पुलवामा: सैनिकों को एयर लिफ्ट करना चाहती थी CRPF,नहीं मानी गई मांग
पुलवामा: सैनिकों को एयर लिफ्ट करना चाहती थी CRPF,नहीं मानी गई मांग
फोटो: द क्विंट

पुलवामा: सैनिकों को एयर लिफ्ट करना चाहती थी CRPF,नहीं मानी गई मांग

द क्विंट की रिपोर्ट में CRPF के मूवमेंट से जुड़ी एक खास डिटेल सामने आई है. एक सीनियर अधिकारी ने क्विंट को बताया CRPF ने इस हफ्ते की शुरुआत में गृह मंत्रालय से एयर ट्रांजिट की मांग की थी. लेकिन रिक्वेस्ट को नजरअंदाज कर दिया गया.

बता दें 14 फरवरी को पुलवामा जिले में CRPF के काफिले पर फिदायीन हमला हुआ था, इसमें 42 जवान शहीद हो गए थे. काफिले में 78 व्हीकल्स थे, जिनमें 2,500 जवान मौजूद थे.

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जम्मू में बर्फबारी के चलते कई जवान फंस गए थे. पिछला काफिले ने 4 फरवरी को यात्रा शुरू की थी. इसलिए हमने अपने CRPF हेडक्वार्टर को एयर ट्रांजिट के लिए रिक्वेस्ट की. उन्होंने रिक्वेस्ट, गृह मंत्रालय के पास बढ़ा दी. लेकिन कुछ नहीं हुआ. किसी ने हमें जवाब देने की जरुरत नहीं समझी. जवानों को हवाई रास्ते से ले जाना न केवल सुरक्षित होता है, बल्कि इसमें पैसा भी कम खर्च होता है, साथ ही कम वक्त भी लगता है.

अधिकारी ने ये भी बताया कि पहले भी एयर ट्रांजिट की रिक्वेस्ट की गई हैं. लेकिन कभी नहीं मानी गईं.

6 दिन पहले IED के इस्तेमाल की इंटेल...

8 फरवरी को इंटेलीजेंस ब्यूरो ने CRPF को एक लेटर लिखा था. इसमें एजेंसी से मूवमेंट के पहले इलाके को अच्छी तरह से साफ करने को कहा गया था. IB ने IED के इस्तेमाल की भी आशंका जताई थी.

रिटॉयर्ड IGP वीपीएस पंवार ने द क्विंट से कहा कि हमले से सुरक्षा की पूरी चूक सामने आती है. ये भी पता चलता है कि सीनियर ऑफिशियल्स ने इंटेल पर कोई ध्यान नहीं दिया.

एक काफिले में आमतौर पर 300-400 जवानों से ज्यादा नहीं होते. काफिले को लगने वाले दिनों को भी पहले तय कर लिया जाता है. 78 व्हीकल्स का इस तरह से मूवमेंट, आतंकवादियों को खुला न्योता था. मुझे लगता है इतने सारे जवानों को एक साथ ले जाने का फैसला सही नहीं था.
वीपीएस पंवार

कुछ सवाल और उनके जवाब...

सबसे बड़ा सवाल है कि एक व्हीकल 200 किलो विस्फोटक के साथ काफिले के पास पहुंचा कैसे? क्या घर से लौट रहे जवानों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए थे.

इन सवालों पर CRPF अधिकारियों के जवाब कुछ इस तरह हैं.

  • काफिला गुरुवार सुबह 3 बजकर 30 मिनट पर चला था. काफिले के पास 'रोड ओपनिंग पार्टी' (ROP)भी थी. काफिले के मूवमेंट के वक्त सिविल व्हीकल्स का मूवमेंट जारी रहता है. इन्हें रोका नहीं जाता. यहां तक कि वे ओवरटेक कर सकते हैं, काफिले के गाड़ियों के बीच भी कई बार सिविल व्हीकल्स आ जाते हैं.
  • कुछ खतरनाक जगहों के आसपास पहुंचने पर काफिले में कुछ बुलेटप्रूफ व्हीकल्स को शामिल किया जाता है. इनका काम आतंकियों की फायरिंग रोकने का होता है.
  • काफिले में जिन बसों में जवान शामिल थे, वे बुलेट प्रूफ नहीं थीं. ROP, रोड पर लगाए गए IED को साफ करता है. ROP के क्लीयरेंस के बाद ही मूवमेंट होता है.
  • इस केस में IED से भरा व्हीकल अपोजिट लेन में बाईं ओर चल रहा था. जैसे ही काफिला, आतंकी के पास पहुंचा, उसने विस्फोटक से भरे व्हीकल को उड़ा दिया. विस्फोट से बस नंबर 5 और 6 प्रभावित हुईं.

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