राजस्थान में NOTA अभियान ने BJP और कांग्रेस की टेंशन बढ़ाई
वोटिंग मशीन का प्रतीकात्मक फोटो
वोटिंग मशीन का प्रतीकात्मक फोटो(फाइल फोटो)

राजस्थान में NOTA अभियान ने BJP और कांग्रेस की टेंशन बढ़ाई

राजस्थान में बीजेपी और कांग्रेस को NOTA ने बुरी तरह डरा दिया है. दोनों पार्टियों की इतनी मेहनत के बावजूद बहुत से इलाकों में NOTA अभियान को गजब का समर्थन मिल रहा है.

जैसलमेर, जोधपुर, जयपुर, उदयपुर जैसे शहरों में लोग यही कह रहे हैं कि हम वोट डालने तो जाएंगे पर नोटा दबाकर चलें आएंगे.

ये भी पढ़ें- राजस्थान: सट्टा बाजार में BJP को चांस नहीं, कांग्रेस काफी आगे

नोटा (NOTA) मतलब है इनमें से कोई नहीं (None Of The Above). वोटिंग मशीन में नोटा बटन दबाना यानी इनमें से कोई भी उम्मीदवार पसंद नहीं. बीजेपी और कांग्रेस को ये हालात असहज करने वाले हैं.

राजस्थान में चुनाव से जुड़ी सामग्री बनाने वाले लोग
राजस्थान में चुनाव से जुड़ी सामग्री बनाने वाले लोग
फोटो- पीटीआई

वोट फॉर नोटा अभियान

जाति और धर्म की राजनीति के खिलाफ विरोध के लिए वोट फॉर नोटा अभियान जयपुर में कुछ दिन पहले शुरू हुआ पर अब वो राज्य के जैसलमेर और दूर दराज के शहरों तक पहुंच चुका है.

खासतौर पर सवर्ण मतदाता इस अभियान को खूब हवा दे रहे हैं. इसे वॉट्स ऐप में शेयर करने के साथ पर्चियों और पोस्टरों के जरिए भी बंटवाया जा रहा है. नोटा अभियान की शुरुआत एससी-एसटी कानून के खिलाफत में शुरू हुई लेकिन धीरे धीरे इसका दायरा बढ़ता जा रहा है.

संगठनों की अपील नोटा विरोध का सही तरीका नहीं

कई संगठनों ने लोगों से अपील की है कि वो नोटा के बजाए सबसे अच्छे उम्मीदवार को वोट करें. इस अभियान में जुटे एक संगठन एटर्नल मेमोइर्स एंड कीर्तिवन फाउंडेशन के चेयरमैन एस के तिजारावाला के मुताबिक वो लोगों से अपील कर रहे हैं कि वो चाहे जिसको वोट दें पर वोट जरूर करें.

तिजारावाला ने बाकायदा ट्विटर और दूसरे अभियानों के जरिए लोगों से वोट करने की अपील की है. इनमें लोगों को जागरूक किया गया जा रहा है कि नोटा का बटन नहीं बल्कि किसी उम्मीदवार के नाम का बटन दबाएं. तिजारावाला पतंजलि से भी जुड़े हैं.

राजस्थान में चुनाव अभियान के दौरान वसुंधरा राजे और अमित शाह 
राजस्थान में चुनाव अभियान के दौरान वसुंधरा राजे और अमित शाह 
(फोटोः PTI)

नोटा से कांग्रेस और बीजेपी क्यों परेशान

ये अभियान बीजेपी और कांग्रेस दोनों के वोट बैंक में सेंध लगा रहा है. इसलिए दोनों पार्टियां लोगों को मनाने की कोशिश भी कर रही हैं कि नोटा दबाना सही तरीका नहीं

बीजेपी और कांग्रेस के डरने की वजह यही है कि 2013 में पहली बार एंट्री के बाद ही नोटा ने शानदार एंट्री मारी है. 2013 के विधानसभा चुनाव में राजस्थान के 3.02 करोड़ वोट डाले गए थे जिसमें नोटा को करीब 2 परसेंट  (लगभग 6 लाख) वोट मिले थे. हालत ये हुई थी कि मैदान में उतरीं 58 पार्टियों में से सिर्फ 4 पार्टियों को ही नोटा से ज्यादा वोट मिले थे.

2013 के वोट पाने वालों में नोटा चौथे नंबर पर

  1. बीजेपी- 46 परसेंट
  2. कांग्रेस- 33.7 परसेंट
  3. नेशनल पीपुल्स पार्टी- 4.3 परसेंट
  4. बीएसपी- 3.4 परसेंट
  5. नोटा- 1.93 परसेंट

सीपीआई, समाजवादी पार्टी, जेडीयू, जेडीएस और एनसीपी जैसी पार्टियों को भी नोटा के मुकाबले कम वोट मिले थे.

अशोक गहलोत और सचिन पायलट राजस्थान कांग्रेस के नेताओं के साथ
अशोक गहलोत और सचिन पायलट राजस्थान कांग्रेस के नेताओं के साथ
(फोटोः PTI)

नोटा प्रोमोशन दफ्तर खुले

राजस्थान में सवर्णों से जुड़े क्षत्रिय समाज, सर्व समाज संघर्ष समिति जैसे संगठन इस अभियान को हवा दे रहे हैं. समिति का दावा है कि उन्हें कोई सही उम्मीदवार नहीं दिख रहा है इसलिए नोटा पर वोट डालने की अपील कर रहे हैं.

जयपुर में तो सर्व समाज संघर्ष समिति ने नोटा प्रोमोशन दफ्तर भी खोल लिया है. दावा किया जा रहा है कि सभी 200 विधानसभा सीटों में उनके कार्यकर्ता नोटा के प्रचार में सक्रिय हैं.

राजस्थान में 7 दिसंबर को वोटिंग है और 11 दिसंबर को वोटों की गिनती होगी.

(यहां क्लिक कीजिए और बन जाइए क्विंट की WhatsApp फैमिली का हिस्सा. हमारा वादा है कि हम आपके WhatsApp पर सिर्फ काम की खबरें ही भेजेंगे.)

Follow our पॉलिटिक्स section for more stories.

    वीडियो