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सीएम पद से इस्तीफा देने को तैयार, लेकिन शिंदे आएं और ये बात कहें- उद्धव ठाकरे

एकनाथ शिंदे के बगावती तेवर से महाराष्ट्र की MVA सरकार संकट में है.

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सीएम पद से इस्तीफा देने को तैयार, लेकिन शिंदे आएं और ये बात कहें- उद्धव ठाकरे
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महाराष्ट्र में जारी सियासी घमासान के बीच मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे सोशल मीडिया के जरिए लोगों से संवाद कर रहे हैं. ठाकरे ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से मीडिया के जरिए कुछ बातें सामने आ रही हैं. बाला साहेब की शिवसेना है या नहीं? मुख्यमंत्री मिलते ही नहीं. ये सब सवाल उठाए जा रहे हैं. पिछले कुछ दिनों में मैं मिल नहीं रहा था ये बात सच है.

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'ये सच है कि मैं लोगों से नहीं मिल रहा था'

उद्धव ठाकरे ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में मैं मिल नहीं रहा था ये बात सच है. उस वक्त मेरा बड़ा ऑपरेशन हुआ था. उस ऑपरेशन के बाद मेरे दो तीन महीने थे, वह बहुत मुश्किल भरे थे. इसलिए, मैं उस वक्त लोगों से मिल नहीं पाता था. ये मुद्दा बिल्कुल सही है. लेकिन उसके बाद मैं लोगों से मिलना शुरू किया. काम करना शुरू किया है. बीमारी के बाद मैंने सबसे पहली मीटिंग हॉस्पिटल रूम के बाहर से की थी. शिवसेना और हिंदुत्व एक ही सिक्के के दो पहलू हैं. और वह दोनों एक दूसरे से कभी अलग नहीं किए जा सकते हैं. ये बात बाला साहेब ने भी कही है.

उद्धव ठाकरे ने कहा कि शिवसेना और हिंदुत्व एक सिक्के के 2 पहलू हैं. हमने 2014 का चुनाव हिंदुत्व के मुद्दे पर ही लड़ा था. हमारी सरकार ने कोरोना संकट का डटकर सामना किया.

'हमने हिंदुत्व के मुद्दे पर ही लड़ा था चुनाव'

उद्धव ठाकरे ने कहा कि 2014 का चुनाव हमने अपने दम पर और हिंदुत्व के मुद्दे पर लड़ा था. हमने उस वक्त भी कठिन परिस्थियों में चुनाव लड़ा था. इस बात का ध्यान रहे कि 2014 के बाद जो लोग बोल रहे हैं कि शिवसेना बाला साहेब ठाकरे वाली नहीं रही, वो लोग ध्यान रखें कि नई शिवसेना से ही हमें मंत्री पद मिले.

उन्होंने कहा कि पहले सूरत गए फिर गुवाहाटी चले गए. कुछ विधायक हमें संपर्क कर ये बता रहे हैं कि हमें यहां पर लाया गया है. हमें वापस आना है. मैं उस बारे में बात नहीं करना चाहूंगा. अभी विधानपरिषद का चुनाव हुआ. इसके बाद सभी विधायक एक होटल में थे. मैं वहां गया. वहां पर भी मैंने कहा था कि शिवसैनिक मेहनत करते हैं, जनता भरोसा करती है, लेकिन हमारे लोगों को साथ में रखने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ती है.

'MLA's बाथरूम भी जातें हैं, तो लोग शक करते हैं, मैं उनमें से नहीं'

उद्धव ने कहा कि कोई बाथरूम भी चला जाता है अकेले तो लोगों पर शक किया जाता है. ऐसी चीजों में मैं विश्वास नहीं रखता हूं और बाला साहेब भी नहीं रखते थे. मैं शिवसेना प्रमुख को जो वचन दिया था उसे पूरा करने के लिए पूरी ताकत से उतरा था. कोई अनुभव मेरे पास नहीं था. कांग्रेस और एनसीपी जिनके साथ में हम सालों से लड़ रहे थे. उनके साथ हम गए. कांग्रेस और एनसीपी ने जब बैठक में हमने निर्णय लेने के लिए गए तो शरद पवार ने मुझसे कहा कि आप सीएम पद का जिम्मा ले. अगर एक साथ काम करना होगा तो आपको नेतृत्व करना होगा.

'हिंदुत्व के लिए किसने क्या किया सब जानते हैं'

उद्धव ठाकरे ने कहा कि कुछ दिन पहले एकनाथ शिंदे के साथ कई विधायक सांसद हम लोग अयोध्या गए थे. हिंदुत्व के मुद्दे को लेकर ही गए थे. हिंदुत्व के लिए किसने क्या किया है? सब जानते हैं.

उन्होंने कहा कि हिंदुत्व को लेकर विधिमंडल में फ्लोर पर बात करने वाला शायद मैं पहला मुख्यमंत्री रहा होऊंगा. कुछ लोग ये बात करते हैं या दिखाने की कोशिश करते हैं कि बाला साहेब की शिवसेना नहीं रही. बाला साहेब की शिवसेना में और आज की शिवसेना में ऐसा कौन सा फर्क है? उनके जो विचार थे वही आगे लेकर जाने का काम हम लोग कर रहे हैं.

ठाकरे ने कहा कि 2012 में बाला साहेब की मृत्यु के बाद 2014 का चुनाव हमने अपने बलबूते पर लड़ा था, और हिंदुत्व के मुद्दे पर ही लड़ा था. उस वक्त भी हमने कठिन परिस्थिति में चुनाव लड़ा था. तब 63 हमारे विधायक चुनकर आए थे.

'एक भी विधायक कह दे तो मैं सीएम पद से इस्तीफा देने को तैयार'

कांग्रेस और एनसीपी कहे कि वो मुझे सीएम पद पर नहीं चाहते हैं तो ये बात एक बार मैं समझ सकता हूं. वो अलग पार्टी है. वो उनका विचार हो सकता है. आज सुबह कमल नाथ जी ने फोन किया. शरद पवार जी ने फोन किया. उन्होंने कहा कि हम आप के साथ हैं. उन्होंने मुझ पर भरोसा दिखाया, लेकिन मेरे ही लोगों को मैं सीएम के पद पर नहीं चाहिए तो क्या करना चाहिए. ये मेरे सामने सबसे बड़ा सवाल है.

उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस एनसीपी को मैं सीएम पद पर चाहिए और मेरी पार्टी के लोगों को नहीं चाहिए तो ठीक है. यही आप कहना चाहते हैं तो मेरे सामने कहने में क्या हर्ज. उसके लिए सूरत जाने की क्या जरूरत थी. अगर आप चाहते हैं कि मैं सीएम पद पर न रहूं तो ठीक है. इनमें से एक भी विधायक मेरे सामने आकर कहता है कि मुझे सीएम उद्धव ठाकरे पद पर नहीं चाहिए तो इस वक्त मैं अपना इस्तीफा देने को तैयार हूं. मुझे कोई मोह नहीं है. जबरदस्ती कुर्सी पर बैठने में मेरी कोई रुचि नहीं है. लेकिन जो कुछ भी कहना है मेरे सामने आकर कहें.

'जब तक शिवसैनिक और कार्यकर्ता मेरे साथ, मैं किसी के सामने नहीं झुकूंगा'

ठाकरे ने कहा कि एक तरफ कहना कि मैं शिवसेना से गद्दारी नहीं करूंगा और दूसरी तरफ ऐसी बातें कहना. एक कहावत होती है. जो कुल्हाड़ी होती है. उसी का डंडा जो लकड़े से बनता है वही पेड़ को तोड़ता है. आज मैं अपना इस्तीफा तैयार करके रखता हूं. जो विधायक चाहते हैं कि मैं इस्तीफा दूं. वह मेरे सामने आए. मुझसे कहे. मैं उसके हाथ में अपना इस्तीफा दे दूंगा. ये मेरी मजबूरी नहीं है. ऐसी बहुत सी चुनौतियां सामने आई हैं और उसका सामना हमने किया है. जब तक मेरे साथ शिवसेना है, शिवसैनिक हैं, कार्यकर्ता हैं, तब तक किसी भी चुनौती से नहीं डरूंगा. किसी भी चुनौती को अपनी पीठ नहीं दिखाऊंगा.

उन्होंने कहा कि मेरे पर आरोप लगाए जाते हैं कि ये बाला साहेब की शिवसेना नहीं है. इसके लिए भी मेरे पास एक जवाब है. जिन शिव सैनिकों को लगता है मैं शिवसेना का नेतृत्व करने का पात्र नहीं हूं तो मैं ये पद भी छोड़ने को तैयार हूं.

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