भी पढ़ें : दिल्ली पुलिस-वकील भिड़ंत, कानून के राज के लिए रेड अलर्ट

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