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स्वामी से ममता, संजय से अखिलेश-इन दो असामान्य मुलाकात में है क्या बात?

अखिलेश यादव और संजय सिंह की तस्वीर ने यूपी चुनाव में बन रहे समीकरणों की तस्वीर दिखाई

Updated
<div class="paragraphs"><p>अखिलेश यादव, संजय सिंह और ममता बनर्जी और सुब्रमण्यम स्वामी</p></div>
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राजनीतिक जगत से जुड़ी दो तस्वीरें बुधवार 24 नवंबर को खूब चर्चा में रहीं. एक तस्वीर में यूपी चुनाव (UP Election) के समीकरण नजर आए तो दूसरी तस्वीर राष्ट्रीय राजनीति को लेकर कुछ कहती नजर आई. पहली तस्वीर में यूपी के पूर्व सीएम और एसपी चीफ अखिलेश यादव आम आदमी पार्टी सांसद संजय सिंह के साथ दिखे, वहीं दूसरी तस्वीर ममता बनर्जी और बीजेपी के सांसद सुब्रमण्यम स्वामी की थी. आइए समझते हैं इन दो असामान्य मुलाकातों के पीछे की बात...

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ममता और स्वामी की मुलाकात के मायने

पहले बात पश्चिम बंगाल में बीजेपी को करारी मात देने वालीं ममता बनर्जी और बीजेपी के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी की करते हैं. ममता इन दिनों दिल्ली दौरे पर हैं और 2024 के लिए एक बार फिर पिच तैयार करने की कोशिश में जुटी हैं. इसी बीच पवन वर्मा और कीर्ति आजाद जैसे कुछ नेताओं ने ममता की मौजूदगी में पार्टी ज्वाइन की.

लेकिन बुधवार 24 नवंबर को ममता सुब्रमण्यम स्वामी के साथ नजर आईं. जिसके बाद स्वामी के टीएमसी में जाने को लेकर खूब चर्चा हुई. सोशल मीडिया पर ज्यादातर लोगों ने यही कयास लगाए. लेकिन इसके दूसरे मायने भी निकाले जा सकते हैं. ममता बनर्जी खुद को प्रधानमंत्री मोदी के सामने सबसे बड़े और मजबूत चेहरे के तौर पर पेश करना चाहती हैं. ऐसे में स्वामी जैसे नेताओं के साथ उनकी मुलाकात को समान्य नहीं कहा जा सकता है.

स्वामी भले ही बीजेपी के सांसद हों, लेकिन वो कई बार अपने बयानों को लेकर विवादों में रहते हैं. साथ ही बीजेपी के फैसलों पर भी सवाल उठाने में नहीं हिचकते. लेकिन इसमें कोई दोराय नहीं है कि स्वामी राष्ट्रीय राजनीति में एक बड़ा चेहरा हैं. इसीलिए ये भी हो सकता है कि भविष्य को देखते हुए ममता कुछ समीकरण बिठा रही हों.

लेकिन जिस तरह से ममता बनर्जी के साथ मुलाकात के बाद स्वामी ने उनकी तारीफ की है, उससे कहीं न कहीं इस बात को बल मिलता है कि उनका झुकाव टीएमसी और खासतौर पर ममता बनर्जी की तरफ बढ़ा है. स्वामी ने ट्विटर पर लिखा,

"मैं आज तक जितने भी नेताओं से मिला और जिनके साथ काम किया, उनमें से ममता बनर्जी ठीक जेपी, मोरारजी देसाई, राजीव गांधी, चंद्रशेखर और पीवी नरसिम्हा राव के जैसी हैं. ऐसे लोग जो कहते हैं वही करते हैं. भारतीय राजनीति में ये एक दुर्लभ गुण है."
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अखिलेश-संजय सिंह की तस्वीर 

अब दूसरी तस्वीर की बात करते हैं. जिसमें यूपी चुनाव में बन रहे समीकरणों की एक झलक नजर आई. आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने दूसरी बार अखिलेश यादव के साथ मुलाकात की. जिसके बाद कहा जा रहा है कि अखिलेश AAP के साथ गठबंधन करने के मूड में दिख रहे हैं. ओवैसी की AIMIM से किनारा कर चुके अखिलेश यादव आरएलडी और AAP जैसे छोटे दलों को अपने साथ लेकर चलना चाहते हैं, जो उनकी चुनावी रणनीति का एक अहम हिस्सा हो सकता है.

अखिलेश की SP को कितना फायदा?

अखिलेश यादव यूपी की राजनीति के पुराने खिलाड़ी हैं. इसीलिए वो जो कुछ कर रहे हैं, उसमें कहीं न कहीं उन्हें फायदा नजर आ रहा है. रही बात AAP के साथ हाथ मिलाने की तो अखिलेश को इस डील से फायदा ही फायदा होगा, इसका नुकसान कुछ नहीं है. क्योंकि महिलाओं और गरीबों को मुफ्त सुविधाएं उपलब्ध कराने के वादों के साथ आम आदमी पार्टी ने जो माहौल तैयार किया है, उसका फायदा सीधे अखिलेश को मिलेगा. उसके बदले अखिलेश को कुछ सीटों पर समझौता जरूर करना पड़ सकता है, लेकिन ये उनके लिए फायदे का ही सौदा रहने वाला है.

अगर आम आदमी पार्टी अलग चुनाव लड़ती है तो अखिलेश की पार्टी के वोट कटेंगे. जिसका सीधा फायदा सत्ताधारी बीजेपी को होगा. साथ ही कई ऐसी सीटें होंगीं जहां दोनों ही पार्टियों के हाथ कुछ भी नहीं लगेगा. ऐसे में अगर सीट शेयरिंग पर बात बनती है तो अखिलेश इस डील को सील करने की पूरी तैयारी में रहेंगे.

गठबंधन के सहारे यूपी में जमीन तलाश रही AAP

अब अगर आम आदमी पार्टी की बात करें तो उसके लिए गठबंधन ही सबसे बड़ा सहारा नजर आ रहा है. क्योंकि भले ही पार्टी तमाम तरह के दावे कर ले, लेकिन शिक्षा, स्वास्थ्य और मुफ्त बिजली जैसे वादों से यूपी की चढ़ाई करना काफी मुश्किल है. यहां पर पार्टी का कोई भी जमीनी अस्तित्व नहीं है. पार्टी इसके लिए हाल ही में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों का सहारा लेकर दावा करती है कि करीब 85 सीटों पर जिला पंचायत सदस्य उनके हैं. लेकिन इसकी कोई गारंटी नहीं है कि ये जिला पंचायत सदस्य विधानसभा चुनावों में पार्टी को एक सीट भी दिला पाएं.

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इसीलिए आम आदमी पार्टी को लग रहा है कि वो अखिलेश की उंगली पकड़कर यूपी चुनाव की मुश्किल डगर को पार करे. सभी सीटों पर लड़ने का दावा करने वाली पार्टी अब गठबंधन की तरफ देख रही है, ये इसका सबसे बड़ा उदाहरण है. क्योंकि हो सकता है कि गठबंधन के सहारे AAP यूपी विधानसभा में अपना खाता खोल सके.

अब भले ही AAP की साफ सुथरी छवि को समाजवादी पार्टी के साथ जाने पर थोड़ा ठेस पहुंचे, लेकिन पार्टी के सांसद और यूपी प्रभारी संजय सिंह अभी से ये कह रहे हैं कि वो बीजेपी की तानाशाही को खत्म करने के लिए ये सब कर रहे हैं. अखिलेश यादव के साथ फोटो शेयर करते हुए भी संजय सिंह ने लिखा कि, "उत्तर प्रदेश को भाजपा की तानाशाही से मुक्त कराना है"

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