बुलेट ही नहीं हाइपरलूप ट्रेन भी चलेगी देश में, स्पीड है ‘तूफानी’


1200 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी हाइपरलूप
1200 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी हाइपरलूप (फोटो: Facebook/Hyperloop One)

बुलेट ही नहीं हाइपरलूप ट्रेन भी चलेगी देश में, स्पीड है ‘तूफानी’

पीएम मोदी 14 सितंबर को मुंबई-अहमदाबाद के बीच चलने वाली पहली बुलेट ट्रेन की नींव रखेंगे. लेकिन उससे पहले देश में चलने जा रही हाइपरलूप ट्रेन के बारे में जान लीजिए, जो स्पीड के मामले में बुलेट ट्रेन से भी तेज होगी.

हवाई जहाज से भी तेज चलने वाली हाइपरलूप ट्रेन को आंध्र सरकार मंजूरी दे चुकी है. यहां ये ट्रेन करीब 1200 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंध्र प्रदेश के दो शहर विजयवाड़ा और अमरावती के बीच 42.8 किमी के रूट पर चलेगी. हाइपरलूप ट्रेन से ये दूरी महज 6 मिनट में ही पूरी हो जाएगी, जबकि अभी सड़क के रास्ते ये दूरी तय करने में करीब एक घंटे का समय लगता है.

आंध्र प्रदेश में विजयवाड़ा और अमरावती के बीच इस प्रोजेक्ट को बनाने में 1300-1600 करोड़ रुपये का खर्च आएगा. 

क्या है हाइपरलूप ट्रेन की खासियतें

हाइपरलूप ट्रेन की खासियत
हाइपरलूप ट्रेन की खासियत
(फोटो: क्विंट हिंदी)
हाइपरलूप ट्रेन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये बुलेट ट्रेन से दोगुनी स्पीड से दौड़ेगी. स्पीड के मामले में ये हवाई जहाज से भी तेज होगी. इसके अलावा हाइपरलूप ट्रेन के इस्तेमाल में बिजली का खर्चा बहुत कम होगा और वायू प्रदूषण बिल्कुल भी नहीं होगा. लेकिन इस ट्रेन में एक बार में कम लोग ही सफर कर पाएंगे.

हाइपरलूप ट्रेन से दिल्ली-मुंबई के बीच 1400 किमी का सफर सिर्फ 55 मिनट, बैंगलुरु-तिरुवनंतपुरम के 636 किमी रूट को 40 मिनट और बैंगलुरु-चेन्नई के 350 किमी रूट को सिर्फ 20 मिनट में पूरा किया जा सकता है.

देश में परिवहन सुधार के लिए हाइपरलूप ट्रेन कामयाब साबित हो सकती है. परिवहन के इस नए साधन से ना सिर्फ यात्रियों, बल्कि बेहद तेज गति से माल ढुलाई करने में भी आसानी होगी.

कैसै चलेगी हाइपरलूप ट्रेन?

हाइपरलूप चुंबकीय शक्ति (मैग्नेटिक पॉवर) पर आधारित ट्रैक पर चलाई जाएगी. इसको चलाने के लिए खंभों के ऊपर एक पारदर्शी ट्यूब बिछाई जाएगी, जिसके भीतर ट्रेन कैप्सूल शक्ल जैसी एक सिंगल बोगी से गुजरेगी. यहां ये ट्रेन 750 मील यानी कि 1224 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकती है.

देखिए ये वीडियो:

खंभों के ऊपर पारदर्शी ट्यूब के भीतर हाइपरलूप ट्रेन को भारी दबाव वाले इंकोनेल से बने बेहद पतले स्की पर स्थिर किया जाएगा. उसके बाद स्की में छेदों के जरिये दबाव बनाकर एयर भरा जाएगा. स्की में लगे चुंबक और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक झटके से ही हाइपरलूप ट्रेन को गति मिलेगी.

कौन-सी कंपनी इसे बनाएगी?

दुनिया की सबसे तेज स्पीड वाली ट्रेन बनानेवाली कंपनी 'हाइपरलूप वन' ने हाइपरलूप ट्रेन की इस परियोजना के बारे में दुनियाभर को बताया है. इस कंपनी ने कुछ समय पहले भारत में एक सम्मेलन भी आयोजित किया था. जिसमें कंपनी ने दिखाया कि किस तरह से हाइरपरलूप ट्रेन के माध्यम से दिल्ली-मुंबई तक की दूरी महज 55 मिनट में तय की जा सकती है.

कंपनी ने सम्मेलन में दिल्ली-मुंबई रूट समेत कुल पांच रूटों पर हाइपरलूप ट्रेन चलाने का प्रस्ताव दिया था. इन रूटों में बेंगलुरू से चेन्नई, बेंगलुरू से तिरुवनंतपुरम, मुंबई से चेन्नई और बेंगलुरू से चेन्नई शामिल है.

पायलट प्रोजेक्ट पर चल रहा है काम

हाइपरलूप वन ने दुनिया के कई देशों से हाइपरलूक तकनीक में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया है. कंपनी को जवाब में कुल 90 देशों से 2600 कंपनियों का हाइपरलूप ट्रेन बनाने का प्रस्ताव मिला है. इन प्रस्तावों में भारत की भी कई कंपनियां शामिल है.

कंपनी अभी इसके पायलट प्रोजेक्ट पर काम कर रही है. कंपनी का मानना है कि एक बार पायलट प्रोजेक्ट तैयार होने के बाद ये तकनीक पूरी दुनिया में फैल जाएगी. इस तकनीक पर भारत समेत अमेरिका-दुबई जैसे कई देशों में काम चल रहा है.

(इनपुट: इंडियन एक्सप्रेस/IANS)