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अफगानिस्तान में तालिबान सरकार के बाद पहली मॉल्को फॉर्मेट मीटिंग, शामिल होगा भारत

20 अक्टूबर को होने जा रही Moscow Format की मीटिंग ज्वाइंट- सेक्रेटरी लेवल की होगी

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भारत
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<div class="paragraphs"><p>Moscow Format में शामिल होगा भारत</p></div>
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अफगानिस्तान (Afghanistan) पर तालिबान (Taliban) के कब्जे के बाद 20 अक्टूबर को पहली बार रूस की राजधानी मॉस्को में “मॉस्को फॉर्मेट” (Moscow Format) की बैठक होने जा रही है. भारतीय विदेश मंत्रालय ने गुरुवार, 14 अक्टूबर को जानकारी दी कि भारत को भी इसके लिए न्योता आया है और वो भी इसमें शामिल होगा.

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20 अक्टूबर को होने जा रही “मॉस्को फॉर्मेट” की मीटिंग ज्वाइंट- सेक्रेटरी लेवल की होगी.

अफगानिस्तान में 15 अगस्त को हुए तख्तापलट के बाद तालिबान और भारत की यह पहली औपचारिक मुलाकात होगी. गौरतलब है कि 31 अगस्त को भारत ने तालिबान के साथ दोहा में अनौपचारिक मुलाकात की थी.

क्या है मॉस्को फॉर्मेट ?

मॉस्को फॉर्मेट अफगानिस्तान के मुद्दों को संबोधित करने के लिए रूस द्वारा 2017 में स्थापित एक वार्ता तंत्र है. इसमें अफगानिस्तान, चीन, पाकिस्तान, ईरान और भारत जैसे देश शामिल हैं. संयुक्त राज्य अमेरिका ने भी पहले मॉस्को फॉर्मेट में भाग लिया था.

20 अक्टूबर की मीटिंग में यह पहली बार नहीं है जब तालिबान को इस मंच पर आमंत्रित किया गया है , लेकिन अफगानिस्तान में सरकार बनने के बाद पहली बार तालिबान इसमें शामिल होगा.

अफगानिस्तान में समावेशी सरकार बनाने की अंतरराष्ट्रीय अपील के बीच रूस ने मॉस्को फॉर्मेट को जारी रखने का फैसला किया है. दूसरी तरफ तालिबान भी अंतरराष्ट्रीय मान्यता की तलाश में है.

तालिबान पर भारत का स्टैंड

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत ने अपना रुख स्पष्ट किया है कि वह अफगान लोगों के साथ खड़ा रहेगा. पीएम मोदी ने भी संयुक्त राष्ट्र में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया था कि अफगान क्षेत्र कट्टरपंथ और आतंकवाद का स्रोत न बने.

अफगानिस्तान में तख्तापलट के बाद नई दिल्ली और तालिबान के बीच संपर्क 31 अगस्त को हुआ था. भारत के राजदूत दीपक मित्तर ने दोहा में तालिबान के राजनीतिक कार्यालय के प्रमुख शेर मोहम्मद अब्बास स्टेनकजई से मुलाकात की थी. यह बैठक तालिबान के अनुरोध पर दोहा में भारतीय दूतावास में हुई थी.

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