कौन हैं बोहरा मुसलमान जिनके दर पर पहुंचे पीएम नरेंद्र मोदी?
दाऊदी बोहरा समाज से मिलने पहुंचे मोदी.
दाऊदी बोहरा समाज से मिलने पहुंचे मोदी.(फोटो: @BJP4India)

कौन हैं बोहरा मुसलमान जिनके दर पर पहुंचे पीएम नरेंद्र मोदी?

"बोहरा समाज के साथ मेरा रिश्ता बहुत ही पुराना है. मेरा सौभाग्य है कि इनका स्नेह मुझ पर हमेशा रहा, मैं जब मुख्यमंत्री था तब कदम-कदम पर बोहरा समाज ने मेरा साथ दिया." ये बातें पीएम मोदी ने इंदौर के सैफी मस्जिद में दाऊदी बोहरा मुस्लिम समुदाय के कार्यक्रम में कहा.

देश में बोहरा मुस्लिमों की आबादी करीब 15 लाख है. आइए आपको बताते हैं बोहरा मुस्लिम कौन हैं और ये दूसरे मुस्लिम समुदाय से कैसे अलग है.

अनुयायियों से मिलते बोहरा समुदाय के धर्मगुरु
अनुयायियों से मिलते बोहरा समुदाय के धर्मगुरु
(फोटो: Reuters)

कौन हैं बोहरा मुसलमान?

ऐसे तो मुसलमानों में शिया और सुन्नी दो ऐसे फिरके या पंथ हैं जिन्हें लोग ज्यादा जानते हैं. बोहरा मुसलमान शिया समुदाय का ही एक हिस्सा है. शिया और बोहरा में फर्क इतना है कि शिया 12 इमामों को मानते हैं. वहीं बोहरा कुल 21 इमामों को मानते हैं.

बोहरा समुदाय में भी दो ग्रुप हैं. भारत में रहने वाले ज्यादातर बोहरा दाऊदी हैं. वहीं मिस्र में रहने वाले बोहरा समाज सुलेमानी कहलाता है. भारत में रहने वाले बोहरा इस्माइली शिया समुदाय को मानते हैं. ऐसे जानकारों की मानें तो बोहरा शिया और सुन्नी दोनों होते हैं. लेकिन सुन्नी बोहरा की तादाद बहुत कम है.

बोहरा समाज और इसका इतिहास

बोहरा' गुजराती शब्द 'वहौराउ' मतलब 'व्यापार' से जुड़ा है. इतिहासकार बताते हैं कि यह 11वीं शताब्दी में मिस्र से धर्म प्रचारकों के जरिये ये भारत आए थे. जिसके बाद धीरे धीरे भारत में ये फैलते गए. भारत में ज्यादातर बोहरा आबादी मुंबई, सूरत और इंदौर में रहती है. इस समाज के ज्यादातर लोग बिजनेस से जुड़े हैं.

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बोहरा समाज के इतिहास को देखें तो इनके 21 इमाम थे. दाऊदी बोहराओं के 21वें और आखिरी इमाम तैय्यब अबुल कासिम के बाद से इमामों की परंपरा खत्म हो गई. और दाई-अल-मुतलक सैय्यदना या गुरु का दौर शुरू हुआ.
नरेंद्र मोदी के एक कार्यक्रम में उनके भाषण को उत्साह से सुनते बोहरा समुदाय के लोग 
नरेंद्र मोदी के एक कार्यक्रम में उनके भाषण को उत्साह से सुनते बोहरा समुदाय के लोग 
(फोटो: @BJP4India)

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, 1588 में बोहरा समाज के 30वें सैयदना की मौत के बाद उनके वंशज दाऊद बिन कुतुब शाह और सुलेमान शाह के बीच सैयदना की गद्दी पर दावेदारी को लेकर मतभेद हो गया, और यहीं बोहरा समाज भी दो ग्रुप में बंट गया.

दाऊद बिन कुतुब शाह को मानने वाले दाऊदी बोहरा और सुलेमान को मानने वाले सुलेमानी बोहरा कहलाने लगे. दाऊदी बोहरा समाज का मुख्यालय मुंबई में है. वहीं सुलेमानी बोहरा समाज का हेडक्वार्टर यमन में.

बोहरा समाज, औरतों का खतना और विवाद

ऐसे तो अभी तक इस समाज के पढ़े लिखे और व्यापर में हिस्सा लेने को लेकर खूब चर्चा होती है, लेकिन बोहरा समाज में औरतों के खतने की भी एक ऐसी प्रथा है, जिस पर खुद ये समाज दो तबकों में बंटा हुआ है.

बोहरा समाज का मानना है कि इनके ग्रंथों और किताबों में औरतों के खतने का जिक्र हैं. जिसके तहत बच्ची जब सात साल या इसके आसपास की उम्र की होती है तो उसकी योनि के अगले भाग को (क्लिटोरिस) को काट दिया जाता है. मान्यता है कि इससे लड़कियों की यौन इच्छाओं या सेक्स से जुड़ी इच्छाओं को काबू में रखा जा सकता है. इसे खफ्ज भी कहा जाता है.
बोहरा दाऊदी समाज की महिलाएं धार्मिक आयोजन में हिस्सा लेते हुए
बोहरा दाऊदी समाज की महिलाएं धार्मिक आयोजन में हिस्सा लेते हुए
(फोटो: Reuters)

औरतों के खतने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की गई है. इसी सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इसे महिलाओं की निजता के अधिकार का उल्लंघन बताया था. कोर्ट ने कहा था कि महिलाओं का खतना केवल इसलिए नहीं किया जा सकता कि उन्हें शादी करनी है या अपने पति को खुश करना है. इसके अलावा भी महिलाओं के और दायित्व हैं.

सैयदना का आदेश बोहरा समाज के लिए सब कुछ है

2014 में बोहरा समाज के 52वें सयदैना मोहम्मद बुरहानुद्दीन की मौत के बाद सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन को 53वां गुरु घोषित किया गया. कहते हैं कि सैयदना का बोहरा समाज में सबसे ऊंचा रुतबा है. मतलब उनके हुक्म को समुदाय के हर लोग मानते हैं.

फिलहाल दाऊदी बोहरा समुदाय के मौजूदा और 53वें धर्मगुरू सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन हैं. जिनसे पीएम मोदी और मध्यप्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने मुलाकात की. सैयदना का आदेश दाऊदी बोहरा समाज के लिए सर्वोपरि है. इसलिए पीएम मोदी की उनसे मुलाकात काफी कुछ कहती है.

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