अब आजाद ने गिनाईं कांग्रेस की कमियां, पर गांधी परिवार को क्लीन चिट

‘पांच सितारा कल्चर से चुनाव नहीं जीते जाते’

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भारत
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‘पांच सितारा कल्चर से चुनाव नहीं जीते जाते’
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कांग्रेस पार्टी की आंतरिक कलह और उठापटक किसी से छिपी नहीं है. वरिष्ठ नेता खुलकर सामने आ रहे हैं और संगठन के ढांचे में बदलाव और विमर्श पर जोर दे रहे हैं. बिहार चुनाव और उपचुनावों में हार के बाद पार्टी नेताओं के आलोचनात्मक सुरों में तेजी आई है. कुछ दिन पहले कपिल सिब्बल ने कांग्रेस के कमजोर प्रदर्शन पर अपनी राय रखी थी. और अब वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद इस मामले पर बोले हैं. आजाद ने कहा है कि पार्टी के ढांचे को दोबारा बनाने की जरूरत है.

न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में गुलाम नबी आजाद ने कहा कि वो बिहार और उपचुनावों में हार के लिए लीडरशिप को जिम्मेदार नहीं ठहराते हैं. आजाद बोले, "हमारे लोगों का जमीनी स्तर पर कनेक्शन टूट गया है. कार्यकर्ता को पार्टी से प्यार होना चाहिए."

'पांच सितारा कल्चर से चुनाव नहीं जीते जाते'

आजाद ने कहा, "हमारे नेताओं के साथ समस्या है कि अगर टिकट मिल गया तो सबसे पहले 5-स्टार बुक कराते हैं. एयर कंडीशनर गाड़ी के बिना नहीं जाएंगे, जहां कच्ची सड़क है वहां नहीं जाएंगे. पांच सितारा कल्चर से चुनाव नहीं जीते जाते." आजाद बोले कि जब तक ये कल्चर हम नहीं बदलेंगे, हम चुनाव नहीं जीत सकते.

पदाधिकारियों को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए. जब तक पदाधिकारी नियुक्त नहीं होते, वो नहीं जाएंगे. लेकिन अगर सब पदाधिकारी चुने जाएंगे, तो वो अपनी जिम्मेदारी समझेंगे. अभी किसी को भी पार्टी में कोई भी पद मिल जाता है.  
गुलाम नबी आजाद

'गांधी परिवार को क्लीन चिट देता हूं'

गुलाम नबी आजाद ने कहा कि वो कोरोना वायरस महामारी की वजह से गांधी परिवार को क्लीन चिट दे रहे हैं क्योंकि वो अभी कुछ ज्यादा कर नहीं सकते. आजाद ने कहा, "हमारी मांगों में बदलाव नहीं हुआ है. वो हमारी ज्यादातर मांगों को मान गए हैं. अगर हमारी लीडरशिप राष्ट्रीय विकल्प बनना चाहती है तो उसे चुनाव कराने चाहिए."

पिछले 72 सालों में कांग्रेस अपने निम्न स्तर पर है. पिछले दो बार से पार्टी के पास लोकसभा में विपक्ष के नेता का दर्जा भी नहीं है. जब तक हम अपने हर स्तर पर काम करने का तरीका नहीं बदलेंगे, चीजें नहीं बदलेंगी. लीडरशिप को कार्यकर्ताओं को एक प्रोग्राम देना चाहिए और पदों के लिए चुनाव कराने चाहिए.  
गुलाम नबी आजाद

आजाद ने कहा कि पार्टी का ढांचा ढह चुका है और इस ढांचे को दोबारा बनाने की जरूरत है. उन्होंने कहा, "फिर जब इस ढांचे में कोई नेता चुना जाएगा तो काम चलेगा. लेकिन ऐसा कहना कि सिर्फ नेता बदलने से बिहार, एमपी, यूपी जीत जाएंगे, ये गलत है. ये सब सिस्टम बदलने से ही होगा."

सिब्बल भी पार्टी के हालात पर दे चुके हैं राय

हाल ही में अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस के साथ इंटरव्यू में कपिल सिब्बल ने कहा था कि देश के लोग कांग्रेस को एक प्रभावी विकल्प नहीं मानते.

सिब्बल ने कहा था, ''अगर 6 साल तक कांग्रेस ने आत्ममंथन नहीं किया तो हम अब आत्ममंथन के लिए क्या उम्मीद करें? हमें पता है कि कांग्रेस के साथ क्या गलत है. संगठनात्मक रूप से, हम जानते हैं कि क्या गलत है. मुझे लगता है कि हमारे पास सभी जवाब हैं.''

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