सवर्ण आरक्षण के मुद्दे पर कुछ यूं बोला सोशल मीडिया
मोदी सरकार के सवर्ण आरक्षण के फैसले को किसी ने सही कहा तो किसी ने चुनावी स्टंट बताया
मोदी सरकार के सवर्ण आरक्षण के फैसले को किसी ने सही कहा तो किसी ने चुनावी स्टंट बताया(फोटो ग्राफिक्स : क्विंट हिंदी)

सवर्ण आरक्षण के मुद्दे पर कुछ यूं बोला सोशल मीडिया

लोकसभा चुनाव से ठीक पहले मोदी सरकार ने ऊंची जाती के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को रिजर्वेशन देने के फैसला कर लिया है. खबर आते ही सोशल मीडिया पर भी लोगों के अलग-अलग रिएक्शन्स देखने को मिल रहे हैं.

सोशल मीडिया पर कुछ लोग इस फैसले से खुश हैं और इसे बिना रिजर्वेशन वाले लोगों के लिए आखिरकार मिली बड़ी राहत मान रहे हैं तो कुछ इसके खिलाफ हैं. देखिए लोगों ने मोदी सरकार के इस फैसले पर क्या कहा?

‘गेम चेंजर’ हो सकता है फैसला

कई लोगों का मानना है कि मोदी सरकार के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है.

एक ट्विटर यूजर ने लिखा -

“95% नंबर लाने के बाद भी मुझे अच्छे कॉलेज में दाखिले के लिए मेहनत करनी पड़ी. मैंने हर कॉलेज में अप्लाई किया इस उम्मीद से कि कहीं तो दाखिला मिल जाएगा. इस रिजर्वेशन के लिए जितना शुक्रिया कहूं कम है”

कुछ लोगों ने इसके लिए मोदी सरकार की तारीफ की.

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सवर्ण आरक्षण एक और ‘जुमला’

वहीं कई लोग ऐसे भी थे जिन्हें इस फैसले में कमियां नजर आई. लोकसभा चुनाव के तुरंत पहले आने की वजह से किसी ने इसे चुनावों में सवर्ण वोटरों को लुभाने का तरीका बताया, किसी ने इसकी वैधता पर सवाल उठाए तो किसी ने BJP को रिजर्वेशन पर पुरानी बातें याद दिलाई.

‘मोदी सरकार जब लोगों कौ नौकरियां ही नहीं दे पा रही है तो रिजर्वेशन कैसे देगी?’

कुछ ट्विटर यूजर्स ने संविधान संशोधन पास हो पाने पर आशंका जताई

“इस रिजर्वेशन के लिए रिएलिटी चेक- अगर सरकार आर्टिकल 15 और 16 में संशोधन करना चाहती है तो दो तिहाई बहुमत चाहिए होगा. अगर सरकार सुप्रीम कोर्ट की लगाई गई 50 फीसदी की सीलिंग पार कर लेती है तो कोर्ट इसे हटा देगा”

“अगर सरकार सच में सवर्ण रिजर्वेशन को पास कराना चाहती तो ये प्रस्ताव सत्र के पहले दिन आता, आखिरी दिनों में नहीं”

कुछ लोगों ने इसे रिजर्वेशन सिस्टम के खिलाफ भी बताया, कहा अंबेडकर के मुताबिक रिजर्वेशन का आधार समाजिक पिछड़ापन था.

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