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कोरोना की तीसरी लहर के बीच चुनाव का फैसला, आयोग की शायरी और डरावना सच

IIT मद्रास ने 1-15 फरवरी के बीच तीसरी लहर की पीक का अनुमान लगाया है जबकि 10 फरवरी से शुरू हो रहा चुनाव का पहला चरण

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भारत
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कोरोना की तीसरी लहर के बीच चुनाव का फैसला, आयोग की शायरी और डरावना सच
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चुनाव आयोग (Election Commission) ने 8 जनवरी को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर आगामी 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान कर दिया. यूपी (Uttar Pradesh) में 7 और मणिपुर में 2 चरणों में मतदान होगा जबकि पंजाब (Punjab), उत्तराखंड और गोवा में एक ही चरण में मतदान पूरा किया जाएगा. लेकिन दूसरी तरफ एक और ऐलान है जो केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय हर दिन करता है- भारत में प्रतिदिन आ रहे कोरोना मामलों के आंकड़ों का.

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जब कोरोना के नए और अत्यधिक संक्रामक वेरिएंट ओमिक्रॉन के बढ़ते मामलों के बीच तीसरी लहर का अनुमान लगाया जा रहा हो, बेतहाशा बढ़ती पॉजिटिविटी रेट लोगों को डरा रही हो, पिछली दो लहरों का कड़वा अनुभव यादों से न मिटा हो- सवाल है कि ‘निष्पक्ष चुनाव’ आयोजित करने के संवैधानिक कर्तव्य के बीच चुनाव आयोग ‘सुरक्षित चुनाव’ कैसे आयोजित कराएगा.

बढ़ते कोरोना मामले- ये आंकड़े डराते हैं

भारत में शनिवार, 8 जनवरी को कोरोना के 1,41,986 नए मामले दर्ज किए गए. इसके बाद देश में अब तक कुल कोरोना मामलों की संख्या बढ़कर 3,53,68,372 हो गयी.

पिछले 24 घंटों में 40,895 संक्रमितों के रिकवर करने के बाद, सक्रिय मामलों की संख्या 4,72,169 हो चुकी है. पिछले 24 घंटो में 285 मरीजों की कोरोना संक्रमण से मौत हुई है. देश में अब तक कोरोना के कारण जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 4,83,463 हो गई है.

एक बार फिर पढ़िए- 4,83,463, यानी चार लाख तैरासी हजार चार सौ तरेसठ लोगों की मौत कोरोना से हो चुकी है.

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा शनिवार, 8 जनवरी को जारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ओमिक्रॉन वेरिएंट के 3,071 मामले सामने आए हैं.

IIT मद्रास द्वारा प्रारंभिक विश्लेषण के अनुसार भारत में R-naught वैल्यू (जो कोविड -19 के प्रसार को इंडीकेट करता है) इस सप्ताह 4 पर दर्ज किया गया है और 1-15 फरवरी के बीच तीसरी लहर की पीक आ सकती है.

एक बार फिर याद दिलाएं कि 10 फरवरी से ही इन पांच राज्यों में चुनाव आयोग ने मतदान का पहला फेज आयोजित करने का निर्णय लिया है. वैसे कोरोना की स्थिति पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा ने एक शेर पढ़ा-

“यकीन हो तो कोई रास्ता निकलता है, हवा की ओट लेकर भी चिराग जलता है”

चुनाव आयोग की तैयारी

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भी 23 दिसंबर को पीएम मोदी और चुनाव आयोग से बढ़ते कोविड -19 मामलों को देखते हुए आगामी उत्तर प्रदेश (यूपी) विधानसभा चुनाव को कुछ महीनों तक स्थगित करने का अनुरोध किया था.

बावजूद इसके चुनाव आयोग कोविड प्रोटोकॉल के कड़े पालन के साथ चुनाव कराने को तैयार है.
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आगामी विधानसभा चुनावों के लिए चुनाव आयोग की तरफ से आदर्श आचार संहिता के साथ, मतदान केंद्रों पर कोविड -19 प्रोटोकॉल का पालन करने की भी घोषणा की गई है.

  • चुनाव आयोग ने 15 जनवरी तक फिजिकल राजनीतिक रैलियों और रोड शो पर प्रतिबंध लगा दिया है.

  • महामारी को देखते हुए एक मतदान केंद्र पर वोटर्स की संख्या 1,500 से घटाकर 1,250 कर दी गई है, जिससे चुनाव केंद्रों की संख्या बढ़ गई है.

  • इन सभी राज्यों में मतदान का समय एक घंटे बढ़ा दिया गया है.

  • उम्मीदवारों को डोर-टू-डोर कैम्पेन के लिए अधिकतम पांच व्यक्तियों को अनुमति दी जाएगी.

  • चुनावी नतीजों के बाद विजय जुलूस की अनुमति नहीं होगी.

  • मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय/राज्य राजनीतिक दलों के लिए स्टार प्रचारकों की अधिकतम संख्या 30 और गैर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के लिए 15 की सीमा तय.

  • चुनाव ड्यूटी पर तैनात सभी अधिकारियों को वैक्सीन के दोनों डोज लगे होने चाहियें.

  • चुनाव के लिए उपयोग किए जाने वाले हॉल/कमरे/परिसर के गेट पर सभी व्यक्तियों की थर्मल स्कैनिंग की जाएगी; सेनिटाइजर, साबुन और पानी उपलब्ध कराया जाएगा, राज्य सरकार और गृह मंत्रालय के मौजूदा कोविड-19 दिशानिर्देशों के अनुसार सामाजिक दूरी बनाए रखी जाएगी.

  • चुनाव अधिकारियों के लिए ट्रेनिंग ऑनलाइन मोड में आयोजित किया जा सकता है.

चुनाव आयोग के लिए पिछला अनुभव कड़वा

“चुनाव आयोग के अधिकारियों को राजनीतिक रैलियों में COVID-19 प्रोटोकॉल के दुरुपयोग को रोकने में विफलता के लिए हत्या के आरोपों में मुकदमा चलाया जाना चाहिए”
मद्रास हाई कोर्ट

चुनाव आयोग जब बढ़ते कोरोना मामलों के बीच आगामी विधानसभा चुनावों का शेड्यूल तैयार कर रहा होगा, तब 26 अप्रैल 2021 को मद्रास हाई कोर्ट से मिली यह फटकार याद आई होगी?

यह चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि राजनीतिक पार्टियां, उनके उम्मीदवार चुनावी रैलियों के दौरान और चुनाव अधिकारी मतदान के दौरान करोना प्रोटोकॉल का पालन करें. लेकिन देश के सामने पिछले साल चुनाव आयोग अपनी इस जिम्मेदारी को लेकर ढीला नजर आया. क्या बड़ा नेता- क्या आम कार्यकर्त्ता, प्रोटोकॉल की खुलकर धज्जियां उड़ी थी.

मद्रास हाई कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा था कि अदालत के आदेशों के बावजूद चुनाव आयोग कोविड सुरक्षा नियमों जैसे मास्क, सैनिटाइटर और चुनाव प्रचार के दौरान दूरी को लागू करने में विफल रहा था.

उस समय भी पांच राज्यों- बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी- में चुनाव था. देश ने इन चुनावों के बाद, जिसमें खुलकर कोविड प्रोटोकॉल को ताक पर रख दिया गया, कोरोना महामारी की दूसरी लहर देखी. सवाल है कि जब फिर से चुनाव आयोग 5 राज्यों में चुनाव कराने जा रहा है, कोरोना की तीसरी लहर की भविष्यवाणी की जा रही है- क्या बदल गया है ?

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