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Bikru Kand: यूपी में खुशी दुबे के नाम पर खूब हुई सियासत,30 महीने बाद जेल से रिहा

Bikru Kand: आरोपी खुशी दुबे का पति और विकाश दुबे का भतीजा अमर दुबे पुलिस एनकाउंटर में मारा गया था.

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राज्य
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कानपुर (Kanpur) के चर्चित बिकरू कांड (Bikru Kand) में आरोपी खुशी दुबे (Khushi Dubey) को जेल से रिहा कर दिया गया है. सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने पर 30 महीने बाद खुशी माती जेल से रिहा हुई है. बता दें कि खुशी दुबे बिकरू कांड के आरोपी रहे अमर दुबे की पत्नी है. अमर दुबे को एनकाउंटर में ढेर कर दिया गया था.

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जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने कहा कि 4 तारीख को थाने गई और 8 तारीख को जेल, उन चार दिनों में मुझ पर क्या बीती मैं नहीं बता सकती. मुझे आज तक नही पता मैं किस मामले में जेल गई थी.

विधानसभा चुनाव में खुशी के नाम पर राजनीति

ब्राह्मण समाज से आने वाली खुशी दुबे के जेल जाने के बाद, उनके नाम पर खूब राजनीति हुई. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान समाजवादी पार्टी (SP), कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने बीजेपी के खिलाफ खुशी को यूपी में महिला उत्पीड़न का चेहरे के रूप में पेश किया.

2021 में BSP नेता नकुल दुबे ने ऐलान किया था कि खुशी दुबे की रिहाई की लड़ाई बीएसपी लड़ेगी. इसके साथ ही AAP, SP, BSP और कांग्रेस की ओर से खुशी की मां को चुनाव लड़ने का भी ऑफिर दिया गया था. हालांकि, बाद में खुशी की मां ने चुनाव लड़ने से मना कर दिया. जिसके बाद ये मुद्दा ठंडा हो गया था.

लेकिन बाद में कांग्रेस ने खुशी की बहन नेहा तिवारी को कानपुर के कल्याणपुर विधानसभा सीट से टिकट दिया. हालांकि, वो बुरी तरह से हार गई और चौथे स्थान पर रहीं. उन्हें मात्र 2,302 वोट ही मिले थे.

खुशी की रिहाई पर आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने ट्वीट किया, "खुशी दुबे निर्दोष थी लेकिन उसे खूंखार अपराधियों की तरह सजा दी गई."

जून 2021 में संजय सिंह ने खुशी की मां गायत्री के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस किया था. तब उन्होंने योगी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था कि, "योगी हमेशा गरीबों पर अपनी ताकत दिखाते हैं. अगर कोई आवाज उठाता है तो उसे जेल भेज देते हैं."

अखिलेश-प्रियंका ने जमानत मिलने पर जताई थी खुशी

4 जनवरी को खुशी को जमानत मिलने पर एसपी सुप्रीमो अखिलेश यादव ने ट्वीट कर खुशी जताई थी. उन्होंने ट्वीट किया था, "खुशी दुबे की जमानत 'बीजेपी के अन्याय और नारी उत्पीड़न’ के दुष्प्रयासों की करारी हार है. बीजेपी याद रखे अंततः जीत न्याय की ही होती है; अहंकार की नहीं."

SP सुप्रीमो अखिलेश यादव का ट्वीट

(फोटो: ट्विटर)

वहीं कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने ट्वीट किया था, "कानपुर की खुशी दुबे को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई. बीजेपी सरकार द्वारा अपनी नाकामी पर पर्दा डालने के लिए उसे जेल में डालना और महीनों तक प्रताड़ित करना अन्याय की पराकाष्ठा है. माननीय कोर्ट के इस फैसले से न्याय की जीत हुई है."

कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी का ट्वीट

(फोटो: ट्विटर)

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खुशी पर क्या-क्या आरोप लगे हैं?

खुशी दुबे पर बिकरू कांड में साजिश और आरोपियों की मदद करने का आरोप है. वकील शिवाकांत ने बताया कि खुशी के खिलाफ 302, 396, 7CLA जैसी गंभीर धाराएं लगाई गई थीं. उन्होंने कहा कि, मुझे कानून पर विश्वास था देर लगी लेकिन न्याय मिला.

खुशी को लेने जेल पहुंची उनकी बहन नेहा तिवारी ने कहा कि ये पल बहुत दिनों के बाद आया है. इसका हमें इंतजार था, मैं सभी को धन्यवाद देती हूं कि सभी ने मेरा साथ दिया. खुशी के चुनाव लड़ने के सवाल पर उन्होंने कहा कि अभी ऐसा कोई विचार नहीं है.

हाथों की मेंहदी छूटने से पहले लगी हथकड़ी

बिकरू कांड के मुख्य आरोपी विकास दुबे के भतीजे अमर दुबे की 30 जून 2020 को खुशी के साथ शादी हुई थी. शादी के दो दिन बाद ही बिकरू कांड हो गया.

दरअसल, 2 जुलाई 2020 की रात गैंगस्टर विकास दुबे की तलाश में पुलिस की एक टीम बिकरू गांव पहुंची थी, जहां पहले से घात लगाए विकास और उसके गुर्गों ने पुलिस टीम पर गोलियां बरसा दीं, इस घटना में कुल 8 पुलिसकर्मी मारे गए थे. घटना के बाद पुलिस एनकाउंटर में विकास दुबे, अमर दुबे समेत 6 गैंगस्टर्स मारे गए.

4 जुलाई को पुलिस ने खुशी दुबे को गिरफ्तार कर लिया. इसके चार दिन बाद यानी 8 जुलाई को उसे जेल भेज दिया गया.

पिछले ढाई से खुशी जेल में बंद थी. सेशन कोर्ट और हाईकोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद 4 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली. इसके 18 दिन बाद खुशी जेल से रिहा हुईं.

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